
PM Modi Independence Day 2026: 80वें स्वतंत्रता दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर दिल्ली के लाल किले से देश को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के आर्थिक सफर का लेखा-जोखा पेश किया। कांग्रेस के नेतृत्व वाले UPA दौर पर निशाना साधते हुए पीएम मोदी ने कहा कि एक समय था जब दुनिया भारत की अर्थव्यवस्था को 'फ्रैजाइल फाइव' (दुनिया की 5 सबसे कमज़ोर अर्थव्यवस्थाएँ) की श्रेणी में गिनती थी। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि पिछले 12 सालों में देशवासियों के प्रयास से भारत इस दाग को धोकर सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली महा-अर्थव्यवस्था के रूप में उभरा है और हाल ही में जापान को पीछे छोड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है।
'फ्रैजाइल फाइव' शब्द की उत्पत्ति वर्ष 2013 में हुई थी, जब ग्लोबल इन्वेस्टमेंट बैंक मॉर्गन स्टेनली (Morgan Stanley) ने एक शोध रिपोर्ट जारी की थी। इस रिपोर्ट में दुनिया की 5 उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं को शामिल किया गया था, जिन्हें बाहरी वित्तीय झटकों के सामने बेहद संवेदनशील और कमज़ोर माना गया था। इस समूह में भारत के साथ ये देश शामिल थे:
“The country became independent with many dreams but we could not keep pace so by 2014 the world dumped us into fragile-5.”
- PM Modi pic.twitter.com/RK6FpgGzhu— News Arena India (@NewsArenaIndia) August 15, 2026
2013 के दौर में भारत को इस समूह में शामिल करने के पीछे कई गंभीर आर्थिक कारण थे:
From the Red Fort, PM Modi laid out “Shakti ki Saptadhara”... seven streams of strength that will drive India’s next phase of growth.
Manufacturing
Agriculture & food production
Technology & innovation
Gati Shakti
Defence
Green & Blue Economy
Soft Power
But the bigger message… pic.twitter.com/KmmFrJwHvz— Yash Rawat (@india_expert) August 15, 2026
‘फ्रैजाइल फाइव’ का लेबल स्थायी नहीं था। भारत ने बाहरी क्षेत्र में सुधार की दिशा में कई कदम उठाए। चालू खाता घाटे को नियंत्रित करने, सोने के आयात को कम करने और विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत करने पर जोर दिया गया। इसके बाद भारत की बाहरी वित्तीय स्थिति में सुधार हुआ और 2014 तक भारत को इस कमजोर समूह से बाहर माना जाने लगा। IMF ने भी उस दौर में भारत के मैक्रोइकोनॉमिक सुधारों को उभरती अर्थव्यवस्थाओं में उल्लेखनीय बताया था।
'फ्रैजाइल फाइव' में शामिल होने के महज़ एक साल बाद, यानी 2014 में भारत इस विवादास्पद समूह से बाहर निकल आया। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने माना कि उभरते हुए बाज़ारों में भारत ने मैक्रो-इकोनॉमिक मोर्चे पर सबसे तेज़ सुधार दर्ज किया। तत्कालीन RBI गवर्नर रघुराम राजन के नेतृत्व में लिए गए सख्त फैसलों, सोने के आयात पर पाबंदी और निर्यात को बढ़ावा देने की रणनीतियों से विदेशी मुद्रा भंडार मज़बूत हुआ और चालू खाता घाटा नियंत्रण में आया। इसी टर्नअराउंड ने भारत को आज अमेरिका, चीन और जर्मनी के बाद दुनिया की चौथी सबसे बड़ी ताकत बनने का रास्ता साफ किया।
स्वतंत्रता दिवस के भाषण में PM मोदी ने ‘फ्रैजाइल फाइव’ का जिक्र मुख्य रूप से भारत की आर्थिक प्रगति का उदाहरण देने के लिए किया। उनका तर्क था कि जिस देश को कभी कमजोर अर्थव्यवस्थाओं के समूह में रखा जाता था, वह आज वैश्विक अर्थव्यवस्था में कहीं अधिक मजबूत स्थिति में है। यानी ‘फ्रैजाइल फाइव’ का वह पुराना टैग अब भारत की आर्थिक यात्रा में एक बीते दौर की याद बन चुका है-लेकिन 2013 की वह कहानी आज भी यह समझने में मदद करती है कि वैश्विक वित्तीय झटकों के बीच किसी देश की अर्थव्यवस्था कितनी जल्दी दबाव में आ सकती है और सुधारों से तस्वीर कैसे बदल सकती है।
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