टैरिफ पर ट्रंप की जिद! 24 घंटे में ही ग्लोबल टैरिफ 10 से 15 परसेंट बढ़ाया, अब आगे क्या होगा?

Published : Feb 22, 2026, 06:40 AM IST

Donald Trump Tariff Hike: डोनाल्ड ट्रंप ने ग्लोबल टैरिफ 24 घंटे में ही 10% से बढ़ाकर 15% कर दिया है। यह फैसला तब आया, जब एक दिन पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने उनकी टैरिफ पॉलिसी को रद्द कर दिया था। ऐसे में सवाल है, क्या नया टैरिफ कानूनी रूप से टिक पाएगा? 

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सुप्रीम कोर्ट के झटके के बाद ट्रंप का नया दांव

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के फैसले में कहा कि ट्रंप ने IEEPA (International Emergency Economic Powers Act) के तहत अपने अधिकारों से आगे बढ़कर टैरिफ लगाए थे। कोर्ट का मानना था कि यह कानून राष्ट्रपति को इतने बड़े टैरिफ पावर नहीं देता। फैसले के तुरंत बाद ट्रंप ने नया रास्ता अपनाया और ट्रेड एक्ट ऑफ 1974 (Trade Act of 1974) की सेक्शन 122 के तहत 15% तक टैरिफ लगाने का अधिकार इस्तेमाल किया। यह प्रावधान राष्ट्रपति को 150 दिनों तक मैक्सिमम 15% टैरिफ लगाने की अनुमति देता है, लेकिन इसके बाद बढ़ाने के लिए कांग्रेस की मंजूरी जरूरी होगी।

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हम और भी कड़े कदम उठा सकते हैं- ट्रंप

ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल (Truth Social) पर पोस्ट करते हुए कहा कि कई देश दशकों से अमेरिका का फायदा उठा रहे थे और अब 15% का फुल वैलिड टैरिफ तुरंत लागू किया जा रहा है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने IEEPA के तहत टैरिफ पर रोक लगाई है, लेकिन अन्य कानूनी विकल्प अभी भी खुले हैं। उन्होंने संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर वे और भी कठोर आर्थिक कदम उठा सकते हैं।

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सेक्शन 122 क्या है और कितने दिन चलेगा ट्रंप का नया टैरिफ?

सेक्शन 122 का मकसद अमेरिका के बैलेंस ऑफ पेमेंट्स घाटे को कंट्रोल करना है, यानी जब आयात, निर्यात से काफी ज्यादा हो जाएं। लेकिन इसमें साफ लिमिट्स भी तय है। इसके अनुसार, मैक्सिमम 15% टैरिफ और मैक्सिमम 150 दिन तक चल सकते हैं, लेकिन इसे आगे बढ़ाने के लिए कांग्रेस की मंजूरी जरूरी होगी। इसका मतलब यह फैसला पूरी तरह स्थायी नहीं है, लेकिन 5 महीने तक ग्लोबल बाजार में बड़ा असर डाल सकता है। इस टैरिफ के बढ़ने से अमेरिकी शेयर बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है, डॉलर मजबूत हो सकता है, उभरते बाजारों जैसे भारत में कैपिटल फ्लो प्रभावित हो सकता है।

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भारत और दुनिया पर क्या असर पड़ेगा?

  • अगर 15% टैरिफ लंबे समय तक लागू रहा तो इसके संभावित प्रभाव भी हो सकते हैं, जिसमें पहला आयातित सामान जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटो पार्ट्स, मशीनरी जैसी चीजें महंगी हो सकती हैं।
  • ग्लोबल सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ सकता है और कंपनियां प्रोडक्शन शिफ्ट करने पर मजबूर हो सकती हैं।
  • ट्रेड वॉर की आशंका होगी और बाकी देश जवाबी टैरिफ लगा सकते हैं।
  • भारतीय निर्यातकों पर असर पड़ेगा। टेक्सटाइल, फार्मा और आईटी हार्डवेयर सेक्टर प्रभावित हो सकते हैं।
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सेक्शन 301 की जांच भी शुरू

ट्रंप प्रशासन ने 'अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिसेस' के खिलाफ सेक्शन 301 के तहत नई जांच शुरू करने की भी घोषणा की है। यह वही प्रावधान है जिसके तहत पहले चीन पर भारी टैरिफ लगाए गए थे। अगर ये जांचें तेज हुईं, तो आने वाले महीनों में और सख्त टैरिफ देखने को मिल सकते हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि सेक्शन 122 के तहत लिया गया फैसला भी कोर्ट में चुनौती झेल सकता है। अगर ऐसा हुआ तो मामला फिर से न्यायिक समीक्षा के दायरे में आ सकता है।

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