
भारत के कॉर्पोरेट सेक्टर में 'वर्क-लाइफ बैलेंस' न होना एक आम शिकायत है। लोग अक्सर कहते हैं कि नौकरी की वजह से परिवार, दोस्तों या खुद के लिए भी वक्त नहीं मिल पाता। ऐसी ही एक कहानी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट पर वायरल हो रही है। एक शख्स ने पोस्ट लिखकर अपना दुख बांटा है कि सुबह 11 से रात 11 बजे तक की नौकरी के चलते वह अपने एक साल के बेटे को बड़ा होते हुए भी नहीं देख पा रहा है। पोस्ट में लिखा है कि काम खत्म करके घर पहुंचने के बाद भी 'अर्जेंट' कॉल्स के चक्कर में वह अपने बेटे पर ध्यान नहीं दे पाता।
शख्स ने लिखा, 'जब मैं घर पहुंचता हूं तो मेरा बेटा खुशी-खुशी मेरे पास आता है। वह चाहता है कि मैं उसे गोद में उठाऊं और उसके साथ खेलूं। लेकिन मीटिंग्स की वजह से मुझे उसे नजरअंदाज करना पड़ता है। उस वक्त उसके चेहरे पर जो भाव आते हैं, वो मेरा दिल तोड़ देते हैं।' पोस्ट से साफ है कि यह पिता अपने बेटे के बचपन के वो कीमती पल खोना नहीं चाहता, जो एक बार चले गए तो कभी वापस नहीं आएंगे।
इस हालात से निकलने के लिए अब यह शख्स अपनी नौकरी छोड़ने के बारे में गंभीरता से सोच रहा है। उसके मन में क्रिकेट से जुड़ा एक कार्ड गेम डेवलप करने का आइडिया है। उसे उम्मीद है कि भले ही यह आइडिया सफल न हो, लेकिन इससे उसकी जिंदगी में एक बदलाव जरूर आएगा। हालांकि, उसे यह भी शक है कि क्या बेटे के साथ वक्त बिताने के लिए एक स्थिर नौकरी छोड़कर किसी अनिश्चित काम में हाथ डालना सही होगा? पोस्ट वायरल होने के बाद कई लोगों ने अपनी राय दी। कुछ लोगों ने कहा कि परिवार को प्राथमिकता देनी चाहिए। वहीं, कुछ ने चेतावनी दी कि एक स्टार्टअप शुरू करने में मौजूदा नौकरी से भी ज्यादा समय लग सकता है। कई लोगों ने यह भी सलाह दी कि एक स्थिर नौकरी छोड़ने का फैसला बहुत सोच-समझकर लेना चाहिए।
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