
नई दिल्ली: यूरोपीय संघ और भारत के बीच मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप दिए जाने के बाद पाकिस्तान में खलबली मच गई है। इस डील की वजह से पाकिस्तान के कपड़ा और परिधान क्षेत्र को भारी नुकसान होने का डर है, जिससे करीब 1 करोड़ नौकरियों पर संकट आ सकता है। पाकिस्तान के कपड़ा, परिधान समेत कई उत्पादों के लिए यूरोपीय संघ दूसरा सबसे बड़ा बाज़ार है। ऐसे में, भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुई इस 'मदर ऑफ ऑल डील्स' ने पाकिस्तानी निर्यातकों की नींद उड़ा दी है। इसके तुरंत बाद, अब पाकिस्तान सरकार ने इस समझौते के असर की समीक्षा करने का फैसला किया है। साथ ही, यूरोपीय संघ के साथ बातचीत भी शुरू कर दी है, ऐसा पाक विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने कहा है।
मुक्त व्यापार समझौते की वजह से भारतीय निर्यातकों को बिना टैक्स के यूरोप में अपने उत्पाद बेचने का मौका मिलेगा। इससे अब तक यूरोप के साथ GSP+ (जनरलाइज्ड स्कीम ऑफ प्रेफरेंसेज प्लस) कार्यक्रम के तहत पाकिस्तान को मिल रहे टैक्स के फायदे बेअसर हो जाएंगे।
GSP+ के तहत पाकिस्तान के 80% उत्पाद, खासकर कपड़ा और परिधान, बिना किसी शुल्क के यूरोपीय बाज़ार में जाते थे। इसका फायदा उठाकर पाकिस्तान 5.70 लाख करोड़ रुपये के कपड़े और परिधान निर्यात कर रहा है। वहीं, भारत 12% टैक्स के बावजूद 5 लाख करोड़ रुपये के कपड़े और टेक्सटाइल का निर्यात कर रहा है। अगर भारत को टैक्स में छूट मिलती है, तो पाकिस्तान के कपड़ा और परिधान निर्यात पर भारी चोट लगना तय माना जा रहा है।
बढ़ती प्रतिस्पर्धा के साथ-साथ उत्पादन लागत भी पाकिस्तान के लिए एक समस्या बनी हुई है। भारत की तुलना में पाकिस्तान में बिजली की दरें 25% से 30% तक ज़्यादा हैं। इसलिए, भारत-ईयू समझौते की वजह से पाकिस्तान में 1 करोड़ नौकरियों पर खतरा मंडरा रहा है।
खलबली
- 5 लाख करोड़ का बिजनेस, 10 लाख नौकरियों पर खतरा?
- समझौते की समीक्षा करने का पाकिस्तान का फैसला
अब तक ज़ीरो टैक्स पर पाक से EU को सालाना ₹5.7 लाख करोड़ के कपड़े का निर्यात
12% टैक्स के बावजूद यूरोप को भारत से 5 लाख करोड़ के कपड़े का निर्यात
अब भारतीय उत्पाद पर टैरिफ घटने के बाद भारत के उत्पाद सस्ते होंगे और निर्यात बढ़ेगा
इससे इस पर निर्भर पाक के 10 लाख लोगों में चिंता, निर्यात में गिरावट का डर
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