Gurugram Society Horror: 3 साल की बच्ची के साथ मेड्स ने किया दिल दहला देने वाला कांड

Published : Feb 06, 2026, 12:30 PM IST

Gurugram Crime News: क्या सुरक्षित मानी जाने वाली गुरुग्राम की हाउसिंग सोसाइटी में भरोसे की दीवार टूट गई? 3 साल की मासूम बच्ची ने जो बताया, उसने माता-पिता को झकझोर दिया। दो महिला मेड्स पर POCSO के तहत FIR-क्या सच सामने आएगा?

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Gurugram Child Abuse Case: गुरुग्राम के सेक्टर 54 स्थित एक पॉश हाउसिंग सोसाइटी से सामने आया बाल यौन शोषण का मामला न सिर्फ डराने वाला है, बल्कि शहरी परिवारों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। आरोप है कि एक 3 साल की मासूम बच्ची का कथित तौर पर उसी घर में काम करने वाली दो महिला घरेलू सहायिकाओं और उनके एक पुरुष साथी ने यौन उत्पीड़न किया। यह मामला तब उजागर हुआ, जब बच्ची ने हाल ही में अपने माता-पिता को अपने साथ हुई घटना के बारे में बताया। इसके बाद परिवार ने तुरंत सेक्टर 53 पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई।

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क्या है पूरा मामला?

माता-पिता की शिकायत के आधार पर पुलिस ने POCSO एक्ट की धारा 6 और 17 के साथ-साथ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 65(2) के तहत FIR दर्ज की है। पुलिस के अनुसार, घटना पिछले महीने की बताई जा रही है, लेकिन बच्ची की उम्र कम होने के कारण वह उस समय कुछ कह नहीं पाई। हाल ही में बातचीत के दौरान उसने अपनी आपबीती माता-पिता को बताई।

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पुलिस ने अब तक क्या कार्रवाई की?

पुलिस ने दोनों महिला घरेलू सहायिकाओं को हिरासत में लिया है, हालांकि अभी तक उनकी औपचारिक गिरफ्तारी नहीं हुई है। मामले को चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (CWC) को भी भेज दिया गया है। एक वरिष्ठ डॉक्टर ने बच्ची को उसके माता-पिता की मौजूदगी में काउंसलिंग दी है। पुलिस का कहना है कि पूरी जांच सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के अनुसार की जा रही है और किसी भी पहलू को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।

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सोसाइटी में क्यों बंटी राय?

इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि उसी सोसाइटी के कुछ निवासी आरोपों को मानने से इनकार कर रहे हैं। उनका कहना है कि दोनों महिलाएं वर्षों से अलग-अलग घरों में काम कर रही थीं और कभी कोई शिकायत सामने नहीं आई। यही कारण है कि कुछ लोग पीड़ित परिवार के समर्थन में हैं, जबकि कुछ आरोपी महिलाओं के पक्ष में खड़े दिख रहे हैं। इस तरह की स्थिति अक्सर जांच को जटिल बना देती है।

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POCSO कानून क्या कहता है ऐसे मामलों में?

POCSO (Protection of Children from Sexual Offences Act) बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों के लिए बेहद सख्त कानून है। इस कानून के तहत दोष सिद्ध होने पर कम से कम 3 साल की सजा, गंभीर मामलों में आजीवन कारावास, मामले की अनिवार्य रिपोर्टिंग, बच्चे के अनुकूल जांच और सुनवाई की प्रक्रिया का प्रावधान है। कानून का उद्देश्य साफ है-बच्चों को हर हाल में सुरक्षित माहौल देना।

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पुरुष साथी कौन है? सबसे बड़ा सवाल

FIR में दोनों महिला सहायिकाओं का नाम है, लेकिन पुरुष साथी की पहचान अब तक नहीं हो पाई है। पुलिस उसकी भूमिका और पहचान की जांच कर रही है। सुरक्षा गार्ड के अनुसार, पुलिस टीमें सोसाइटी में आईं और पूछताछ के बाद दोनों महिलाओं को साथ ले गईं। जांच पूरी होने के बाद ही सच्चाई सामने आएगी, लेकिन यह मामला समाज को सतर्क करने के लिए काफी है।

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