काशी के इस मस्जिद विवाद पर नाक अड़ा रहा था पाकिस्तान! मुसलमानों ने ही लगा दी फटकार

Published : Jun 21, 2026, 03:45 PM IST
Ganz Shaheedan Mosque Row Pakistani President Zardari Remarks Draw Sharp Response from Varanasi Muslim Clerics

सार

Ganz Shaheedan Mosque Row: गंज शहीदां मस्जिद विवाद पर पाकिस्तान के राष्ट्रपति जरदारी के बयान से बवाल मच गया है, काशी के मुस्लिम धर्मगुरुओं ने दिया करारा जवाब।

वाराणसी में गंज शहीदां मस्जिद को लेकर चल रहा विवाद अब देश की सीमाओं से बाहर भी चर्चा का विषय बन गया है। इस मामले में पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी की टिप्पणी के बाद नया विवाद खड़ा हो गया है। हालांकि, उनके बयान को भारत के मुस्लिम समाज से समर्थन नहीं मिला। उल्टा, कई मुस्लिम धर्मगुरुओं और संगठनों ने इसे भारत का आंतरिक मामला बताते हुए पाकिस्तान को हस्तक्षेप न करने की सलाह दी है।

गंज शहीदां मस्जिद को लेकर क्या बोले राष्ट्रपति जरदारी?

पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा करते हुए दावा किया कि भारत में ऐतिहासिक मुस्लिम धार्मिक स्थलों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने वाराणसी की गंज शहीदां मस्जिद का उल्लेख करते हुए कहा कि करीब 1,000 साल पुरानी इस मस्जिद को गिराने की साजिश रची जा रही है।

जरदारी ने अपने पोस्ट में यह भी कहा कि यदि ऐसा हुआ तो इससे सामाजिक अस्थिरता पैदा हो सकती है। उन्होंने भारत सरकार से अल्पसंख्यकों के अधिकारों और साझा सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस शुरू हो गई।

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काशी के मुस्लिम धर्मगुरुओं ने दिया सख्त जवाब

राष्ट्रपति जरदारी की टिप्पणी पर काशी के मुस्लिम धर्मगुरुओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। मुफ्ती-ए-बनारस मौलाना अब्दुल बातिन नोमानी ने कहा कि यह पूरी तरह भारत का आंतरिक मामला है और इसका समाधान भारतीय कानून और न्यायिक प्रक्रिया के तहत किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि पाकिस्तान को भारत के मामलों में दखल देने की आवश्यकता नहीं है।

मौलाना नोमानी ने पाकिस्तान की स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि वहां धार्मिक स्थलों और मस्जिदों की सुरक्षा को लेकर खुद कई चुनौतियां मौजूद हैं। ऐसे में पाकिस्तान को पहले अपने देश की समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए। सिर्फ काशी ही नहीं, बल्कि देश के अन्य हिस्सों से भी कई मुस्लिम संगठनों और धर्मगुरुओं ने जरदारी के बयान पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि भारत के संवेदनशील मामलों पर किसी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष की सार्वजनिक टिप्पणी उचित नहीं है। कई संगठनों ने कहा कि भारत का संविधान और न्याय व्यवस्था ऐसे मामलों को सुलझाने में पूरी तरह सक्षम हैं।

फिलहाल गंज शहीदां मस्जिद से जुड़ी कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं जारी हैं। वहीं, पाकिस्तान के राष्ट्रपति की टिप्पणी के बाद यह मुद्दा राजनीतिक और कूटनीतिक चर्चाओं में भी शामिल हो गया है। हालांकि, भारत के मुस्लिम समाज के एक बड़े वर्ग ने साफ कर दिया है कि इस मामले का समाधान भारतीय कानून और संविधान के दायरे में ही होना चाहिए।

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