
Gorakhpur BJP Leader Murder Case Update: गोरखपुर के बरगदवा इलाके में 17 मार्च की सुबह हुई सनसनीखेज हत्या ने पूरे शहर को हिला दिया। पूर्व पार्षद प्रतिनिधि और भाजपा नेता राजकुमार चौहान की गोली मारकर और चाकू से गोदकर हत्या कर दी गई। शुरुआत में यह मामला राजनीतिक दुश्मनी या बड़ी साजिश जैसा लग रहा था, लेकिन अब पुलिस जांच में जो सच सामने आया है, उसने कहानी को एकदम अलग मोड़ दे दिया है। जिलाधिकारी दीपक मीणा और एसएसपी डॉ कौस्तुभ ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि इस हत्याकांड के पीछे निजी रंजिश थी, और इसे अंजाम देने वाले दो डंपर चालक निकले।
पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने पूछताछ में कबूल किया कि उनकी असली दुश्मनी मृतक के भतीजे नितेश से थी। पिछले चार महीनों से दोनों के बीच तनाव चल रहा था। करीब दो महीने पहले भतीजे ने आरोपी राज चौहान उर्फ निरहुआ की पिटाई भी कर दी थी। मामले में खास बात यह रही कि हर बार भतीजे का बचाव राजकुमार चौहान करते थे। यही बात आरोपियों को चुभ गई। उनका मानना था कि भतीजा अपने चाचा के सहारे दबंगई करता है। इसी गुस्से में उन्होंने चाचा को ही निशाना बना लिया।
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आरोपियों ने पुलिस को बताया कि उन्होंने पहले से ही हत्या की योजना बना ली थी। 17 मार्च की सुबह दोनों आरोपी घटनास्थल के पास एक पेड़ के पीछे छिपकर बैठ गए। जैसे ही राजकुमार चौहान रोज की तरह टहलने निकले, एक आरोपी ने उन पर फायर कर दिया। गोली लगने के बाद भी दोनों नहीं रुके और चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर उनकी हत्या कर दी।
इस मामले को सुलझाने में CCTV फुटेज और सर्विलांस ने अहम भूमिका निभाई। पुलिस ने घटनास्थल के आसपास लगे करीब 8 कैमरों की फुटेज खंगाली, जिसमें दो संदिग्ध दिखाई दिए। इसके बाद तकनीकी जांच और अन्य स्रोतों से पुष्टि होने पर पुलिस ने दोनों आरोपियों को हिरासत में लिया। पूछताछ में उन्होंने अपना गुनाह कबूल कर लिया। हालांकि, अभी तक हत्या में इस्तेमाल हथियार बरामद नहीं हो पाए हैं।
बता दें, पुलिस ने जिन दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है, उनकी पहचान बरगदवा निवासी राज चौहान उर्फ निरहुआ और विपिन यादव के रूप में हुई है। दोनों डंपर चालक हैं और इलाके में ही रहते हैं।
मृतक राजकुमार चौहान का शव पोस्टमार्टम के बाद शाम करीब 5 बजे घर पहुंचा। इसके बाद परिजन कुछ मांगों को लेकर अड़ गए थे। स्थिति को संभालने के लिए राज्यसभा सांसद डॉ राधा मोहन दास अग्रवाल और कैबिनेट मंत्री दारा सिंह चौहान मौके पर पहुंचे।
दोनों नेताओं के समझाने के बाद परिवार ने अंतिम संस्कार के लिए सहमति दी। देर रात मोहरीपुर के पास घाट पर राजकुमार चौहान का अंतिम संस्कार किया गया।
राजकुमार चौहान ओबीसी समुदाय से आते थे और इलाके में उनका अच्छा प्रभाव माना जाता था। जानकारी के मुताबिक, वह 2027 विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे और भाजपा से टिकट की उम्मीद भी जता रहे थे। उनकी हत्या से न सिर्फ परिवार बल्कि स्थानीय राजनीति में भी एक बड़ा खालीपन आ गया है।
इस मामले में पुलिस ने पहले ही 8 नामजद लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया था, जिनमें से 7 को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा चुकी है। फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क और अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
गोरखपुर का यह हत्याकांड यह दिखाता है कि छोटी-छोटी रंजिशें किस तरह खतरनाक मोड़ ले सकती हैं। निजी विवाद ने एक राजनीतिक चेहरे की जान ले ली। पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए मामले का खुलासा जरूर कर दिया है, लेकिन कई सवाल अब भी बाकी हैं,खासकर हथियारों की बरामदगी और बाकी आरोपियों की भूमिका को लेकर।
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