
Everest Sherpa Rescue: दुनिया की सबसे ऊंची और खतरनाक चोटी माउंट एवरेस्ट, जिसे कई पर्वतारोही 'मौत की घाटी' भी कहते हैं, वहां एक ऐसा चमत्कार हुआ है जिसने विज्ञान, डॉक्टरों और खुद एवरेस्ट के इतिहास को हैरान कर दिया है। शून्य से कई डिग्री नीचे का तापमान, न खाने का एक दाना, न पानी की एक बूंद और सबसे खतरनाक-बिना अतिरिक्त ऑक्सीजन के पूरे 6 दिन! जब उम्मीद की आखिरी किरण भी दम तोड़ चुकी थी और परिवार ने नम आंखों से अंतिम संस्कार की रस्में शुरू कर दी थीं, तभी बर्फ के उस सफेद कफन को चीरकर एक शख्स ज़िंदा वापस लौट आया।
इस रोंगटे खड़े कर देने वाले सस्पेंस की शुरुआत तब हुई जब 52 वर्षीय अनुभवी नेपाली शेरपा गाइड, दावा शेरपा, एक पोलिश पर्वतारोही को लेकर 29,032 फीट ऊंचे एवरेस्ट फतह के मिशन पर निकले थे। चोटी के बेहद करीब पहुंचने के बाद भी मौसम और हालातों के कारण वे इस मिशन में नाकाम रहे और वापस लौटने लगे। लेकिन कैंप III और कैंप IV के बीच अचानक कुछ ऐसा हुआ जिसने इस पूरी कहानी को एक खौफनाक मोड़ दे दिया। दोनों के बीच क्या हुआ, यह आज भी एक गहरा राज है, लेकिन पोलिश पर्वतारोही तो सुरक्षित बेस कैंप लौट आया, पर दावा शेरपा कभी वहां नहीं पहुंचे। उन्हें आखिरी बार 29 मई को देखा गया था, जिसके बाद वे बर्फीले तूफानों के बीच कहीं पूरी तरह विलीन हो गए।
Dawa Sherpa shortly after being found alive this morning on Everest, 04.06.2026 NPT. Video ©: Mingmar Sherpa. pic.twitter.com/MHSlz0kEEb
— Everest Today (@EverestToday) June 4, 2026
दिन बीतते गए और एवरेस्ट पर चढ़ाई का सीज़न भी खत्म होने लगा था। अधिकारियों ने पहाड़ पर से मौसम के अनुसार लगाई गई रस्सियों, सीढ़ियों और रास्तों को हटाना शुरू कर दिया था। भारी बर्फबारी और ऑक्सीजन की भयंकर कमी के बीच शुरुआती तलाशी अभियान में जब दावा का कोई सुराग नहीं मिला, तो प्रशासन और परिवार ने मान लिया कि दावा अब इस दुनिया में नहीं रहे। हताशा और गहरे दुख में डूबे उनके परिवार ने भारी मन से दावा शेरपा की मौत को स्वीकार कर लिया और उनके लिए पारंपरिक अंतिम संस्कार की रस्में भी शुरू कर दीं। घर में शोक का माहौल था, हर आंख नम थी और किसी को भी अंदाजा नहीं था कि नियति ने पर्दे के पीछे कोई और ही कहानी लिख रखी है।
Nepal: Everest Guide Found Alive After Week Missing
A Sherpa guide, missing for a full week on Mount Everest, has been found alive. He was discovered crawling back towards base camp, a significant development after he was presumed lost. pic.twitter.com/ZtnykRHmjS— InfactoWeaver (@InfactoWeaver) June 4, 2026
