बेल्ट से पिटाई, CCTV और खौफ…दून मेडिकल कॉलेज का रोंगटे खड़े कर देने वाला काला सच

Published : Jan 18, 2026, 04:05 PM IST

Dehradun Medical College: दून मेडिकल कॉलेज में ऐसा क्या हुआ कि एक फर्स्ट ईयर MBBS छात्र खुद को “सहमा और डरा हुआ” बता रहा है? आरोप है कि सीनियर छात्रों ने बेल्ट से पिटाई की। क्या यह सिर्फ रैगिंग है या सिस्टम की बड़ी चूक? जांच जारी, जवाब बाकी हैं…

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Medical College Ragging: देहरादून के गवर्नमेंट दून मेडिकल कॉलेज से सामने आया रैगिंग का मामला एक बार फिर मेडिकल कॉलेजों में छात्रों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर रहा है। फर्स्ट ईयर MBBS छात्र की पिटाई, वह भी बेल्ट से, और सीनियर छात्रों पर सीधे आरोप-यह घटना सिर्फ अनुशासन का नहीं, बल्कि भरोसे का संकट बन गई है। जिस संस्थान में युवा डॉक्टर बनने का सपना लेकर आते हैं, वहां अगर डर, हिंसा और रैगिंग का माहौल हो, तो यह बेहद चिंताजनक है।

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क्या यह सिर्फ रैगिंग है या हद पार करती हिंसा?

पटेल नगर इलाके में स्थित दून मेडिकल कॉलेज में फर्स्ट ईयर MBBS छात्र ने आरोप लगाया है कि उसके साथ सीनियर छात्रों ने न सिर्फ रैगिंग की, बल्कि बेल्ट से उसकी पिटाई भी की। यह घटना कथित तौर पर 12 जनवरी को हुई, जिसकी शिकायत छात्र ने 13 जनवरी को दर्ज कराई। छात्र ने अपनी शिकायत में साफ कहा है कि वह डरा हुआ और सहमा हुआ महसूस कर रहा है, और उसे बदले की कार्रवाई का डर है। यह बयान अपने आप में बताता है कि मामला कितना गंभीर है।

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सीनियर छात्र या डर का कारण?

पीड़ित छात्र ने 2023 और 2024 बैच के दो सीनियर छात्रों के नाम लिए हैं। आरोप है कि इन छात्रों ने उसे शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया। मेडिकल कॉलेज जैसे अनुशासित संस्थान में इस तरह की घटना ने प्रशासन को भी चिंता में डाल दिया है।

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कॉलेज प्रशासन ने क्या कदम उठाए?

मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. गीता जैन ने कहा कि एंटी-रैगिंग कमेटी ने इस शिकायत को गंभीरता से लिया है और मामले की विस्तृत जांच जारी है। उन्होंने यह भी बताया कि डिसिप्लिन कमेटी ने संबंधित छात्रों के बयान दर्ज कर लिए हैं।

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क्या जीरो टॉलरेंस सिर्फ कागज़ों में है?

कॉलेज प्रशासन का कहना है कि संस्थान में रैगिंग के खिलाफ जीरो-टॉलरेंस नीति लागू है। प्रिंसिपल के अनुसार, अगर आरोप साबित होते हैं तो आरोपी छात्रों को सस्पेंड किया जा सकता है, और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। लेकिन सवाल यह है कि अगर जीरो टॉलरेंस है, तो ऐसे मामले बार-बार सामने क्यों आ रहे हैं?

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क्या डर के कारण कई छात्र चुप रह जाते हैं?

फिलहाल मामला एंटी-रैगिंग कमेटी की जांच में है। कॉलेज प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि छात्रों की सुरक्षा और मानसिक शांति उनकी प्राथमिकता है। अब सबकी नजर इस पर है कि जांच रिपोर्ट में क्या सामने आता है और क्या दोषियों पर वाकई सख्त कार्रवाई होती है।  इस केस ने एक और बड़ा सवाल खड़ा किया है-कितने ऐसे छात्र होंगे जो डर के कारण शिकायत ही नहीं करते? 

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