Hashim Musa Encounter: जम्मू कश्मीर के यूसमर्ग के जंगल में कैसे घिरा LeT कमांडर? पहलगाम से पीर पंजाल तक सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर रहा हाशिम मूसा आखिर Operation Korag में कैसे मारा गया? 7 तस्वीरों में जानें पूरी कहानी।
Hashim Musa: बडगाम में कैसे हुआ LeT कमांडर का एनकाउंटर?
Hashim Musa Encounter: जम्मू-कश्मीर के सुरक्षा बलों ने आतंकवाद के खिलाफ एक बहुत बड़ी कामयाबी हासिल की है। बडगाम जिले के घने जंगलों में हुई एक खतरनाक मुठभेड़ में लश्कर-ए-तैयबा (LeT) का टॉप पाकिस्तानी कमांडर मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा मारा गया है। 'फौजी' के नाम से मशहूर मूसा लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के लिए सिरदर्द बना हुआ था और पुंछ-राजौरी से लेकर कश्मीर घाटी तक कई बड़े हमलों का मास्टरमाइंड था। कुछ रिपोर्टों में उसका नाम सुलैमान शाह उर्फ मूसा बताया गा है। उसे कई आतंकी हमलों में वांछित बताया गया था।
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Operation Korag: यूसमर्ग में शुरू हुआ सर्च ऑपरेशन
सुरक्षा बलों को यूसमर्ग के कोराग इलाके में आतंकियों की मौजूदगी की खास खुफिया जानकारी मिली थी। इसके बाद भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और CRPF ने मिलकर जॉइंट सर्च ऑपरेशन शुरू किया। तलाशी के दौरान जवानों को संदिग्ध गतिविधि दिखाई दी। सुरक्षा बलों ने चुनौती दी तो आतंकियों ने फायरिंग शुरू कर दी। इसके बाद मुठभेड़ शुरू हुई, जिसमें एक आतंकी मारा गया।
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Dudhpathri Encounter: जंगल में मारा गया मूसा
अधिकारियों के मुताबिक, मुठभेड़ बडगाम के ऊंचाई वाले घने जंगल क्षेत्र में हुई। रिपोर्टों में Dudhpathri और Palmaidan इलाके का भी उल्लेख है। बाद की तलाशी में मूसा का शव और कुछ युद्ध संबंधी सामान बरामद होने की जानकारी दी गई। ऑपरेशन के बाद आसपास के इलाकों में सर्च जारी रखा गया।
मूसा को पाकिस्तान स्थित LeT का शीर्ष आतंकवादी बताया गया था। सुरक्षा एजेंसियों ने उसे जम्मू-कश्मीर में कई हमलों से जोड़ा था। उसका नाम 2025 के पहलगाम आतंकी हमले की जांच में भी सामने आया था। बाद की रिपोर्टों में उसे पीर पंजाल और कश्मीर घाटी में सक्रिय LeT नेटवर्क से जोड़ा गया।
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पाकिस्तानी सैन्य पृष्ठभूमि से जुड़े होने का दावा
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, उसे ‘फौजी’ नाम से भी जाना जाता था और उसकी ट्रेनिंग को लेकर पाकिस्तानी सैन्य पृष्ठभूमि से जुड़े दावे सामने आए थे। उसके पिता के पाकिस्तानी सेना में होने की बात भी कुछ रिपोर्टों में कही गई है। हालांकि इन विवरणों को सुरक्षा सूत्रों की जानकारी के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
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पीर पंजाल के जंगलों में सक्रिय था नेटवर्क
मूसा जिस नेटवर्क से जुड़ा बताया जाता था, उसका ऑपरेशनल इलाका पीर पंजाल के दुर्गम जंगलों और पहाड़ी क्षेत्रों तक फैला था। सुरक्षा सूत्रों ने इस नेटवर्क को पुंछ-राजौरी और कश्मीर में हुए कई हमलों से जोड़ा था। घने जंगल आतंकियों को छिपने और आवाजाही में मदद देते हैं।
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Yasir की मौत के बाद तेज हुई थी तलाश
मूसा के करीबी सहयोगी यासिर के 5 सितंबर को यूसमर्ग की पहाड़ियों में मारे जाने के बाद सुरक्षा बलों ने मूसा की तलाश तेज कर दी थी। अधिकारियों के अनुसार, मूसा उस समय इलाके से बच निकलने में सफल रहा था। इसके बाद उसकी तलाश के लिए अभियान जारी रहा और आखिरकार कोराग ऑपरेशन के दौरान उसे ट्रैक किया गया।
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Operation Korag में खत्म हुई तलाश
खास खुफिया इनपुट के आधार पर शुरू हुए Operation Korag में आखिरकार सुरक्षा बलों ने मूसा को ट्रैक किया। सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और CRPF की संयुक्त कार्रवाई में मुठभेड़ हुई और उसकी तलाश खत्म हो गई। ऑपरेशन के दौरान इलाके में सर्च जारी रहा।
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पहलगाम हमले के बाद आया था चर्चा में
सुरक्षा एजेंसियों की जांच में मूसा का नाम पहलगाम आतंकी हमले से जोड़े जाने के बाद सामने आया। इसके बाद वह सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी में रहने वाले LeT ऑपरेटिव्स में शामिल हो गया। उसके खिलाफ कई आतंकी गतिविधियों से जुड़े आरोप भी लगाए गए थे।
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