
Integral Coach Factory: भारत ने रेलवे के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा के जींद रेलवे स्टेशन से देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। इसके साथ ही भारत जर्मनी, जापान, चीन और अमेरिका के बाद हाइड्रोजन ट्रेन चलाने वाला दुनिया का पांचवां देश बन गया। लेकिन इस उपलब्धि के पीछे जिस फैक्ट्री की सबसे बड़ी भूमिका है, वह है चेन्नई के पेरम्बूर स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF)। यही वह उत्पादन इकाई है जिसने भारत को पारंपरिक रेल डिब्बों से लेकर वंदे भारत और अब हाइड्रोजन ट्रेन तक पहुंचाया।
इंटीग्रल कोच फैक्ट्री की स्थापना आजादी के बाद रेलवे को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से की गई थी। यहां उत्पादन की शुरुआत 1955 में हुई और पहला रेल कोच 2 अक्टूबर 1955 को फैक्ट्री से बाहर निकला। शुरुआती दौर में यहां पारंपरिक ICF कोच बनाए गए, जो दशकों तक भारतीय ट्रेनों की पहचान रहे।
समय के साथ फैक्ट्री ने तकनीक को अपनाया और एलएचबी कोच, ईएमयू, डीएमयू, मेमू ट्रेनें तथा मेट्रो कोच का निर्माण भी शुरू किया। आज यहां तैयार होने वाले कोच देश के विभिन्न रेलवे जोनों के साथ कई विदेशी देशों तक भी पहुंच चुके हैं। नेपाल, श्रीलंका, बांग्लादेश, तंजानिया और युगांडा जैसे देशों को भी यहां निर्मित रेल कोच निर्यात किए जा चुके हैं।
1. Integral Coach Factory (ICF)
📍Chennai, Tamil Nadu
🔹India's original Vande Bharat manufacturing unit.
📢Latest Products:
🔹Vande Bharat Chair Car (8, 16 & 20-coach variants)
🔹Vande Bharat Sleeper (24-coach prototype)
🔺Operational since 2018 pic.twitter.com/xoaWgWvyqS— Plus Point | India (@PlusPointIndia) July 15, 2026
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ICF को नई पहचान तब मिली, जब भारत की पहली सेमी हाई-स्पीड वंदे भारत एक्सप्रेस यहीं तैयार की गई। अब इसी फैक्ट्री ने देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का निर्माण कर एक और उपलब्धि अपने नाम कर ली है।
हाइड्रोजन ट्रेन में फ्यूल सेल तकनीक का उपयोग किया गया है, जिसमें हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की मदद से बिजली तैयार होती है। इस प्रक्रिया में कार्बन उत्सर्जन लगभग नहीं के बराबर होता है और मुख्य रूप से जलवाष्प निकलती है। ट्रेन में हाइड्रोजन स्टोरेज, बैटरी सिस्टम और रिसाव, धुआं व तापमान की निगरानी के लिए आधुनिक सुरक्षा सेंसर भी लगाए गए हैं। इसे भारतीय रेलवे के हरित परिवहन अभियान का अहम कदम माना जा रहा है।
India's first hydrogen-powered train is inaugurated today! A big step forward in green technology and sustainable transport.🇮🇳 Excited to see how this shapes the future of railways.
Total Distance: 89 km one way.
Daily Frequency: Two round trips (covering a total of 356 km… pic.twitter.com/UWksv5VmZ0— Prashant Gopinath Menon (@PrasantGopinat) July 17, 2026
करीब 71 वर्षों में ICF केवल एक रेल कोच फैक्ट्री नहीं रही, बल्कि भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण का केंद्र बन चुकी है। यहां हर कोच कई चरणों की गुणवत्ता जांच से गुजरता है, जिसमें ढांचा तैयार करने से लेकर सीटें, एसी, वायरिंग, ब्रेक और सुरक्षा उपकरणों की टेस्टिंग शामिल होती है।
आज जब भारत आत्मनिर्भर रेल तकनीक की ओर तेजी से बढ़ रहा है, तब ICF की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है। पारंपरिक कोच से लेकर वंदे भारत और अब हाइड्रोजन ट्रेन तक का सफर इस बात का प्रमाण है कि भारत अब केवल रेल डिब्बे नहीं, बल्कि विश्वस्तरीय आधुनिक ट्रेनें भी अपने दम पर तैयार कर रहा है।
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