तभी आया वो पल, जिसने इस पूरी त्रासदी को एक ऐतिहासिक चमत्कार में बदल दिया। चढ़ाई का सीज़न खत्म होने के बाद एवरेस्ट की निचली ढलानों पर कचरा साफ करने और छोड़ी गई रस्सियों को हटाने का काम कर रही एक क्लीनिंग टीम खुम्बु आइसफॉल्स के खतरनाक रास्तों से गुजर रही थी। तभी अचानक सफेद बर्फ के अंतहीन समंदर के बीच टीम के सदस्यों को एक अकेला साया रेंगता हुआ दिखाई दिया। खतरनाक दरारों और जमा देने वाली ठंड के बीच वह साया कोई और नहीं, बल्कि अपनी क्लाइंबिंग जैकेट में लिपटे हुए दावा शेरपा थे! दावा ने जहां आखिरी बार अपनी टीम का साथ खोया था और जहां वे मिले, उसके बीच की दूरी को देखकर रेस्क्यू टीम भी कांप उठी, इसका मतलब था कि बिना किसी सहारे के दावा ने पहाड़ का एक बहुत बड़ा और जानलेवा हिस्सा अकेले ही पार किया था।
दावा शेरपा की हालत बेहद नाजुक थी। वे अत्यधिक फ्रॉस्टबाइट (ठंड से त्वचा का गलना) से पीड़ित थे, उनका शरीर बुरी तरह थक चुका था और वे मुश्किल से हिल-डुल पा रहे थे। उन्हें तुरंत पहाड़ से नीचे लाया गया और एयरलिफ्ट करके इलाज के लिए काठमांडू के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। जब उनकी बेटी मेंडो ल्हामु शेरपा को यह खबर मिली, तो उन्हें अपनी कानों पर यकीन नहीं हुआ। पहले तो रिश्तेदारों ने इस खबर को एक अफवाह समझा और पक्का करने के लिए डॉक्टरों से दावा की तस्वीरें मांगीं। तस्वीरें देखते ही घर में रोने की जगह चीखें खुशी में बदल गईं। मेंडो ने रॉयटर्स से बात करते हुए भावुक होकर कहा, "उन्होंने मुझे पहचान लिया, वे बात भी कर रहे हैं। हम बहुत खुश हैं।"
विशेषज्ञों के अनुसार एवरेस्ट के उस क्षेत्र में कुछ घंटों तक जीवित रहना भी चुनौतीपूर्ण माना जाता है। ऐसे में लगभग एक सप्ताह तक अत्यधिक ठंड, कम ऑक्सीजन और खतरनाक बर्फीले रास्तों के बीच जीवित रहना किसी चमत्कार से कम नहीं है। नेपाल की माउंट एवरेस्ट हाइकिंग कंपनी ने भी इस घटना को "अविश्वसनीय चमत्कार" बताया है। कंपनी के अनुसार दावा ने अकेले ही खतरनाक मार्ग पार किया, जबकि सीज़न के लिए लगाई गई कई सीढ़ियां और रस्सियां पहले ही हटाई जा चुकी थीं।
इस वर्ष एवरेस्ट पर 1,000 से अधिक पर्वतारोही और गाइड सफलतापूर्वक शिखर तक पहुंचे, लेकिन पांच लोगों की जान भी गई। ऐसे कठिन मौसम और जोखिमों के बीच दावा शेरपा का जीवित लौटना संभवतः हाल के वर्षों की सबसे अविश्वसनीय पर्वतारोहण कहानियों में से एक बन गया है। एक ऐसा चमत्कार जिसने साबित कर दिया कि कभी-कभी इंसानी इच्छाशक्ति दुनिया की सबसे कठिन परिस्थितियों को भी चुनौती दे सकती है। नेपाल की माउंट एवरेस्ट हाइकिंग कंपनी ने सोशल मीडिया पर इस चमत्कार को सलाम करते हुए लिखा कि बिना खाना, पानी या ऑक्सीजन के, उस वक्त जब सीज़न की सीढ़ियां भी हटा दी गई थीं, दावा का इस जानलेवा खुम्बु आइसफॉल को अकेले पार करना किसी दैवीय चमत्कार से कम नहीं है।
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