
दिल्ली की एक वकील का एक पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसने ऑफिस के माहौल और नई पीढ़ी यानी Gen Z की सोच को लेकर एक बड़ी बहस छेड़ दी है। वकील ने अपने Gen Z इंटर्न को सुबह 9 बजे एक रूटीन काम के लिए दिल्ली कोर्ट पहुंचने को कहा। जवाब में इंटर्न ने कहा कि वह नहीं आ पाएगा क्योंकि यह उसके जिम का समय है। हालांकि, उसने यह भी कहा कि वह एक बार के लिए इसे 'अपवाद' मानकर आ जाएगा। इस बातचीत से हैरान वकील ने X पर लिखा, "इस मोड़ पर मुझे समझ नहीं आ रहा कि मैं उसकी सीनियर हूं, जूनियर हूं या पर्सनल असिस्टेंट। इसे सामान्य नहीं बनाया जा सकता।"
Told an intern to reach Court by 9 AM to manage some work। He said that won’t be possible, as he has to go the gym and agreed to do it as a one-time exception।
At this point, I’m not sure if I’m his senior, his junior, or his personal assistant। 😭
Can't normalize this।— Tanatan (@is_enticing) August 16, 2026
उनका पोस्ट देखते ही देखते वायरल हो गया और लोग दो गुटों में बंट गए। कुछ लोगों ने इंटर्न को गैर-पेशेवर बताते हुए उसकी आलोचना की। उनका कहना था कि काम के आगे जिम को तरजीह देना गलत है। वहीं, दूसरे पक्ष का कहना था कि कर्मचारियों को अपने पर्सनल टाइम का हक है, खासकर जब उन्हें रेगुलर वर्किंग आवर्स के बाहर बुलाया जा रहा हो।
इस बहस में सैलरी और काम की उम्मीदों का मुद्दा भी उठा। कई यूजर्स ने सवाल किया कि क्या इंटर्न को सुबह जल्दी आने के लिए अलग से पैसे दिए जा रहे थे? उन्होंने वकील के 'पर्सनल असिस्टेंट' वाले कमेंट पर भी सवाल उठाए।
बाद में वकील ने साफ किया कि उन्हें इंटर्न के जिम जाने या उसके वर्कआउट के समय से कोई दिक्कत नहीं थी। उन्होंने बताया कि कोर्ट का काम रूटीन ब्रीफिंग से जुड़ा था। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि उनके यहां इंटर्न्स को सैलरी और दूसरे खर्चे भी दिए जाते हैं।
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