14+ या 18+ सबका अलग रेट: दिल्ली के हनीट्रैप गैंग की खौफनाक रेट लिस्ट

Published : Jan 23, 2026, 03:50 PM IST

INVESTIGATION EXPOSE: दिल्ली में हनीट्रैप अब अपराध नहीं, पूरा सिस्टम बन चुका है। नाबालिग लड़कियां, नकली आधार, वीडियो सबूत और POCSO के नाम पर फर्जी रेप केस। “भगवान भी नहीं बचा सकते”-ऐसे डराकर होती थी करोड़ों की वसूली।

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Delhi Honeytrap Sex Extortion Gang Investigation: दिल्ली में सामने आई इस इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट ने एक डरावनी हकीकत उजागर की है। यहां हनीट्रैप और सेक्सटॉर्शन सिर्फ अपराध नहीं, बल्कि एक संगठित नेटवर्क बन चुका है। इस नेटवर्क में नाबालिग लड़कियों, फर्जी बलात्कार केस, POCSO कानून और नकली आधार कार्ड का इस्तेमाल कर नेताओं, बड़े कारोबारियों और अधिकारियों को निशाना बनाया जाता था। चौंकाने वाली बात यह है कि सब कुछ कॉन्ट्रैक्ट पर होता था-“लड़की पसंद करो, फंसाने का काम हमारा।”

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‘लड़की पसंद कर लो’-ये गैंग आखिर करता क्या था?

जांच में सामने आया कि यह गैंग पहले टारगेट चुनता था। फिर कहा जाता था-लड़की 14+ हो या 18+, हमारे पास सब है। आरोप है कि पैसे लेकर झूठे रेप और POCSO केस दर्ज कराए जाते थे। गैंग का दावा था कि नाबालिग के केस में आदमी सीधे 10 साल तक जेल जा सकता है।

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नाबालिग और POCSO-कानून कैसे बना हथियार?

POCSO कानून बच्चों की सुरक्षा के लिए बना है, लेकिन इस नेटवर्क ने उसी कानून का डर पैदा करने वाला इस्तेमाल किया। आरोप है कि 14+ उम्र बताकर नाबालिग दिखाया जाता, और कहा जाता-अब तो भगवान भी मदद नहीं कर सकते। इस डर के सहारे ब्लैकमेलिंग की जाती थी।

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नकली आधार और वीडियो-सबूत कैसे गढ़े जाते थे?

जांच के अनुसार, गैंग के पास नकली आधार कार्ड तक मौजूद थे। आरोप है कि सेक्स के दौरान वीडियो रिकॉर्डिंग की जाती थी, ताकि बाद में उसे “सबूत” बताया जा सके। इसी आधार पर पुलिस बुलाने और केस दर्ज कराने की धमकी दी जाती थी।

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पहले पैसे, फिर गिरफ्तारी-पूरा खेल कैसे चलता था?

बताया गया कि पहले अग्रिम भुगतान लिया जाता। इसके बाद गिरफ्तारी या केस दर्ज होने की स्थिति बनती। गैंग का दावा था—“पुलिस मैनेजमेंट हम पर छोड़ दें।” यानी पीड़ित को पूरी तरह मानसिक दबाव में रखा जाता था। इस नेटवर्क के निशाने पर वे लोग रहते थे जिनकी सामाजिक प्रतिष्ठा ज्यादा होती है। ऐसे लोग बदनामी के डर से जल्दी समझौता कर लेते हैं-इसी कमजोरी का फायदा उठाया जाता था।

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महिला की गवाही-भरोसे का दुरुपयोग?

भारत की कानूनी व्यवस्था में महिला की शिकायत को गंभीरता से लिया जाता है। इसी भरोसे का गलत इस्तेमाल कर आरोप लगाए गए। जांच एजेंसियां अब यह समझने की कोशिश कर रही हैं कि कानून की मंशा और उसका दुरुपयोग कैसे रोका जाए। यह मामला सिर्फ अपराध नहीं, बल्कि सिस्टम को चुनौती देता है। सवाल यह नहीं कि कानून गलत है, सवाल यह है कि कानून के दुरुपयोग को कैसे रोका जाए। यह इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट चेतावनी है-कि डर, झूठ और ब्लैकमेलिंग के खिलाफ सतर्कता और निष्पक्ष जांच सबसे जरूरी है।

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