Delhi Varanasi Bullet Train: दिल्ली से वाराणसी का सफर अब सिर्फ साढ़े तीन घंटे में तय होगा। रेल मंत्री अश्विनी ने दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर को प्राथमिकता बताते हुए कहा कि अगले 5 साल में यह परियोजना पूरी की जाएगी, जिससे यूपी की तस्वीर बदलेगी।
दिल्ली से वाराणसी अब सिर्फ साढ़े तीन घंटे! बुलेट ट्रेन कॉरिडोर से बदलेगा यूपी का ट्रांसपोर्ट नक्शा
भारत में रेल यात्रियों के लिए एक बड़ी और ऐतिहासिक खुशखबरी सामने आई है। दिल्ली से काशी विश्वनाथ की नगरी वाराणसी तक का सफर, जो अभी 8 घंटे से भी ज्यादा समय लेता है, आने वाले वर्षों में महज साढ़े तीन घंटे में पूरा किया जा सकेगा। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोमवार को एनसीआर मुख्यालय और डीआरएम कार्यालय के साथ वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिल्ली–वाराणसी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर को लेकर सरकार की मंशा साफ कर दी।
रेल मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब सरकार की प्राथमिकता इस रूट पर हाई-स्पीड रेल कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना है। यह परियोजना केवल यात्रा समय घटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे उत्तर प्रदेश के धार्मिक, आर्थिक और औद्योगिक विकास को नई रफ्तार मिलने वाली है।
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मथुरा से अयोध्या तक, आस्था और अर्थव्यवस्था का हाई-स्पीड कॉरिडोर
दिल्ली–वाराणसी बुलेट ट्रेन परियोजना का प्रारंभिक सर्वे वर्ष 2021 में शुरू किया गया था। सर्वे रिपोर्ट के अनुसार यह हाई-स्पीड कॉरिडोर उत्तर प्रदेश के उन शहरों को जोड़ेगा, जो धार्मिक आस्था, पर्यटन और व्यापार तीनों दृष्टियों से बेहद अहम हैं। प्रस्तावित प्रमुख स्टेशनों में मथुरा और आगरा, लखनऊ, अयोध्या, प्रयागराज और अंत में वाराणसी शामिल हैं।
मथुरा और आगरा जहां अंतरराष्ट्रीय पर्यटन और व्यापार के केंद्र हैं, वहीं लखनऊ प्रदेश की प्रशासनिक धुरी है। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ी है, जबकि प्रयागराज संगम और कुम्भ जैसे विशाल आयोजनों के कारण पहले से ही देश-दुनिया के नक्शे पर है। बुलेट ट्रेन इन सभी शहरों को एक हाई-स्पीड नेटवर्क में पिरो देगी।
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DPR तैयार, वाराणसी–सिलीगुड़ी भी सरकार की प्राथमिकता
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इस समय दिल्ली–वाराणसी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के लिए डीटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार की जा रही है। इसके साथ ही सरकार की नजर वाराणसी–सिलीगुड़ी हाई-स्पीड कॉरिडोर पर भी है, जिससे पूर्वी भारत को भी तेज रफ्तार रेल नेटवर्क से जोड़ा जा सके।
रेल मंत्रालय ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को अगले पांच वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य तय किया है। अधिकारियों का मानना है कि इसके पूरा होते ही निवेश, व्यापार और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
इस परियोजना का सबसे बड़ा असर प्रयागराज पर देखने को मिल सकता है। अभी तक प्रयागराज को मुख्य रूप से एक धार्मिक नगरी के रूप में देखा जाता रहा है, लेकिन बुलेट ट्रेन कनेक्टिविटी के बाद यह शहर एक आधुनिक ट्रांसपोर्ट हब के रूप में उभर सकता है।
हर साल संगम पर उमड़ने वाली करोड़ों श्रद्धालुओं की भीड़ के कारण यातायात पर जो दबाव पड़ता है, वह काफी हद तक कम होगा। दिल्ली से एक ही दिन में प्रयागराज और वाराणसी जाकर वापस लौटना संभव होने से आईटी, प्रोफेशनल और सर्विस सेक्टर से जुड़े लोग इन शहरों में बसने के विकल्प पर गंभीरता से विचार कर सकेंगे।
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किसानों को मुआवजा और रोजगार का भरोसा
परियोजना को लेकर जमीन अधिग्रहण की चर्चाओं के बीच रेल मंत्रालय ने यह भी साफ किया है कि विकास की इस प्रक्रिया में स्थानीय किसानों के हितों की अनदेखी नहीं की जाएगी। उन्हें उचित मुआवजा देने के साथ-साथ रोजगार के अवसर भी उपलब्ध कराए जाएंगे।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एनसीआर के जीएम नरेंद्र सिंह पाल, सीपीआरओ शशिकांत त्रिपाठी समेत कई वरिष्ठ रेल अधिकारी मौजूद रहे। रेल मंत्रालय का आकलन है कि बुलेट ट्रेन परियोजना न केवल यात्रा समय को घटाएगी, बल्कि उत्तर प्रदेश की जीडीपी में भी उल्लेखनीय योगदान देगी।
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