
नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली का एक प्रतिष्ठित सरकारी अस्पताल रविवार की सुबह अचानक उस वक्त छावनी में तब्दील हो गया, जब नाइट ड्यूटी पर तैनात एक होनहार युवा डॉक्टर अपने ही कमरे में मृत पाए गए। उत्तर दिल्ली के सिविल लाइंस इलाके में स्थित अरुणा आसफ अली सरकारी अस्पताल के भीतर हुई इस दिल दहला देने वाली घटना ने पूरी मेडिकल कम्युनिटी को झकझोर कर रख दिया है। सुबह के करीब 9 बजे थे, जब अस्पताल की तीसरी मंजिल पर स्थित एक कमरे का दरवाजा तोड़ा गया और अंदर का खौफनाक मंजर देखकर वहां मौजूद स्टाफ की चीख निकल गई। 35 वर्षीय सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर की इस रहस्यमयी मौत ने पुलिस महकमे से लेकर फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स तक के होश उड़ा दिए हैं।
पंजाब के लुधियाना के रहने वाले डॉ. सिमरप्रीत सिंह आनंद पिछले तीन सालों से अरुणा आसफ अली अस्पताल के बेहद महत्वपूर्ण एनेस्थीसिया (Anesthesia) विभाग में बतौर सीनियर रेजिडेंट अपनी सेवाएं दे रहे थे। शनिवार, 4 जुलाई की रात 8 बजे उन्होंने हमेशा की तरह अपनी 12 घंटे की लंबी नाइट ड्यूटी संभाली थी, जो अगले दिन यानी 5 जुलाई की सुबह 8 बजे खत्म होनी थी।
पुलिस जांच में सामने आया है कि शनिवार की रात करीब 10 बजे डॉ. आनंद ने अस्पताल के ही एक टेक्नीशियन से कहकर अपने बाएं हाथ में एक कैनुला (Cannula) लगवाया था। ड्यूटी खत्म होने के बाद जब सुबह 9 बजे तक वे बाहर नहीं आए, तो स्टाफ को चिंता हुई। ड्यूटी रूम नंबर 109 अंदर से पूरी तरह लॉक था। बार-बार खटखटाने पर भी जब कोई हलचल नहीं हुई, तो सुरक्षाकर्मियों ने जबरन दरवाजा तोड़ा। डॉ. आनंद बिस्तर पर बेसुध पड़े थे। उन्हें तुरंत इमरजेंसी ले जाया गया, लेकिन बहुत देर हो चुकी थी; डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
अस्पताल में डॉक्टर की मौत की खबर फैलते ही सिविल लाइंस पुलिस स्टेशन की टीम तुरंत मौके पर पहुंची। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए रोहिणी की डिस्ट्रिक्ट क्राइम टीम और फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) के सीनियर एक्सपर्ट्स को तुरंत मौके पर बुलाया गया। जांचकर्ताओं ने जब कमरे की सघन तलाशी ली, तो डॉ. आनंद के बिस्तर के पास से एक काले रंग का बैग बरामद हुआ। इस बैग को खोलते ही मामले में एक नया और सनसनीखेज मोड़ आ गया।
बैग के भीतर से पुलिस को:
इन सबूतों के मिलते ही यह साफ हो गया कि यह सामान्य मौत नहीं, बल्कि इसके पीछे एक गहरी और दर्दनाक कहानी छिपी हुई है।
पुलिस को मिले 3 पन्नों के सुसाइड नोट ने इस पूरी त्रासदी के पीछे छिपे सबसे बड़े सस्पेंस से परदा उठा दिया है। डॉ. आनंद ने अपने इस आखिरी खत में साफ तौर पर लिखा है कि वे यह आत्मघाती कदम अपनी मर्जी से उठा रहे हैं। लेकिन, इसके आगे जो लिखा था, उसने आधुनिक समाज की एक कड़वी हकीकत को सामने ला दिया। खत में अस्पताल के ही एनेस्थीसिया विभाग में पिछले दो साल से सीनियर रेजिडेंट के तौर पर काम कर रही उनकी साथी डॉक्टर, डॉ. आकांक्षा चौधरी के साथ उनके गहरे रिश्ते का जिक्र था। डॉ. चौधरी मूल रूप से मध्य प्रदेश के जबलपुर की रहने वाली हैं। नोट के मुताबिक, दोनों एक-दूसरे से बेहद प्यार करते थे और शादी करना चाहते थे। लेकिन दोनों के परिवार इस रिश्ते के सख्त खिलाफ थे, क्योंकि वे अलग-अलग जातियों से ताल्लुक रखते थे। परिवारों के इसी कड़े विरोध और सामाजिक दबाव ने दोनों को बुरी तरह तोड़ दिया था, जिसके बाद हताश होकर डॉ. आनंद ने मौत का रास्ता चुन लिया।
इस हाई-प्रोफाइल मामले में दिल्ली पुलिस फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। डॉ. आनंद के शव को सुरक्षित मॉर्चरी में रखवा दिया गया है, जहां सोमवार को डॉक्टरों का एक विशेष 'मेडिकल बोर्ड' उनका पोस्टमार्टम करेगा। FSL की टीम इस बात की जांच कर रही है कि सिरिंज के जरिए डॉक्टर के शरीर में कौन सा घातक केमिकल या एनेस्थेटिक ड्रग इंजेक्ट किया गया था। पुलिस अब डॉ. आनंद और डॉ. आकांक्षा के मोबाइल चैट, कॉल रिकॉर्ड्स और उनकी पर्सनल डायरी के पन्नों को खंगाल रही है ताकि मौत की इस खौफनाक रात की पूरी क्रोनोलॉजी को समझा जा सके।
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