
Ganga Yamuna Water Level Today: संगमनगरी प्रयागराज में गंगा और यमुना के जलस्तर को लेकर राहत की खबर है। पिछले कुछ दिनों से बढ़ रहा पानी अब नीचे आने लगा है। सोमवार सुबह तक दोनों नदियों के कई प्रमुख पॉइंट्स पर जलस्तर में कमी दर्ज की गई। ऐसे में निचले इलाकों में बाढ़ का दबाव भी पहले के मुकाबले कम होता दिख रहा है। हालांकि, आसमान में बादल अब भी छाए हुए हैं और तेज हवाएं चल रही हैं। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में बारिश की संभावना जताई है। ऐसे में सवाल है कि अगर फिर बारिश होती है तो गंगा-यमुना का पानी दोबारा बढ़ेगा या नहीं।
7 सितंबर 2026 की सुबह 8 बजे की रीडिंग के मुताबिक, प्रयागराज में गंगा और यमुना के जलस्तर में पिछले 24 घंटे के दौरान गिरावट दर्ज हुई है। पानी खतरे के तय स्तर से नीचे है और कई जगहों पर लगातार कमी देखने को मिल रही है।
नैनी में यमुना- 81.76 मीटर (खतरे के निशान से करीब 2.97 मीटर नीचे)
फाफामऊ में गंगा- 82.01 मीटर (खतरे के निशान से करीब 2.72 मीटर नीचे)
छतनाग में गंगा:- 81.30 मीटर (खतरे के निशान से करीब 3.43 मीटर नीचे)
STP बक्शी बांध- 81.87 मीटर (खतरे के निशान से करीब 2.86 मीटर नीचे)
सबसे ज्यादा कमी फाफामऊ में गंगा के जलस्तर में देखने को मिली। यहां एक दिन में पानी करीब 25 सेंटीमीटर नीचे आया। वहीं नैनी में यमुना का पानी 19 सेंटीमीटर कम हुआ है। STP बक्शी बांध पर 20 सेंटीमीटर और छतनाग में गंगा का जलस्तर 12 सेंटीमीटर नीचे आया। इस तरह अलग-अलग पॉइंट्स पर पानी में हर घंटे औसतन करीब 0.5 से 1 सेंटीमीटर तक की कमी देखने को मिल रही है।
प्रयागराज में बाढ़ के लिहाज से 84.734 मीटर का स्तर अहम माना जाता है। सोमवार सुबह की रीडिंग इससे नीचे है। सबसे ज्यादा जलस्तर फाफामऊ में 82.01 मीटर दर्ज हुआ। यानी यहां पानी खतरे के निशान से करीब 2.72 मीटर नीचे है।
फिलहाल पानी नीचे जाने से राहत की स्थिति बनी है। जिन निचले इलाकों में पिछले दिनों पानी पहुंच गया था, वहां भी दबाव कम होने की उम्मीद है। सभी तटबंध सुरक्षित बताए गए हैं। साथ ही सोमवार सुबह तक जिले में बारिश भी दर्ज नहीं हुई थी। यही वजह है कि फिलहाल बाढ़ का खतरा पहले की तुलना में कम नजर आ रहा है। लेकिन इसे पूरी तरह नजरअंदाज करना भी सही नहीं होगा। अगर अगले कुछ दिनों में तेज बारिश होती है या ऊपर के इलाकों से नदियों में ज्यादा पानी आता है, तो जलस्तर फिर बढ़ सकता है।
सोमवार सुबह प्रयागराज में मौसम बदला हुआ नजर आया। आसमान में घने बादल छाए रहे और तेज हवा भी चलती रही। पिछले चार दिनों से बारिश का सिलसिला रुका हुआ है। बारिश नहीं होने के बावजूद उमस बढ़ गई है। बीच-बीच में धूप निकलने से गर्मी और चिपचिपाहट ज्यादा महसूस हो रही है।
बारिश का असर नदी के जलस्तर पर पड़ सकता है। खासकर अगर लगातार या तेज बारिश होती है तो पानी दोबारा ऊपर जा सकता है। इसलिए अभी राहत जरूर है, लेकिन लोगों को नदी और बाढ़ प्रभावित इलाकों की स्थिति पर नजर बनाए रखनी चाहिए।
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