
अमेरिकी राष्ट्रपति की सुरक्षा व्यवस्था की दुनिया भर में मिसाल दी जाती है, खासकर उनकी यात्राओं की। लेकिन इस बार राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप का एक सफर एक ऐसे विवाद की वजह बन गया, जिसकी किसी ने उम्मीद नहीं की थी। राष्ट्रपति ट्रंप अंकारा से एयरफोर्स वन में सवार तो हुए, लेकिन उन्होंने अपना सफर उस विमान में पूरा नहीं किया। मीडिया समेत सबको यही लगा कि ट्रंप विमान में ही हैं, लेकिन यह गलतफहमी थी। बाद में तस्वीरें सामने आईं। वैसे तो इस तरह के बदलाव आम हैं, जिन्हें अमेरिकी खुफिया एजेंसियां 'शेल गेम्स' कहती हैं। पर इस बार तस्वीरों के साथ इतनी जल्दी जानकारी का लीक होना सामान्य बात नहीं है।
तुर्की के अंकारा में नाटो शिखर सम्मेलन के बाद राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप को ब्रिटेन जाना था। ट्रंप कतर से तोहफे में मिले एयरफोर्स वन से अंकारा पहुंचे थे। लेकिन वापसी की यात्रा पुराने एयरफोर्स वन में होगी, यह जानकारी ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट के जरिए दी गई। पोस्ट में लिखा था, "पुरानी यादों के लिए।" ट्रंप कैमरों के सामने विमान में चढ़े, लेकिन अंदर जाने के बाद दूसरे दरवाजे से बाहर निकल गए। वहां से वह एक केटरिंग ट्रक में बैठकर एक छोटे विमान, एयरफोर्स C-32A, में चले गए। एयरफोर्स वन में मौजूद पत्रकारों को इसकी भनक तक नहीं लगी। वे इसी सोच के साथ यात्रा करते रहे कि राष्ट्रपति उनके साथ ही विमान में हैं।
यात्रियों को विमान की खिड़कियां बंद रखने का निर्देश दिया गया था। जब एक व्यक्ति ने खिड़की खोलने की कोशिश की, तो उसे तुरंत बंद करने को कहा गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इससे कुछ लोगों को शक हुआ। खैर, दोनों विमान एक साथ ही उड़े। इंग्लैंड में उतरने के बाद, यह घोषणा की गई कि राष्ट्रपति के विमान से उतरने की फुटेज के लिए एक विशेष कैमरा लगाने में समय लगेगा। करीब 20 मिनट बाद राष्ट्रपति विमान से उतरे। इतने समय की देरी ने शक को और गहरा दिया। ब्रिटेन से अमेरिका की यात्रा कतर से मिले नए एयरफोर्स वन में ही हुई। ट्रंप ने पत्रकारों से ईरान के खतरे के बारे में बात की, लेकिन उस दिन विमान बदलने को लेकर कुछ भी कहने को तैयार नहीं हुए।
अब ईरान यह कहकर मजाक उड़ा रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डर के मारे केटरिंग ट्रक के जरिए छिपकर भागे। लेकिन खुफिया एजेंसियां किसी भी खतरे के संकेत को नजरअंदाज नहीं कर सकतीं। यह उनकी जिम्मेदारी है। मीडिया के लिए यह एक बड़ी खबर बन गई। राष्ट्रपति के विमान में चढ़ने और फिर केटरिंग ट्रक के जरिए दूसरे विमान तक जाने की तस्वीरें भी छपीं।
व्हाइट हाउस का दावा है कि कतर से मिला विमान पूरी तरह से तैयार है, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसमें सुरक्षा व्यवस्था उतनी मजबूत नहीं है। न्यूयॉर्क टाइम्स ने पहले भी इस पर रिपोर्ट की थी। इस मामले में रिपोर्टरों को समन भेजकर और शपथ दिलाकर उनके बयान भी लिए गए थे। हालांकि, सफाई में कहा गया कि जांच अवैध रूप से जानकारी लीक होने पर हो रही है। न्यूयॉर्क टाइम्स ने रिपोर्ट किया था कि सीक्रेट सर्विस के निर्देश पर ही राष्ट्रपति ने विमान बदला था। सरकार का तर्क है कि कतर वाले विमान में सुरक्षा, संचार और अन्य तकनीकी सिस्टम लगाने पर 400 मिलियन डॉलर खर्च किए गए हैं। ट्रंप की पसंद के अनुसार इसे नीले, सुनहरे और लाल रंग से रंगा गया है। ईरान के साथ बातचीत के बावजूद हमले जारी हैं, जो खतरे का संकेत है। लेकिन इस बारे में कांग्रेस की आठ सदस्यीय खुफिया निगरानी समिति को कोई जानकारी नहीं दी गई थी।
President Trump was secretly moved off Air Force One in Turkey last month after the NATO summit with the help of an airport catering truck. When asked why, Trump said the Secret Service directed him to switch to another plane.
