
ढाका: मुस्लिम-बहुल पड़ोसी देश बांग्लादेश से इस वक्त की सबसे बड़ी और तनावपूर्ण खबर सामने आ रही है। राजधानी ढाका की सड़कें हजारों हिंदू प्रदर्शनकारियों और जलती हुई मशालों के हुजूम से पट गई हैं। 'जय श्री राम' के गगनभेदी नारों और हाथों में धधकती मशालें लिए अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय ने बांग्लादेश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सनातन धर्म के आराध्य भगवान राम की तस्वीर के कथित घोर अपमान और उनकी एक विशाल मूर्ति के प्रोजेक्ट को जबरन रोके जाने के बाद उपजा यह आक्रोश अब एक बड़े देशव्यापी आंदोलन का रूप ले चुका है।
🔥 Hindus in Bangladesh roar against Islamists by chanting "Jay Shri Ram" slogan!
Thousands of Hindus in Bangladesh went into the streets holding torch and chanting "Jay Shri Ram" slogan against recent notoriety of Islamists against the Sanatan Complex in Gaibandha district… pic.twitter.com/VCs02k0c1J— Salah Uddin Shoaib Choudhury (@salah_shoaib) June 19, 2026
इस पूरे विवाद की शुरुआत उत्तरी गाइबांधा जिले के पलाशबाड़ी इलाके से हुई। वहां एक भव्य मंदिर परिसर के हिस्से के रूप में भगवान राम की 81 फुट ऊंची ऐतिहासिक मूर्ति का निर्माण किया जा रहा था। इस पूरे प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत लगभग 22 करोड़ बांग्लादेशी टका (करीब 15.6 करोड़ रुपये) है, जिसमें भगवान कृष्ण और शिव की विशाल मूर्तियां भी शामिल हैं। मूर्ति का लगभग 80 प्रतिशत काम पूरा हो चुका था, लेकिन तभी कट्टरपंथी इस्लामी समूहों और एक उपदेशक ने इस मूर्ति को सीधे 'बुलडोजर' से ढहाने की खौफनाक धमकी दे डाली। मंदिर समिति के अध्यक्ष हरिदास चंद्र दास ने रोते हुए बताया कि वे बेहद डरे हुए हैं और इसी खौफ के कारण काम को रोकना पड़ा है।
BREAKING | Bangladeshi Hindus launch massive torchlight protest in Dhaka over desecration of Bhagwan Shri Ram
Bangladeshi Hindus staged a massive torchlight procession at Dhaka University tonight, demanding justice after Islamists desecrated an image of Bhagwan Shri Ram by… pic.twitter.com/rLao3s318V— Ashwini Shrivastava (@AshwiniSahaya) June 19, 2026
सस्पेंस और गुस्सा तब सातवें आसमान पर पहुंच गया जब यह दावा किया गया कि इस महीने की शुरुआत में एक प्रदर्शन के दौरान कट्टरपंथी इस्लामी भीड़ ने भगवान राम की पवित्र तस्वीर पर जूता रखकर उसका सरेआम अपमान किया। इस अपमान की आग शुक्रवार को ढाका की सड़कों पर दिखाई दी। 'हिंदू महाजोत' और छात्रों के आह्वान पर हजारों लोगों ने मुख्य शाहबाग चौराहे को घेर लिया और नेशनल प्रेस क्लब तक एक विशाल मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री तारिक रहमान की नवनिर्वाचित सरकार को सीधे 72 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि अगर आरोपियों की तुरंत गिरफ्तारी नहीं हुई, तो वे चुप नहीं बैठेंगे।
#Bangladesh
Hindus are protesting in #Dhaka against the insult of Prabhu Sri Ram by Islamists.
A few days ago, in rally, Islamists openly insulted Prabhu Sri Ram by slapping shoes in a photo of Prabhu Sri Ram. pic.twitter.com/DydhnDBS8j— Hindu Voice (@HinduVoice_in) June 19, 2026
अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों के खिलाफ हिंदू संगठनों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। हिंदू महाजोत ने बांग्लादेश सरकार को खुली चेतावनी दी है कि अगर पलाशबाड़ी में भगवान राम की मूर्ति का निर्माण कार्य फिर से शुरू करने की अनुमति नहीं दी गई, तो वे कानूनी लड़ाई से आगे बढ़कर बांग्लादेश के सभी 64 जिलों में एक-एक करके भव्य राम मंदिर का निर्माण करेंगे। रंगपुर इलाके में पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश के बाद पुलिस और हिंदुओं के बीच मामूली झड़पें भी दर्ज की गई हैं, जिससे माहौल और अधिक संवेदनशील हो गया है।
Dhaka | Hindu community in Bangladesh protest against 'the insult of Lord Ram' and held a torchlight procession in Dhaka, demanding the arrest of the culprit
Construction of an idol of Lord Ram at the Sanatan Complex at Polash Bari in Gaibandha was halted after
+1 pic.twitter.com/AQIBpxmczX— Avinash K S🇮🇳 (@AvinashKS14) June 19, 2026
बांग्लादेश में हिंदू सबसे बड़ा धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाय हैं, जो कुल आबादी का लगभग 8% हिस्सा हैं। यह खौफनाक मोड़ ऐसे समय में आया है जब हाल ही में देश में मुहम्मद यूनुस के शासनकाल के बाद राजनीतिक बदलाव हुआ है और फरवरी 2046 में तारिक रहमान ने प्रधानमंत्री का पदभार संभाला है। हालांकि, पीएम रहमान ने अपने राष्ट्रीय संबोधन में कहा था कि "देश सभी का है", लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। आंकड़ों के मुताबिक, इस साल 1 जनवरी से 31 मार्च के बीच ही सांप्रदायिक हिंसा की 133 दर्दनाक घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं। धार्मिक मामलों के मंत्रालय को ज्ञापन सौंपे जाने के बाद अब शनिवार को भी विरोध प्रदर्शन जारी रहने की आशंका है। पूरी दुनिया की नजरें अब ढाका पर टिकी हैं कि क्या तारिक रहमान सरकार इस सस्पेंस और भारी तनाव को शांत कर पाएगी या बांग्लादेश एक नए आंतरिक गृहयुद्ध की ओर बढ़ जाएगा।
HINDU TIGRESS ROARS from Bangladesh! 🔥
“I am a Sanatani. You take taxes from me — don’t I have equal rights? You block roads for namaz with mosques standing empty, yet we must explain installing Shri Ram at home? Bangladesh belongs to us too. Push us further and we’ll build… pic.twitter.com/ylz8aJzpEw— Dr RK Singh (@DrRupak) June 20, 2026
श्री श्री राधा गोविंद मंदिर समिति के अध्यक्ष हरिदास चंद्र दास ने कहा कि धमकियों के कारण काम रोकना पड़ा। उन्होंने कहा कि समुदाय में डर का माहौल है और सरकार से हस्तक्षेप की अपील की गई है।समिति के सलाहकार श्यामलाल कुमार महंता ने कहा कि निर्माण रोकने का फैसला सामाजिक सद्भाव बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है। समिति का कहना है कि वह किसी विवाद को बढ़ाना नहीं चाहती, लेकिन धार्मिक आस्था से जुड़े इस प्रोजेक्ट को पूरा करने की इच्छा रखती है।
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