
नई दिल्ली: रूस से तेल खरीदने पर भारत को फिलहाल कोई एक्स्ट्रा ड्यूटी नहीं देनी होगी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत समेत कई देशों को छूट देने वाले आदेश पर साइन कर दिए हैं। ट्रंप ने यह कदम अमेरिका और रूस के बीच बनी आपसी सहमति के बाद उठाया है। रूस ने ट्रंप के इस फैसले को ऐतिहासिक बताया है।
अमेरिकी संसद (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) ने ट्रंप को यह पावर दी थी कि वो रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर एक्स्ट्रा टैरिफ लगा सकें। लिंडसे ग्राहम के लाए गए बिल के पास होने के एक महीने बाद ट्रंप को यह ड्यूटी लगाने का अधिकार मिला था। कल इस कानून को लागू हुए एक महीना पूरा होने वाला था, लेकिन उससे ठीक पहले अमेरिका ने यह बड़ी छूट दे दी।
अब भारत बिना किसी रोक-टोक के रूस से तेल खरीदना जारी रख सकता है। अमेरिका और रूस के बीच हाल ही में जो बातचीत हुई, उसी के आधार पर इस कानून में ढील दी गई है। दोनों देशों ने एनर्जी सेक्टर में मिलकर काम करने का फैसला किया है। फिलहाल भारत, रूस से सबसे ज्यादा कच्चा तेल (क्रूड ऑयल) खरीदता है। भारत की इस खरीदारी से इंटरनेशनल मार्केट में तेल की कीमतें कंट्रोल में रहती हैं। इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए ही अमेरिका ने यह छूट दी है।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो 20 तारीख को भारत आने वाले हैं। उनके दौरे से ठीक पहले अमेरिका ने यह फैसला लिया है। केंद्र सरकार ने पहले ही चेतावनी दी थी कि अगर कोई एक्स्ट्रा ड्यूटी लगाई गई, तो इसका असर दोनों देशों के रिश्तों पर पड़ेगा।
रूसी राष्ट्रपति के दूत किरिल दिमित्रीव ने अमेरिका के इस फैसले को ऐतिहासिक करार दिया है। महंगाई बढ़ने के डर के बीच, रूस से क्रूड ऑयल का इंपोर्ट जारी रहने से केंद्र सरकार को बड़ी राहत मिली है।
वाशिंगटन में यूक्रेन के बड़े समर्थकों में गिने जाने वाले सीनेटर लिंडसे ग्राहम के नाम पर बने 'लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026' पर ट्रंप ने पहले साइन किए थे। इसी साल जुलाई में कीव के दौरे से लौटने के तुरंत बाद लिंडसे ग्राहम का निधन हो गया था।
इस कानून के तहत ट्रंप को 30 दिन का समय मिला था। इसमें रूस से सबसे ज्यादा क्रूड ऑयल खरीदने वाले पांच देशों- चीन, भारत, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान के सभी प्रोडक्ट्स पर 100% टैरिफ लगाने का प्रावधान था। साथ ही, कई रूसी कंपनियों पर बैन लगाने और अमेरिका में रूसी एनर्जी प्रोडक्ट्स के इंपोर्ट पर 500% टैरिफ लगाने की बात भी थी। यह 30 दिन की डेडलाइन कल यानी 18 अक्टूबर को खत्म होने वाली थी।
इस कानून का असल मकसद उन देशों के फाइनेंशियल सोर्स को काटना था, जो यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में रूस की मदद कर रहे हैं। इसके मुख्य निशाने पर रूसी अधिकारी, बैंक, एनर्जी सेक्टर और मॉस्को के सैन्य अभियानों का सपोर्ट करने वाली विदेशी कंपनियां थीं।
रूसी तेल और गैस पर निर्भरता कम करने के लिए, इस कानून ने ट्रंप को रूस के साथ व्यापार करने वाले देशों पर टैरिफ लगाने की पावर दी थी। इसके अलावा, इसमें रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और रूसी सरकार के बड़े अधिकारियों पर बैन लगाने की बात भी शामिल थी। इसी के आधार पर पहले भारत के खिलाफ टैरिफ लगाने की तैयारी की गई थी।
Asianet News Hindi पर पढ़ें देशभर की सबसे ताज़ा National News in Hindi, जो हम खास तौर पर आपके लिए चुनकर लाते हैं। दुनिया की हलचल, अंतरराष्ट्रीय घटनाएं और बड़े अपडेट — सब कुछ साफ, संक्षिप्त और भरोसेमंद रूप में पाएं हमारी World News in Hindi कवरेज में। अपने राज्य से जुड़ी खबरें, प्रशासनिक फैसले और स्थानीय बदलाव जानने के लिए देखें State News in Hindi, बिल्कुल आपके आसपास की भाषा में। उत्तर प्रदेश से राजनीति से लेकर जिलों के जमीनी मुद्दों तक — हर ज़रूरी जानकारी मिलती है यहां, हमारे UP News सेक्शन में। और Bihar News में पाएं बिहार की असली आवाज — गांव-कस्बों से लेकर पटना तक की ताज़ा रिपोर्ट, कहानी और अपडेट के साथ, सिर्फ Asianet News Hindi पर।