Goa Voter List Dispute: SIR में 97 वोटरों के नाम क्यों छूटे? CEO का बड़ा अपडेट, फिर क्यों मचा बवाल?

Published : Sep 25, 2026, 07:53 AM IST

Goa SIR: गोआ वोटर लिस्ट से 97 योग्य मतदाताओं के नाम गायब होने के विवाद पर मुख्य चुनाव अधिकारी ने सफाई दी है। देश भर में SIR प्रक्रिया के तहत 13 करोड़ से ज्यादा वोटर्स के नाम कटने और राजनीतिक दलों के आरोपों की पूरी जानकारी पढ़ें।

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गोवा SIR: 97 मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट में नहीं आए, कई अब जुड़े

Goa Voter List: गोआ में वोटर लिस्ट से नाम गायब होने के मामले ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। फरवरी में हुए स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के बाद आई फाइनल लिस्ट में 97 योग्य वोटरों के नाम नहीं होने पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया था। अब गोआ के मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) का कहना है कि इनमें से कई लोगों के नाम बाद में जोड़ दिए गए हैं और बाकी पर काम चल रहा है।

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Goa Voter List Updates: 649 मामलों की हुई थी जांच

मामला उन मतदाताओं से जुड़ा है, जिनकी जानकारी में SIR के दौरान ‘logical discrepancies’ पाई गई थीं। दस्तावेज और आपत्तियां दाखिल करने का अवसर मिलने के बाद 649 मतदाता सामने आए। चुनाव पंजीकरण अधिकारियों (EROs) और सहायक EROs की जांच में 97 लोगों को वोटर लिस्ट में शामिल किए जाने के योग्य पाया गया। रिपोर्ट के अनुसार, गोवा CEO कार्यालय ने 11 से 17 फरवरी के बीच आठ बार वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क कर इन नामों को अंतिम सूची में शामिल करने के लिए जरूरी सुविधा उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था। लेकिन 21 फरवरी को प्रकाशित अंतिम सूची में ये 97 नाम शामिल नहीं हो सके।

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SIR विवाद: BLO ने घर-घर जाकर शुरू की प्रक्रिया

अब CEO कार्यालय के मुताबिक, इन 97 मामलों को अलग से प्रोसेस किया गया। बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) ने घर-घर जाकर Form 6 भरवाने की प्रक्रिया शुरू की। कार्यालय ने कहा कि कई मतदाता अब सूची में शामिल हो चुके हैं और बाकी मामलों पर काम जारी है। CEO कार्यालय ने यह भी दोहराया कि कोई भी योग्य मतदाता छूटेगा नहीं।

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Voter List Row: विपक्ष के आरोप, BJP का जवाब

इस मामले को लेकर राजनीतिक विवाद भी तेज हुआ है। गोवा कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष सुनील कवथंकर ने SIR प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि इससे सही मतदाताओं के नाम प्रभावित हो रहे हैं और प्रक्रिया वापस ली जानी चाहिए। दूसरी ओर, BJP ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए उन्हें बदनाम करने की मुहिम बताया है। यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब SIR के तहत वोटर लिस्ट में नामों के सत्यापन और हटाए जाने को लेकर देश के कई हिस्सों में बहस जारी है। गोवा की घटना ने खास तौर पर यह सवाल उठाया है कि जांच में योग्य पाए गए मतदाताओं के नाम अंतिम सूची में समय पर क्यों नहीं जुड़ सके।

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देश भर में SIR प्रक्रिया पर उठ रहे बड़े सवाल

सिर्फ गोआ ही नहीं, बल्कि देश भर में इस स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं। विपक्ष का दावा है कि इसके तहत देश भर में 13 करोड़ से ज्यादा यानी करीब 14% वोटरों के नाम काटे जा चुके हैं। आंकड़े बताते हैं कि दिल्ली में सबसे ज्यादा 32.8% वोटरों के नाम हटाए गए, इसके अलावा दादरा और नगर हवेली, तेलंगाना, महाराष्ट्र और कर्नाटक में भी भारी संख्या में नाम काटे जाने से चुनावी पारदर्शिता पर बहस छिड़ गई है। चुनाव आयोग हालांकि यह साफ कर चुका है कि किसी भी योग्य मतदाता को छोड़ा नहीं जाएगा और सूचियों को दुरुस्त किया जा रहा है।

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