“They wanted me to go on a different flight, a… pic.twitter.com/dxrZReipFu— CBS News (@CBSNews) August 12, 2026
अगले दिन राष्ट्रपति ने विमान बदलने की बात स्वीकार की। उन्होंने कहा, "सीक्रेट सर्विस जो कहती है, वो करना पड़ता है। उन्होंने ही ऐसा करने को कहा था।" अधिकारियों ने भी माना कि ईरान से मिसाइल हमले की खुफिया जानकारी मिली थी। इस घटना ने अमेरिका में एक राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है, जिसका सीधा संबंध ट्रंप की ईरान नीति से है। लोगों का मानना है कि राष्ट्रपति ने खुद ईरान से पंगा लिया और अब देश और दुनिया को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। होरमुज जलडमरूमध्य, जो एक अंतरराष्ट्रीय शिपिंग रूट था, अब ईरान के नियंत्रण में है और ईरानी ड्रोन खाड़ी देशों को निशाना बना रहे हैं।
ईरान के लिए यह घटना एक बड़ी जीत की तरह है। वह प्रचार कर रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति उनके डर से विमान बदलने पर मजबूर हो गए। इससे ईरान सरकार की छवि मजबूत होगी, जबकि ट्रंप की 'ताकतवर नेता' की छवि को नुकसान पहुंचेगा। ट्रंप के पूर्व अधिकारी कह रहे हैं कि राष्ट्रपति को यह सब पसंद नहीं आ रहा है। विवाद सिर्फ विमान बदलने पर ही नहीं, बल्कि कतर से मिले विमान पर भी है। कहा जा रहा है कि करोड़ों डॉलर खर्च करने के बावजूद इसमें राष्ट्रपति के लिए जरूरी सुरक्षा नहीं है।
ट्रंप के विमान बदलने के बावजूद विदेश मंत्री मार्को रूबियो और ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट उसी विमान में बने रहे। डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ स्टीफन मिलर और स्टीफन चुंग ने भी पुराने विमान में ही सफर किया। ट्रंप जिस विमान में गए, उसमें उनके साथ सिर्फ रक्षा सचिव पीट हेगसेथ थे। यह साफ नहीं है कि इन लोगों को विमान बदलने की जानकारी थी या नहीं। हालांकि, पत्रकारों को तो बिल्कुल नहीं पता था।
सुरक्षा के लिए इस तरह की तरकीबें अपनाना आम बात है। सीक्रेट सर्विस इसे 'शेल गेम्स' कहती है। राष्ट्रपति के काफिले में 'द बीस्ट' नाम की एक जैसी कई लिमोजिन कारें होती हैं। तीन हेलीकॉप्टर एक साथ उड़ते हैं ताकि पता न चले कि राष्ट्रपति किसमें हैं। आमतौर पर विमान बदलने पर पत्रकारों को इस शर्त पर बता दिया जाता है कि वे इसे रिपोर्ट नहीं करेंगे। बिल क्लिंटन 2000 में भारत से पाकिस्तान इसी तरह गए थे। 2003 में जॉर्ज बुश भी बिना किसी निशान वाले विमान से इराक पहुंचे थे। 2023 में जो बाइडेन भी सिर्फ दो पत्रकारों के साथ यूक्रेन गए थे।
इस बार किसी को बताए बिना यह कदम इसलिए उठाया गया क्योंकि खतरा बहुत गंभीर था। फिर भी यह जानकारी लीक कैसे हुई, इसकी जांच चल रही है। उपराष्ट्रपति की टीम के एक सुरक्षा अधिकारी को सस्पेंड कर दिया गया है। बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सुरक्षा टीम के कुछ सदस्य वेंस परिवार की यात्राओं से नाखुश थे, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हुई है।
सीक्रेट सर्विस के डायरेक्टर शॉन करन ने पुष्टि की है कि सुरक्षा चिंताएं बहुत बढ़ गई हैं। उन्होंने अपने 24 साल के करियर में इसे सबसे खतरनाक दौर बताया है। जनवरी से अब तक 10,000 से ज्यादा सुरक्षा खतरों की जांच हुई है, जिनमें से ज्यादातर ऑनलाइन थे। इस बार का अलर्ट इजरायल ने दिया था, लेकिन सीआईए को यह उतना गंभीर नहीं लगा। फिर भी, इसे नजरअंदाज न करने का फैसला किया गया।
इस पूरी घटना पर ईरान जमकर मजे ले रहा है। सोशल मीडिया पर मीम्स की बाढ़ आ गई है, जिनमें ट्रंप को ताबूत में और कूड़ेदान में दिखाया जा रहा है। 2024 में, अमेरिका ने एक ईरानी नागरिक पर तत्कालीन उम्मीदवार ट्रंप की हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया था, जिसे ईरान ने खारिज कर दिया था। लेकिन अब हालात बदल गए हैं।
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