
गाजा के आतंकी संगठन हमास को आखिर उसका नया प्रमुख मिल गया। हमास के सबसे बड़े नेता इस्माइल हानिया की मौत के करीब 2 साल बाद संगठन ने खलील अल-हय्या को अपना नया प्रमुख चुना है। इससे पहले अल-हय्या गाजा में हमास के पॉलिटिकल ब्यूरो के प्रमुख के रूप में काम कर चुका है। हमास के आंतरिक चुनावों के बाद उसे संगठन की कमान सौंपी गई है।
खलील अल-हय्या गाजा युद्ध के दौरान संघर्ष-विराम (Ceasefire) और बंधकों की रिहाई को लेकर हुई वार्ताओं में हमास के मुख्य वार्ताकार रहे हैं। यह युद्ध 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद शुरू हुआ था। हमास के पूर्व नेताओं याह्या सिनवार और इस्माइल हानिया की मौत के बाद पिछले दो वर्षों से संगठन का नेतृत्व पांच सदस्यीय लीडरशिप काउंसिल कर रही थी। खलील अल-हय्या भी इस परिषद के प्रमुख सदस्यों में शामिल थे।
खलील अल-हय्या का जन्म गाजा पट्टी में हुआ और उन्होंने अपनी जिंदगी का ज्यादातर समय वहीं बिताया। 7 अक्टूबर 2023 की घटनाओं से कुछ समय पहले वह गाजा छोड़कर कतर चले गए थे और तब से वहीं रह रहे हैं। कतर में रहते हुए उन्होंने विभिन्न अरब देशों के राजनीतिक नेतृत्व के साथ संवाद बनाए रखा।
जुलाई 2024 में खलील अल-हय्या, हमास के तत्कालीन नेता इस्माइल हानिया के साथ तेहरान गए थे। इसी यात्रा के दौरान 31 जुलाई 2024 को हानिया की हत्या हो गई थी।खलील अल-हय्या ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि 7 अक्टूबर 2023 के हमले का उद्देश्य इजरायली सैनिकों को पकड़कर कैदियों की अदला-बदली (Prisoner Swap) कराना था। उन्होंने इस हमले का समर्थन किया था और इसे ऐसा कदम बताया था, जिसने फिलिस्तीनी मुद्दे को फिर से वैश्विक चर्चा के केंद्र में ला दिया।
नवंबर 2023 में द न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में खलील अल-हय्या ने 7 अक्टूबर के हमले को नेक और महान काम बताया था। उसके अनुसार, हमास नेतृत्व को पहले से अंदाजा था कि इस कार्रवाई के बाद बड़ी प्रतिक्रिया होगी। उन्होंने कहा था कि इस हमले का उद्देश्य पूरे समीकरण को बदलना और फिलिस्तीनी मुद्दे को फिर से अंतरराष्ट्रीय एजेंडे पर लाना था।
खलील अल-हय्या ने इस्लामिक यूनिवर्सिटी ऑफ गाजा से ग्रैजुएशन किया। इसके बाद यूनिवर्सिटी ऑफ जॉर्डन से हदीस विषय में मास्टर डिग्री हासिल की। खलील ने PhD भी की है। वह 1987 में हमास की स्थापना के समय से ही संगठन से जुड़े हुए हैं। साल 2006 से वह गाजा सिटी का प्रतिनिधित्व करते हुए फिलिस्तीनी विधायी परिषद (Palestinian Legislative Council) के सदस्य भी रहे हैं। इजरायली सैन्य अभियानों के दौरान खलील अल-हय्या ने अपने परिवार के कई सदस्यों को खोया है। रिपोर्टों के अनुसार, उनकी पत्नी, कई बेटे और अन्य रिश्तेदार इन हमलों में मारे गए। 2025 में दोहा में हुए एक इजरायली हमले में वह बाल-बाल बच गए थे।
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