
France Protests: फ्रांस इस समय दशकों के सबसे बड़े छात्र विद्रोह और विरोध-प्रदर्शनों की आंधी से जूझ रहा है। देश भर के हज़ारों स्कूली छात्र सड़कों पर उतर आए हैं, जिससे सैकड़ों स्कूल पूरी तरह ठप या बंद हो चुके हैं। हालात इतने बेकाबू हो चुके हैं कि प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी झड़पें, आगजनी और आंसू गैस के इस्तेमाल की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। सरकार भी इस अचानक फूटे गुस्से से पूरी तरह हैरान है।
🚨 FRANCE IS LOSING CONTROL OF ITS SCHOOLS
What began as student protests has exploded into urban violence.
Schools torched. Principals and teachers attacked. Police targeted. Nearly 2,000 arrests and more than 300 officers injured in a single day as unrest spread across… pic.twitter.com/Rm9Hx7siSq— Decode Conflict (@DecodeConflict) October 2, 2026
इस बड़े पैमाने पर असंतोष की सबसे बड़ी वजह सरकारी शिक्षा व्यवस्था में सालों से चली आ रही घोर अनदेखी और कम निवेश है। छात्रों और शिक्षकों का कहना है कि क्लासरूम में क्षमता से बहुत ज्यादा भीड़ है, स्कूल की इमारतें जर्जर हालत में हैं, और स्टाफ या शिक्षकों की भारी कमी है। कई स्कूलों में तो छतों से पानी टपकने और बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी जैसी समस्याएं आम हो गई हैं। इसके अलावा, शिक्षकों की कम सैलरी, यूनिवर्सिटी में एडमिशन की जटिल और अपारदर्शी प्रक्रिया, तथा भीषण गर्मी में पढ़ाई के बदतर हालात ने आग में घी डालने का काम किया है।
🇫🇷 - France’s school unrest is no longer a classroom dispute. It has turned into urban violence, and the official refusal to say who is in the streets is part of the problem.
Blockades that began over overcrowded classes, missing teachers and decaying buildings have spread… pic.twitter.com/oaZm2ATV4p— 🔥🗞The Informant (@theinformant_x) October 2, 2026
यह आंदोलन अब सिर्फ कुछ इलाकों तक सीमित नहीं है, बल्कि पेरिस, ल्योन, स्ट्रासबर्ग और मोंटपेलियर जैसे बड़े शहरों में फैल चुका है। शुक्रवार को पेरिस में 'लिसी वोल्टेयर' समेत कई स्कूलों के गेट बंद कर दिए गए। कुछ जगहों पर प्रदर्शन हिंसक हो गया, जहां कूड़ेदान जलाए गए और स्कूलों के दरवाजों को आग से नुकसान पहुंचाया गया। पुलिस ने भीड़ को खदेड़ने के लिए आंसू गैस छोड़ी, जिसके बाद पुलिस पर अत्यधिक बल प्रयोग के आरोप भी लगे हैं। इस हिंसा में दर्जनों छात्र और स्कूल प्रिंसिपल समेत शिक्षा विभाग के 65 कर्मचारी घायल हो चुके हैं, और सैकड़ों युवाओं को हिरासत में लिया गया है।
🇫🇷 France’s latest riots didn’t come out of nowhere. They started with angry high school students and years of frustration over the state of their schools.
For about a week, teenagers aged 15 to 18 have been blockading lycées over teacher shortages, overcrowded classes,…— Mario Nawfal (@MarioNawfal) October 2, 2026
छात्रों का साफ कहना है कि उनकी लड़ाई सिर्फ चार दीवारों तक सीमित नहीं है। वे शिक्षा बजट में भारी बढ़ोतरी, मजबूत स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर, पर्याप्त शिक्षकों की भर्ती और कर्मचारियों के लिए बेहतर कामकाजी माहौल की मांग कर रहे हैं। इसके साथ ही, छात्रों के लिए सस्ते आवास और सब्सिडी वाले भोजन जैसी सामाजिक कल्याण की मांगें भी जोर पकड़ रही हैं। सरकार ने छात्रों की चिंताओं को तो जायजा माना है, लेकिन देश भर में फैली इस शहरी हिंसा की कड़ी निंदा की है। अब देखना यह होगा कि फ्रांस सरकार इस सुलगते हुए छात्र असंतोष को शांत करने के लिए क्या कदम उठाती है।
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