
France Education Crisis: फ्रांस में स्कूलों की खराब स्थिति, शिक्षकों की कमी और शिक्षा व्यवस्था में संसाधनों की कमी के खिलाफ शुरू हुआ छात्रों का आंदोलन अब देशव्यापी रूप ले चुका है। 6 अक्टूबर को लाखों छात्र, शिक्षक और समर्थक सड़कों पर उतरे। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान ने इस प्रदर्शन को अंतरराष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है। ट्रंप ने आंदोलन को स्कूलों की समस्या के बजाय बड़े पैमाने पर प्रवासन और इस्लाम से जोड़ते हुए दावा किया कि इसके पीछे फ्रांस पर कब्जे की कोशिश है।
प्रदर्शन की शुरुआत 17 सितंबर को पेरिस के क्रेतेइल इलाके से हुई थी। इसके बाद मार्सिले, ल्योन, लिल, स्ट्रासबर्ग और टूर्स समेत कई शहरों में छात्र आंदोलन से जुड़ गए। प्रदर्शनकारियों की मुख्य शिकायतें शिक्षकों की कमी, भीड़भाड़ वाली कक्षाएं, जर्जर स्कूल भवन और शिक्षा व्यवस्था में पर्याप्त संसाधनों का अभाव हैं।
FRANCE: Paris is currently looking like a war zone. Again.
After setting the country on fire, ‘students’ are now fighting the police.
As Trump has said, this isn’t about schools. This is about Islam wanting to take over. It’s a religious war of conquest. https://t.co/G6UXqVWdZf
— Dr. Maalouf (@realMaalouf) October 6, 2026
छात्र बेहतर स्कूल सुविधाओं और पर्याप्त स्टाफ की मांग कर रहे हैं। उनकी शिकायत है कि कई कक्षाओं में जरूरत से ज्यादा छात्र हैं और शिक्षकों की कमी के कारण पढ़ाई प्रभावित हो रही है। स्कूलों में नर्सों और अन्य सहयोगी कर्मचारियों की कमी का मुद्दा भी उठाया जा रहा है। प्रदर्शनकारी शिक्षा व्यवस्था में अधिक निवेश और जर्जर भवनों की मरम्मत की मांग कर रहे हैं।
6 अक्टूबर को प्रदर्शन ने बड़ा रूप ले लिया। फ्रांस के गृह मंत्रालय के मुताबिक, देशभर में करीब 2.56 लाख लोग प्रदर्शन में शामिल हुए, जिनमें लगभग 56 हजार लोग पेरिस में थे। वहीं, प्रदर्शन के आयोजकों ने देशभर में संख्या करीब 4.5 लाख बताई।
अधिकांश प्रदर्शन शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर हुए, लेकिन कुछ जगहों पर स्थिति हिंसक भी हुई। अधिकारियों के मुताबिक कई स्कूलों में तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं सामने आईं। मंगलवार को करीब 500 लोगों को गिरफ्तार किए जाने की रिपोर्ट है। सरकार ने हिंसा की निंदा करते हुए शिक्षा से जुड़ी शिकायतों पर बातचीत की जरूरत भी स्वीकार की है।
प्रदर्शनों के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने Truth Social पर पोस्ट कर दावा किया कि फ्रांस में हो रहा आंदोलन स्कूलों से जुड़ा नहीं है, बल्कि बड़े पैमाने पर प्रवासन और इस्लाम से संबंधित है। हालांकि, उनके पोस्ट में इस दावे के समर्थन में कोई सबूत पेश नहीं किया गया। छात्रों की सार्वजनिक रूप से बताई गई मांगों का केंद्र शिक्षा व्यवस्था, स्कूलों की हालत और स्टाफ की कमी है।
लगातार बढ़ते प्रदर्शन के बीच फ्रांस की सरकार पर छात्रों की मांगों पर कार्रवाई करने का दबाव बढ़ गया है। प्रधानमंत्री सेबास्टियन लेकोर्नू ने शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं पर समाधान की जरूरत बताई है। आंदोलन के आगे भी जारी रहने की संभावना के बीच सरकार के सामने स्कूलों की स्थिति सुधारने और प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा पर नियंत्रण रखने की दोहरी चुनौती है।
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