
गोरखपुर अब केवल पहचान का शहर नहीं रहा, यह भरोसे और बदलाव की कहानी बन चुका है। कला, संस्कृति, प्रतिभा और रोजगार को एक मंच पर लाने वाला गोरखपुर महोत्सव अपने समापन की ओर है। मंगलवार को इस महोत्सव के समापन समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी गोरखपुर के विकास सफर को एक नई ऊर्जा देने वाली है।
मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में गोरखपुर ने पिछले कुछ वर्षों में जो बदलाव देखे हैं, वे इस महोत्सव के हर रंग, हर मंच और हर प्रस्तुति में झलकते हैं। यही वजह है कि गोरखपुर महोत्सव अब सिर्फ एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि विरासत और विकास के संतुलन का प्रतीक बन गया है।
साल 2017 से पहले गोरखपुर को अक्सर पिछड़ेपन के नजरिए से देखा जाता था। लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में इस जिले ने विकास की नई दिशा पकड़ी। बुनियादी ढांचे से लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और रोजगार तक गोरखपुर ने हर क्षेत्र में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई।
विकास के साथ-साथ यहां की कला और संस्कृति को भी नई पहचान मिली। पारंपरिक लोककलाओं से लेकर आधुनिक प्रस्तुतियों तक, गोरखपुर महोत्सव ने यह दिखाया कि प्रगति और परंपरा एक-दूसरे की विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हो सकती हैं।
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इस वर्ष गोरखपुर महोत्सव का आयोजन रामगढ़ताल के सामने स्थित चंपा देवी पार्क में किया गया। महोत्सव का शुभारंभ रविवार को प्रदेश के पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने किया था। कई दिनों तक चले इस आयोजन में सांस्कृतिक कार्यक्रमों, स्थानीय उत्पादों, हस्तशिल्प, पर्यटन और रोजगार से जुड़े प्रयासों ने लोगों का ध्यान खींचा। मंगलवार अपराह्न होने वाले औपचारिक समापन समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति इस आयोजन को विशेष बना देगी।
समापन समारोह के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अलग-अलग क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले छह विशिष्ट व्यक्तियों को ‘गोरखपुर रत्न सम्मान’ प्रदान करेंगे। यह सम्मान उन लोगों के लिए है, जिन्होंने अपने कार्य से न सिर्फ गोरखपुर बल्कि पूरे प्रदेश का नाम रोशन किया है।
गोरखपुर महोत्सव आज उस सोच का प्रतिनिधित्व करता है, जिसमें स्थानीय प्रतिभा को पहचान, युवाओं को अवसर और परंपराओं को सम्मान मिलता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में होने वाला समापन समारोह न सिर्फ बीते आयोजनों की सफलता का प्रतीक होगा, बल्कि आने वाले समय में गोरखपुर के विकास की दिशा भी तय करेगा।
विरासत को संजोते हुए विकास की रफ्तार को बनाए रखने का यह संदेश गोरखपुर महोत्सव को एक साधारण आयोजन से कहीं आगे ले जाता है।
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