
नई दिल्ली: आम जनता की जेब पर महंगाई का एक और बड़ा और तीखा प्रहार हुआ है। दिल्ली और उससे सटे नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) में कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (CNG) की कीमतों में एक बार फिर ₹2 प्रति किलोग्राम की भारी बढ़ोतरी कर दी गई है। पिछले मात्र 14 दिनों के भीतर ईंधन की दरों में यह चौथी वृद्धि है, जिसने मध्यम वर्ग और सार्वजनिक परिवहन चालकों की कमर तोड़कर रख दी है। मध्य-पूर्व के संकट के बीच आई इस खबर ने हर तरफ हड़कंप मचा दिया है।
इस ताज़ा बढ़ोतरी के पीछे का गणित बेहद चौंकाने वाला है। सरकारी तेल कंपनियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते ऊर्जा संकट का बोझ सीधे घरेलू उपभोक्ताओं पर डालना शुरू कर दिया है। इस सिलसिले की शुरुआत 15 मई को हुई जब CNG की कीमतें सीधे ₹2 बढ़ाई गईं। इसके ठीक तीन दिन बाद यानी 18 मई को ₹1 की और बढ़ोतरी की गई। सिलसिला यहीं नहीं थमा; 23 मई को फिर ₹1 का इजाफा हुआ और अब ठीक दो हफ्ते के भीतर चौथी बार इसमें ₹2 की और बड़ी वृद्धि कर दी गई है। इस लगातार हो रहे बदलाव ने बजट को पूरी तरह बिगाड़ दिया है।
इस ताज़ा संशोधन के बाद दिल्ली-NCR समेत कई प्रमुख शहरों में CNG के दाम आसमान छूने लगे हैं। नए आंकड़ों के अनुसार, अब जेब कितनी ढीली होगी, इसका ब्योरा इस प्रकार है:
| शहर | नई कीमत (₹ प्रति किलोग्राम) |
| दिल्ली | ₹83.09 |
| नोएडा / गाज़ियाबाद | ₹91.70 |
| ग्रेटर नोएडा | ₹91.70 |
| गुरुग्राम | ₹88.12 |
| अजमेर | ₹92.44 |
मुंबई में कीमतें दिल्ली से भी अधिक बनी हुई हैं, जिसका मुख्य कारण वहां महंगे आयातित लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) पर निर्भरता और स्थानीय स्तर पर लगने वाले उच्च टैक्स (VAT) हैं।
आखिर अचानक घरेलू ईंधन की कीमतें इस कदर क्यों बढ़ रही हैं? इसका सीधा संबंध वैश्विक भू-राजनीतिक उथल-पुथल से जुड़ा हुआ है। मध्य-पूर्व में जारी भीषण तनाव और विशेष रूप से होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में पैदा हुई रुकावटों ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिलाकर रख दिया है। दुनिया की लगभग पांचवें हिस्से की तेल आपूर्ति इसी संकीर्ण जलमार्ग से होती है। वहां बढ़ते सैन्य टकराव और असुरक्षा के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल और गैस की सप्लाई चेन पूरी तरह बाधित हो गई है, जिसका सीधा और घातक असर भारतीय बाजारों पर दिख रहा है।
CNG के इस 'चौके' का सबसे दर्दनाक असर अब आम यात्रियों पर पड़ने वाला है। दिल्ली-NCR में चलने वाली अधिकांश बसें, टैक्सियाँ, ऑटो-रिक्शा और कमर्शियल गाड़ियाँ पूरी तरह CNG पर ही निर्भर हैं। ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों ने साफ संकेत दिए हैं कि इतनी महंगी गैस के साथ पुराने किरायों पर गाड़ियां चलाना अब उनके बस से बाहर हो चुका है। ऑपरेटरों का तर्क है कि कामकाज जारी रखने के लिए वे जल्द ही किराए में बड़ी बढ़ोतरी करेंगे। इसका सीधा मतलब यह है कि आने वाले दिनों में दफ्तर और स्कूल जाने वाले आम लोगों का सफर न सिर्फ महंगा होने वाला है, बल्कि यह खुदरा महंगाई को भी एक नए चरम पर ले जाएगा।
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