
नई दिल्ली: सीमाई विवाद और कूटनीतिक तनातनी के बीच भारत ने अपने पड़ोसी देश चीन की नापाक चालबाज़ियों का मुंहतोड़ जवाब दिया है। अरुणाचल प्रदेश के विभिन्न इलाकों और गांवों के नाम बदलकर अपने नक्शे में दिखाने की बीजिंग की आदत पर नई दिल्ली ने कड़ा प्रहार किया है। भारत सरकार ने शुक्रवार को आधिकारिक भारतीय मानचित्र (सर्वे ऑफ इंडिया मैप) पर अरुणाचल प्रदेश की 27 रणनीतिक जगहों और खासियतों को उनके मूल एवं ऐतिहासिक भारतीय नामों के साथ औपचारिक रूप से दर्ज कर दिया है।
चीन पिछले कई वर्षों से अरुणाचल प्रदेश (जिसे वह दक्षिण तिब्बत या 'ज़ंगनान' कहता है) की जगहों के मनगढ़ंत नाम जारी कर रहा था। चीनी नागरिक मामलों के मंत्रालय ने 2017 से लेकर 2023 के बीच किस्तों में दर्जनों जगहों की सूची जारी कर अपने दावे ठोकने की कोशिश की थी।
भारत सरकार ने बीजिंग की इस हरकत को हमेशा "बेकार, बेतुका और बेबुनियाद" बताकर खारिज किया है। एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि 'सर्वे ऑफ इंडिया' के आधिकारिक नक्शे पर इन 27 जगहों को स्पष्ट रूप से चिह्नित करने का मुख्य उद्देश्य इनकी सही पहचान कायम करना और आम जनता व अंतरराष्ट्रीय समुदाय के बीच ऐतिहासिक सच्चाई को उजागर करना है।
इस सूची में लोंग जू का नाम खास तौर पर महत्वपूर्ण है। यह इलाका लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) के करीब स्थित है और 1959 में भारतीय तथा चीनी सैनिकों के बीच शुरुआती टकराव के प्रमुख केंद्रों में शामिल रहा था। अपर सुबनसिरी जिले में लोंग जू के पास स्थित माजा गांव को भी आधिकारिक मैप पर चिह्नित किया गया है। इसके अलावा बिसा गांव और कई रणनीतिक पहाड़ी दर्रों को भी इसमें जगह दी गई है।
भारत के आधिकारिक मैप पर चिह्नित स्थानों में थाग ला भी शामिल है। यह इलाका भारत-चीन सीमा विवाद के इतिहास में बेहद अहम रहा है। वर्ष 1962 के भारत-चीन युद्ध के शुरुआती संघर्षों में से एक इसी क्षेत्र से जुड़ा था। इसके साथ ही द्ज़ो ला, रिज़ा ला और पुकुर ला जैसे रणनीतिक पहाड़ी दर्रों को भी सूची में शामिल किया गया है। ऐसे स्थान सीमा की भौगोलिक और सामरिक स्थिति के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
सूची में चांगलांग जिले का जयरामपुर भी शामिल है। इसे पूर्वी सीमावर्ती क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक्स हब माना जाता है। यह पूर्वी अरुणाचल और म्यांमार सीमा की दिशा में सुरक्षा बलों की आवाजाही के लिहाज से महत्वपूर्ण है। इसके अलावा जसवंत गढ़ को भी आधिकारिक रूप से चिह्नित किया गया है। यहां भारतीय सैनिक जसवंत सिंह रावत की स्मृति में स्मारक है। 1962 के युद्ध से जुड़े इस स्थान का सैन्य और ऐतिहासिक महत्व है।
China can rename places. It cannot rewrite history or reality. 🇮🇳
India has officially mapped 27 locations in Arunachal Pradesh with standard Indian names—a firm response to Beijing’s continuing “map war.”
Some of these names carry enormous historical and military significance:… pic.twitter.com/aCnqdFS95O— Maj Rakesh, Shaurya Chakra,(Kargil War Veteran) (@gorockgo_100) August 8, 2026
अरुणाचल प्रदेश के स्थानों के नाम बदलने की चीन की कोशिश कोई नई बात नहीं है। चीन के नागरिक मामलों के मंत्रालय ने 2017 में छह स्थानों के कथित मानकीकृत नामों की पहली सूची जारी की थी। इसके बाद 2021 में 15 स्थानों की दूसरी सूची और 2023 में 11 स्थानों के नामों वाली एक और सूची सामने आई। चीन अरुणाचल प्रदेश के लिए 'ज़ंगनान' नाम का इस्तेमाल करता है। भारत ने चीन के इन दावों और नाम बदलने की कवायद को लगातार खारिज किया है।
🚨India formally identifies 27 locations and geographical features in Arunachal Pradesh on the official maps of the Survey of India a move that comes amid repeated attempts by China to rename places in the border state. pic.twitter.com/25QnVipGqQ
— Indian Infra Report (@Indianinfoguide) August 7, 2026
चीन की नाम बदलने की बेतुकी कोशिशों को ध्वस्त करते हुए भारत ने अपने राष्ट्रीय नायकों की स्मृति स्थलों और प्राचीन धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान वाले स्थानों को भी मजबूती से दर्शाया है:
विदेश मंत्रालय और सरकार ने चीन को दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि काल्पनिक नाम गढ़ने या झूठे दावे करने से यह "अटल सच्चाई" कभी नहीं बदलेगी कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अटूट और अभिन्न अंग है। अधिकारियों का कहना है कि चीन के इस तरह के उकसावे वाले कदमों से दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने की कोशिशों को भारी नुकसान पहुंचता है। भारत द्वारा 27 जगहों को आधिकारिक मैप पर उनके असली नामों से अंकित करना कूटनीतिक और रणनीतिक दोनों मोर्चों पर चीन के खिलाफ एक मजबूत और निर्णायक कदम है।
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