Shadow Transhipment Network: अमेरिका ने उन देशों की एक लिस्ट जारी की है जो कथित तौर पर चीन को अमेरिकी टैरिफ से बचाने में मदद कर रहे हैं। इस 'शैडो ट्रांशिपमेंट नेटवर्क' में भारत और इज़राइल जैसे देशों का नाम भी शामिल है। इन देशों पर अमेरिकी बाज़ार से बैन तक की कार्रवाई हो सकती है।

India China Trade: अमेरिका ने भारत समेत करीब 40 देशों पर चीन के ऐसे सामान को अमेरिकी बाजार तक पहुंचाने में मदद करने का आरोप लगाया है, जिन पर अमेरिका ने भारी टैरिफ लगा रखा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सलाहकार पीटर नवारो की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन से आने वाले सामान को कम टैरिफ वाले तीसरे देशों के रास्ते अमेरिका भेजा गया।

रिपोर्ट का शीर्षक ‘The Great Transhipment Scam’ है। इसमें इस कथित नेटवर्क के जरिए होने वाले ट्रांसशिपमेंट का मूल्य करीब 60 अरब डॉलर बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इससे अमेरिकी सरकार को अरबों डॉलर के टैरिफ राजस्व का नुकसान हुआ।

Shadow Transhipment Network: भारत समेत 40 देशों पर आरोप

अमेरिकी रिपोर्ट में भारत को उन देशों की सूची में शामिल किया गया है, जिन पर चीन से आने वाले टैरिफ प्रभावित सामान को तीसरे देश के जरिए अमेरिकी बाजार में पहुंचाने वाले नेटवर्क का हिस्सा होने का आरोप लगाया गया है।

रिपोर्ट में शामिल देशों में भारत, कनाडा, यूरोपीय संघ, इजरायल, जापान, मैक्सिको, दक्षिण कोरिया, ताइवान, ब्राजील, इंडोनेशिया, मलेशिया, थाईलैंड, तुर्की और वियतनाम जैसे देश शामिल हैं।

इसके अलावा अर्जेंटीना, अजरबैजान, बांग्लादेश, कंबोडिया, चिली, कोलंबिया, कोस्टा रिका, डोमिनिकन रिपब्लिक, जॉर्जिया, जॉर्डन, कजाकिस्तान, केन्या, लाओस, मोरक्को, म्यांमार, ओमान, पनामा, पेरू, फिलीपींस, सिंगापुर, श्रीलंका, स्विट्जरलैंड, संयुक्त अरब अमीरात और उज्बेकिस्तान का भी नाम रिपोर्ट में दिया गया है।

चीन के सामान पर टैरिफ से बचने का आरोप

रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि चीन पर लगाए गए अमेरिकी टैरिफ से बचने के लिए कुछ सामानों को पहले ऐसे देशों में भेजा गया, जहां टैरिफ अपेक्षाकृत कम थे। इसके बाद इन्हें अमेरिकी बाजार में पहुंचाया गया।

अमेरिकी प्रशासन इसे illegal transhipment यानी अवैध तरीके से सामान के पुनः निर्यात के तौर पर देख रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इससे अमेरिकी कंपनियों को प्रतिस्पर्धात्मक नुकसान हुआ और सरकार को मिलने वाले टैरिफ राजस्व पर भी असर पड़ा।

67 अरब डॉलर के सामान का दावा

रिपोर्ट में अमेरिकी वाणिज्य विभाग के आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि 2025 में करीब 67 अरब डॉलर के अमेरिकी-बाउंड सामान को चीन से मैक्सिको, भारत और वियतनाम जैसे प्रमुख ट्रांसशिपमेंट हब के जरिए भेजा गया।

रिपोर्ट के अनुमान के अनुसार, इससे अमेरिकी सरकार को करीब 28 अरब डॉलर के टैरिफ राजस्व का नुकसान हुआ।

हालांकि, रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि ये आंकड़े अनुमान और मॉडल पर आधारित हैं, न कि सीधे तौर पर दर्ज किए गए अवैध ट्रांसशिपमेंट या नौकरियों के वास्तविक आंकड़े।

अमेरिका ने कार्रवाई की मांग की

पीटर नवारो की रिपोर्ट में ऐसे देशों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की सिफारिश की गई है, जो अमेरिकी टैरिफ से बचने के लिए चीन से आने वाले सामान को दूसरे रास्तों से अमेरिकी बाजार तक पहुंचने की अनुमति देते हैं।

रिपोर्ट में संभावित कदमों के तौर पर कई उपाय सुझाए गए हैं:

  • संदिग्ध सामान की तत्काल रोक
  • अतिरिक्त पेनल्टी टैरिफ
  • प्रतिबंध यानी sanctions
  • अमेरिकी बाजार तक पहुंच पर रोक लगाने की संभावना

भारत के लिए क्यों अहम है यह रिपोर्ट?

अमेरिकी रिपोर्ट में भारत का नाम आने से दोनों देशों के बीच व्यापार और टैरिफ को लेकर चर्चा और महत्वपूर्ण हो सकती है। रिपोर्ट में भारत के पुणे-गुजरात-चेन्नई कॉरिडोर का भी उल्लेख किया गया है।

अमेरिकी दावे के मुताबिक, इस कॉरिडोर को चीन से आने वाले इलेक्ट्रिक पंप और कंप्रेसर के ट्रांसशिपमेंट से आर्थिक फायदा हुआ। रिपोर्ट का कहना है कि इसका असर अमेरिका के कुछ मैन्युफैक्चरिंग शहरों पर पड़ा।

हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि रिपोर्ट में लगाए गए ये दावे अमेरिकी प्रशासन के आकलन और मॉडल आधारित अनुमानों पर आधारित हैं।

75 अरब डॉलर के ट्रांसशिपमेंट का अनुमान

रिपोर्ट के एक केंद्रीय अनुमान में सालाना करीब 75 अरब डॉलर के अवैध ट्रांसशिपमेंट की स्थिति का आकलन किया गया है। इसके आधार पर रिपोर्ट में करीब 4.5 लाख नौकरियों के प्रभावित होने और अमेरिकी GDP में सालाना 113 अरब से 150 अरब डॉलर तक की कमी का अनुमान लगाया गया है।

इसके साथ ही संघीय राजस्व में 19 अरब से 26 अरब डॉलर तक के नुकसान का अनुमान भी दिया गया है।

अमेरिका की इस रिपोर्ट के बाद चीन से जुड़े सामान के वैश्विक व्यापार मार्गों और तीसरे देशों के जरिए होने वाले निर्यात पर निगरानी बढ़ने की संभावना है। भारत समेत जिन देशों का नाम रिपोर्ट में आया है, उनके लिए आगे अमेरिकी व्यापार नीति और संभावित टैरिफ कार्रवाई पर नजर रखना अहम होगा।