यहीं बनी भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन, 71 साल से रेलवे का भविष्य बदल रही है यह फैक्ट्री

Published : Jul 17, 2026, 06:36 PM IST
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सार

India First Hydrogen Train: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। जानिए चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) ने कैसे 71 वर्षों में पारंपरिक रेल डिब्बों से लेकर वंदे भारत और अब हाइड्रोजन ट्रेन तक का सफर तय किया।

Integral Coach Factory: भारत ने रेलवे के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा के जींद रेलवे स्टेशन से देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। इसके साथ ही भारत जर्मनी, जापान, चीन और अमेरिका के बाद हाइड्रोजन ट्रेन चलाने वाला दुनिया का पांचवां देश बन गया। लेकिन इस उपलब्धि के पीछे जिस फैक्ट्री की सबसे बड़ी भूमिका है, वह है चेन्नई के पेरम्बूर स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF)। यही वह उत्पादन इकाई है जिसने भारत को पारंपरिक रेल डिब्बों से लेकर वंदे भारत और अब हाइड्रोजन ट्रेन तक पहुंचाया।

1955 से शुरू हुआ सफर, आज आधुनिक ट्रेनों का सबसे बड़ा केंद्र

इंटीग्रल कोच फैक्ट्री की स्थापना आजादी के बाद रेलवे को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से की गई थी। यहां उत्पादन की शुरुआत 1955 में हुई और पहला रेल कोच 2 अक्टूबर 1955 को फैक्ट्री से बाहर निकला। शुरुआती दौर में यहां पारंपरिक ICF कोच बनाए गए, जो दशकों तक भारतीय ट्रेनों की पहचान रहे।

समय के साथ फैक्ट्री ने तकनीक को अपनाया और एलएचबी कोच, ईएमयू, डीएमयू, मेमू ट्रेनें तथा मेट्रो कोच का निर्माण भी शुरू किया। आज यहां तैयार होने वाले कोच देश के विभिन्न रेलवे जोनों के साथ कई विदेशी देशों तक भी पहुंच चुके हैं। नेपाल, श्रीलंका, बांग्लादेश, तंजानिया और युगांडा जैसे देशों को भी यहां निर्मित रेल कोच निर्यात किए जा चुके हैं।

 

 

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वंदे भारत के बाद अब हाइड्रोजन ट्रेन ने दिलाई नई पहचान

ICF को नई पहचान तब मिली, जब भारत की पहली सेमी हाई-स्पीड वंदे भारत एक्सप्रेस यहीं तैयार की गई। अब इसी फैक्ट्री ने देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का निर्माण कर एक और उपलब्धि अपने नाम कर ली है।

हाइड्रोजन ट्रेन में फ्यूल सेल तकनीक का उपयोग किया गया है, जिसमें हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की मदद से बिजली तैयार होती है। इस प्रक्रिया में कार्बन उत्सर्जन लगभग नहीं के बराबर होता है और मुख्य रूप से जलवाष्प निकलती है। ट्रेन में हाइड्रोजन स्टोरेज, बैटरी सिस्टम और रिसाव, धुआं व तापमान की निगरानी के लिए आधुनिक सुरक्षा सेंसर भी लगाए गए हैं। इसे भारतीय रेलवे के हरित परिवहन अभियान का अहम कदम माना जा रहा है।

 

 

क्यों खास है चेन्नई की यह फैक्ट्री?

करीब 71 वर्षों में ICF केवल एक रेल कोच फैक्ट्री नहीं रही, बल्कि भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण का केंद्र बन चुकी है। यहां हर कोच कई चरणों की गुणवत्ता जांच से गुजरता है, जिसमें ढांचा तैयार करने से लेकर सीटें, एसी, वायरिंग, ब्रेक और सुरक्षा उपकरणों की टेस्टिंग शामिल होती है।

आज जब भारत आत्मनिर्भर रेल तकनीक की ओर तेजी से बढ़ रहा है, तब ICF की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है। पारंपरिक कोच से लेकर वंदे भारत और अब हाइड्रोजन ट्रेन तक का सफर इस बात का प्रमाण है कि भारत अब केवल रेल डिब्बे नहीं, बल्कि विश्वस्तरीय आधुनिक ट्रेनें भी अपने दम पर तैयार कर रहा है।

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