
भारत समेत कई देशों में 2 अगस्त 2026 को फ्रेंडशिप डे मनाया जा रहा है। यह दिन अपने बेस्ट फ्रेंड और बचपन के दोस्तों के प्रति प्यार, सम्मान और उनकी यारी को याद करने का दिन है। इसी मौक पर हम आपको बताने जा रहे हैं उन नेताओं की दोस्ती के बारे में, जिनका याराना किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं। पूरी दुनिया इनकी फ्रेंडशिप की मिसाल देती है। इन नेताओं में आज कोई दुनिया छोड़ चुका है तो कोई किसी का राजनीतिक घुर विरोधी हो गया है। तो आइए जानते हैं कौन हैं लीडर...
भारतीय राजनीति की जोड़ी या फिर नेताओं की दोस्ती की बात होती है तो सबस पहले नाम अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी की याद आती है जो सबसे मजबूत, लोकप्रिय और ऐतिहासिक 'जुगलबंदी' थे। अटल आज भले ही इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन आडवाणी उनके साथ बिताए पल को याद करते हैं।
मुलायम सिंह यादव और अमर सिंह की दोस्ती भी सियासत में सबसे चर्चित और दिलचस्प थी। 1990 के दशक में इनकी जोड़ी संसद से सड़क तक खूब दिखाई देती थी। लेकिन आज दोनों इस दुनिया में नहीं है। अमर सिंह ने समाजवादी पार्टी को कॉर्पोरेट और बॉलीवुड जगत से जोड़ने में अहम भूमिका निभाई, जिसके चलते मुलायम सिंह ने उनको पार्टी में अहम जगह दी।
लाल और नीतीश आज जरूर साथ नहीं है, दोनों राजनीतिक विचारधारा के कारण सियासी विरोधी जरूर हैं, लेकिन दोनों में गहरी दोस्ती है। दोनों के बीच का रिश्ता 'दोस्ती और दुश्मनी' जैसा है। 1970 के दशक के जेपी आंदोलन से शुरू हुई यह दोस्ती बिहार की सियासत का सबसे चर्चित चेहरा बनी।
मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और कांग्रेस नेता सचिन पायलट के बीच काफी गहरी दोस्ती है। दोनों ने जब सियासी सफर शुरू किया था तब से उनके बीच याराना है। यह अलग बात है कि दोनों अलग अलग पार्टियों में हैं। लेकिन राजनीतिक राहें अलग होने के बावजूद दोनों के बीच व्यक्तिगत संबंध हमेशा मजबूत रहे हैं।
अमित शाह और पीएम मोदी की दोस्ती 4 दशक पुरानी है। यह राजनीतिक जोड़ी भारत ही नहीं, पूरी दुनिया में फेमस है। जो दोनों की पहली मुलाकात 1982 में अहमदाबाद में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की एक बैठक के दौरान हुई थी। आज सबसे सफल जोड़ी के रूप में जानी जाती है। सियासत से लेकर पारिवारिक तक उनके बीच का रिश्ता-भरोसा काफी गहरा है।
भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और बॉलीवुड के सुपरस्टार अमिताभ बच्चन की दोस्ती तो पूरी दुनिया में जग जाहिर है। स्कूल से शुरू हुई यह फ्रेंडशिप सियासी सफर तक साथ चली। राजीव के कारण अमिताब ने राजनीति में भी कदम रखा। हालांकि बाद में सियासत छोड़ दी। आज राजीव इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन अमित जी उनके साथ बिताए पल को याद कर भावुक हो जाते हैं।
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