
वॉशिंगटन: अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने चेतावनी दी है कि मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष की वजह से दुनिया भर में गंभीर आर्थिक मंदी और महंगाई आ सकती है। IMF की नई रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर खाड़ी देशों से तेल, गैस और खाद (फर्टिलाइजर) की सप्लाई में रुकावट आई, तो इसका असर हर महाद्वीप के देशों पर पड़ेगा।
IMF का यह गंभीर संदेश अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस धमकी के कुछ ही घंटों बाद आया, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर ईरान शांति समझौते के लिए तैयार नहीं हुआ तो वो उसके ऊर्जा के बुनियादी ढांचे को तबाह कर देंगे। अर्थशास्त्री इसे व्हाइट हाउस के लिए एक तरह की चेतावनी मान रहे हैं कि जंग का आम लोगों की जिंदगी पर कितना बुरा असर पड़ सकता है। IMF के चीफ इकोनॉमिस्ट पियरे-ओलिवियर गोरिंचास ने साफ कहा कि ऊर्जा और खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ने से इस साल दुनिया की आर्थिक ग्रोथ पर बुरा असर पड़ेगा और अर्थव्यवस्था पर इसके गहरे घाव रह जाएंगे।
खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ेंगे: होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz), जहां से दुनिया का एक-तिहाई खाद गुजरता है, वहां रुकावट आने से खेती-किसानी का सेक्टर तबाह हो सकता है। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (UN Food and Agriculture Organization) को डर है कि 2026 की पहली छमाही तक खाने-पीने की चीजों के दाम 15% से 20% तक बढ़ सकते हैं।
ऊर्जा संकट: संघर्ष से पहले कच्चे तेल की कीमत 60 डॉलर प्रति बैरल थी, जो सोमवार को 116 डॉलर तक पहुंच गई। ब्रिटेन में नैचुरल गैस की कीमत पिछले दिसंबर से अब तक दोगुनी से भी ज्यादा हो गई है।
लोगों का जीवन स्तर गिरेगा: पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने से कंपनियों की लागत बढ़ेगी और वे अपने प्रोडक्ट्स के दाम बढ़ाने पर मजबूर हो जाएंगी। इसे काबू में करने के लिए सेंट्रल बैंकों को फिर से ब्याज दरें बढ़ानी पड़ेंगी, जिससे आम लोगों की जिंदगी और मुश्किल हो जाएगी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यूरोप में इटली और ब्रिटेन जैसे देश, जो गैस और बिजली पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं, उन्हें बड़े संकट का सामना करना पड़ेगा। वहीं, फ्रांस और स्पेन जैसे देश परमाणु ऊर्जा का इस्तेमाल करने की वजह से कुछ हद तक सुरक्षित हैं।
ट्रंप बातचीत को तैयार, लेकिन शर्तें कड़ीं
उधर, ऐसी भी खबरें हैं कि डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ फिर से बातचीत करने में दिलचस्पी दिखाई है। लेकिन बातचीत से पहले उन्होंने दो कड़ी शर्तें रखी हैं:
1. होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह से खोल दिया जाए।
2. बातचीत के लिए आने वाली ईरानी टीम को इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) का पूरा समर्थन हासिल हो और उन्हें अपने दम पर फैसला लेने का अधिकार हो।
इन शर्तों के पीछे यह चिंता है कि ईरान में राजनीतिक नेतृत्व और सेना के बीच मतभेद समझौते में रुकावट बन सकते हैं। संकेत मिल रहे हैं कि ईरान की सरकार भी यह समझने लगी है कि अपनी डूबती अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए बातचीत का रास्ता अपनाना जरूरी है।
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