Telegram Ban In India : टेलीग्राम पर रोक... लेकिन कांग्रेस ने पूछ लिया सबसे बड़ा सवाल? क्या सिर्फ टेलीग्राम को निशाना बनाया जा रहा? टेलीग्राम बैन के पीछे क्या है पूरा खेल? NEET से टेलीग्राम तक... आखिर किस पर फूटा कांग्रेस का गुस्सा?
नई दिल्ली: 21 जून 2026 को मेडिकल की सबसे बड़ी परीक्षा कहे जाने वाले NEET UG री-एग्जाम होना है। लेकिन एग्जाम से ठीक पहले भारत सरकार ने डिजिटल स्ट्राइक करते हुए टेलीग्राम को कुछ समय तक के लिए बैन कर दिया है। बता दे कि यह फैसला नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की सिफारिश पर केंद्र सरकार ने लिया है। लेकिन कांग्रेस ने सरकार के इस एक्शन को गलत बताते हुए पेपर लीक में नाकामी बताया है। साथ ही कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
टेलीग्राम को लेकर केंद्र सरकार पर उठे सवाल
कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने मंगलवार को केंद्र सरकार के उस कदम की आलोचना की है, जिसमें टेलीग्राम प्लेटफॉर्म पर एक तय समय के लिए पाबंदी लगाई गई है। उन्होंने इसे 'सरकार की पूरी नाकामी' बताया और कहा कि सिर्फ एक प्लेटफॉर्म को बैन करने से बड़ी समस्या का हल नहीं निकलेगा।
दीक्षित ने कहा कि टेलीग्राम भी वॉट्सऐप और दूसरे कम्युनिकेशन ऐप्स की तरह ही एक एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर सिर्फ टेलीग्राम को ही क्यों निशाना बनाया जा रहा है।
सिर्फ टेलीग्राम ही बैन क्यों?
NEET के मामले में यह सरकार की पूरी तरह से विफलता है। टेलीग्राम भी वॉट्सऐप और दूसरे प्लेटफॉर्म्स की तरह एक एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग चैनल है। अगर सरकार को लगता है कि ऐसे प्लेटफॉर्म जिम्मेदार हैं, तो सिर्फ टेलीग्राम को ही क्यों अलग किया जा रहा है? ऐसे कई तरीके हैं जिनसे लोग अपनी पहचान छिपा सकते हैं या गुमनाम रहकर बात कर सकते हैं। टेलीग्राम पर बैन लगाने से सिर्फ उन लोगों को दिक्कत होगी जो इसे आम बातचीत के लिए इस्तेमाल करते हैं।"
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि गलत सूचनाएं तो कई प्लेटफॉर्म्स पर फैलती हैं। उन्होंने तर्क दिया कि सरकार का ध्यान किसी एक मैसेजिंग सर्विस पर पाबंदी लगाने के बजाय परीक्षा में हो रही धांधली की असली वजहों को दूर करने पर होना चाहिए।
NTA ने बताई इसकी बड़ी वजह?
यह पाबंदी प्लेटफॉर्म के उस खास फीचर को देखते हुए लगाई गई है, जिसका इस्तेमाल राष्ट्रीय परीक्षाओं के बाद 'पेपर लीक' के झूठे सबूत गढ़ने के लिए किया जाता रहा है।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने NTA और उच्च शिक्षा विभाग की सिफारिशों के बाद ये सधे हुए निर्देश जारी किए हैं, ताकि संगठित नकल कराने वाले गिरोहों पर लगाम लगाई जा सके।
NTA के मुताबिक, प्लेटफॉर्म पर यह पाबंदी सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69A के तहत लगाई गई है। इस अस्थायी रोक के साथ-साथ, MeitY ने टेलीग्राम को निर्देश दिया है कि वह भारत में पहले से पोस्ट किए गए मैसेज के लिए अपने मैसेज-एडिटिंग फीचर को भी डिसेबल कर दे। यह नियम 30 जून 2026 तक लागू रहेगा।
NTA ने बताया कि नकल कराने वाले नेटवर्क 21 जून 2026 को होने वाली दोबारा परीक्षा में शामिल होने वाले उम्मीदवारों को धोखा देने के लिए इन प्लेटफॉर्म फीचर्स का सक्रिय रूप से इस्तेमाल कर रहे थे।
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