ढाका में क्यों गूंजे 'जय श्री राम' के नारे? बांग्लादेशी हिंदूओं का अब तक का सबसे बड़ा प्रदर्शन

Published : Jun 20, 2026, 12:56 PM IST
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सार

क्या ढाका में हिंदू प्रदर्शन बांग्लादेश की राजनीति में नया तूफान खड़ा करेगा? क्या 81 फुट ऊंची भगवान राम की मूर्ति का रुका निर्माण फिर शुरू होगा या विवाद और गहराएगा? क्या अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर उठ रहे सवाल बांग्लादेश सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनेंगे? क्या 72 घंटे के अल्टीमेटम के बाद हिंदू संगठनों का आंदोलन देशव्यापी रूप ले सकता है?

ढाका: मुस्लिम-बहुल पड़ोसी देश बांग्लादेश से इस वक्त की सबसे बड़ी और तनावपूर्ण खबर सामने आ रही है। राजधानी ढाका की सड़कें हजारों हिंदू प्रदर्शनकारियों और जलती हुई मशालों के हुजूम से पट गई हैं। 'जय श्री राम' के गगनभेदी नारों और हाथों में धधकती मशालें लिए अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय ने बांग्लादेश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सनातन धर्म के आराध्य भगवान राम की तस्वीर के कथित घोर अपमान और उनकी एक विशाल मूर्ति के प्रोजेक्ट को जबरन रोके जाने के बाद उपजा यह आक्रोश अब एक बड़े देशव्यापी आंदोलन का रूप ले चुका है।

 

 

80% काम पूरा और फिर…81 फुट ऊंची राम मूर्ति पर मंडराया बुलडोजर का साया!

इस पूरे विवाद की शुरुआत उत्तरी गाइबांधा जिले के पलाशबाड़ी इलाके से हुई। वहां एक भव्य मंदिर परिसर के हिस्से के रूप में भगवान राम की 81 फुट ऊंची ऐतिहासिक मूर्ति का निर्माण किया जा रहा था। इस पूरे प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत लगभग 22 करोड़ बांग्लादेशी टका (करीब 15.6 करोड़ रुपये) है, जिसमें भगवान कृष्ण और शिव की विशाल मूर्तियां भी शामिल हैं। मूर्ति का लगभग 80 प्रतिशत काम पूरा हो चुका था, लेकिन तभी कट्टरपंथी इस्लामी समूहों और एक उपदेशक ने इस मूर्ति को सीधे 'बुलडोजर' से ढहाने की खौफनाक धमकी दे डाली। मंदिर समिति के अध्यक्ष हरिदास चंद्र दास ने रोते हुए बताया कि वे बेहद डरे हुए हैं और इसी खौफ के कारण काम को रोकना पड़ा है।

 

 

तस्वीर पर जूता और शाहबाग चौराहे पर जलती मशालें: 72 घंटे का अल्टीमेटम!

सस्पेंस और गुस्सा तब सातवें आसमान पर पहुंच गया जब यह दावा किया गया कि इस महीने की शुरुआत में एक प्रदर्शन के दौरान कट्टरपंथी इस्लामी भीड़ ने भगवान राम की पवित्र तस्वीर पर जूता रखकर उसका सरेआम अपमान किया। इस अपमान की आग शुक्रवार को ढाका की सड़कों पर दिखाई दी। 'हिंदू महाजोत' और छात्रों के आह्वान पर हजारों लोगों ने मुख्य शाहबाग चौराहे को घेर लिया और नेशनल प्रेस क्लब तक एक विशाल मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री तारिक रहमान की नवनिर्वाचित सरकार को सीधे 72 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि अगर आरोपियों की तुरंत गिरफ्तारी नहीं हुई, तो वे चुप नहीं बैठेंगे।

 

 

'सभी 64 जिलों में बनेगा राम मंदिर'... हिंदुओं का अब तक का सबसे बड़ा पलटवार

अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों के खिलाफ हिंदू संगठनों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। हिंदू महाजोत ने बांग्लादेश सरकार को खुली चेतावनी दी है कि अगर पलाशबाड़ी में भगवान राम की मूर्ति का निर्माण कार्य फिर से शुरू करने की अनुमति नहीं दी गई, तो वे कानूनी लड़ाई से आगे बढ़कर बांग्लादेश के सभी 64 जिलों में एक-एक करके भव्य राम मंदिर का निर्माण करेंगे। रंगपुर इलाके में पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश के बाद पुलिस और हिंदुओं के बीच मामूली झड़पें भी दर्ज की गई हैं, जिससे माहौल और अधिक संवेदनशील हो गया है।

 

 

133 सांप्रदायिक घटनाएं और तारिक रहमान सरकार की अग्निपरीक्षा

बांग्लादेश में हिंदू सबसे बड़ा धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाय हैं, जो कुल आबादी का लगभग 8% हिस्सा हैं। यह खौफनाक मोड़ ऐसे समय में आया है जब हाल ही में देश में मुहम्मद यूनुस के शासनकाल के बाद राजनीतिक बदलाव हुआ है और फरवरी 2046 में तारिक रहमान ने प्रधानमंत्री का पदभार संभाला है। हालांकि, पीएम रहमान ने अपने राष्ट्रीय संबोधन में कहा था कि "देश सभी का है", लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। आंकड़ों के मुताबिक, इस साल 1 जनवरी से 31 मार्च के बीच ही सांप्रदायिक हिंसा की 133 दर्दनाक घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं। धार्मिक मामलों के मंत्रालय को ज्ञापन सौंपे जाने के बाद अब शनिवार को भी विरोध प्रदर्शन जारी रहने की आशंका है। पूरी दुनिया की नजरें अब ढाका पर टिकी हैं कि क्या तारिक रहमान सरकार इस सस्पेंस और भारी तनाव को शांत कर पाएगी या बांग्लादेश एक नए आंतरिक गृहयुद्ध की ओर बढ़ जाएगा।

 

 

मूर्ति निर्माण रोकने पर मंदिर समिति ने क्या कहा?

श्री श्री राधा गोविंद मंदिर समिति के अध्यक्ष हरिदास चंद्र दास ने कहा कि धमकियों के कारण काम रोकना पड़ा। उन्होंने कहा कि समुदाय में डर का माहौल है और सरकार से हस्तक्षेप की अपील की गई है।समिति के सलाहकार श्यामलाल कुमार महंता ने कहा कि निर्माण रोकने का फैसला सामाजिक सद्भाव बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है। समिति का कहना है कि वह किसी विवाद को बढ़ाना नहीं चाहती, लेकिन धार्मिक आस्था से जुड़े इस प्रोजेक्ट को पूरा करने की इच्छा रखती है।

 

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