
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने अपना रुख साफ कर दिया है। बुधवार को हुई सर्वदलीय बैठक में सबसे ज्यादा चर्चा जिस बयान की रही, वह था विदेश मंत्री एस. जयशंकर का यह दो टूक संदेश, “भारत कोई दलाल देश नहीं है।”
यह बयान सिर्फ एक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि भारत की बदलती कूटनीतिक सोच का संकेत माना जा रहा है। ऐसे समय में जब दुनिया के बड़े देश तीसरे देशों के जरिए बातचीत कराने की कोशिश करते हैं, भारत ने साफ कर दिया कि वह अपनी विदेश नीति खुद तय करता है।
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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई इस अहम बैठक में सरकार और विपक्ष आमने-सामने थे, लेकिन मुद्दा एक ही था, पश्चिम एशिया का संकट और भारत की रणनीति। जब विपक्ष की ओर से पाकिस्तान की संभावित मध्यस्थता को लेकर सवाल पूछा गया, तब एस. जयशंकर ने बिना किसी कूटनीतिक घुमाव के स्पष्ट जवाब दिया, भारत किसी तीसरे देश के जरिए बातचीत कराने में विश्वास नहीं करता।
उन्होंने यह भी कहा कि “हम क्यों करें मध्यस्थता? भारत खुद सक्षम है और अपनी स्थिति को लेकर स्पष्ट है।” यह बयान सीधे तौर पर पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठाने के साथ-साथ भारत की आत्मनिर्भर कूटनीति को दर्शाता है।
बैठक में जयशंकर ने यह भी कहा कि अमेरिका लंबे समय से पाकिस्तान को मध्यस्थता के तौर पर इस्तेमाल करता रहा है, लेकिन भारत उस रास्ते पर नहीं चलता। यह बयान इस बात का संकेत है कि भारत अब किसी भी अंतरराष्ट्रीय मुद्दे पर अपनी स्वतंत्र पहचान बनाए रखना चाहता है, न कि किसी और देश के जरिए बातचीत करना।
इस बैठक में समाजवादी पार्टी के नेता धर्मेंद्र यादव और कांग्रेस के मुकुल वासनिक समेत कई नेताओं ने सरकार से तीखे सवाल पूछे। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने ईरान के राष्ट्रपति की हत्या पर भारत की प्रतिक्रिया में देरी को लेकर सवाल उठाया। साथ ही उन्होंने यह भी पूछा कि क्या भारत ने ईरानी जहाजों को अपने पोर्ट पर जगह देने से मना किया था। सरकार की ओर से जवाब दिया गया कि शोक संदेश में देरी ईरान की एंबेसी के देर से खुलने की वजह से हुई।
बैठक में ऊर्जा सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा रहा। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भरोसा दिलाया कि देश में तेल और गैस की कोई कमी नहीं होगी।
सरकार ने बताया कि:
यानी आम लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है।
विदेश सचिव के मुताबिक, मौजूदा हालात में भारत की स्थिति मजबूत है। एक तरफ जहां दुनिया के कई देश संघर्ष में उलझे हैं, वहीं भारत संतुलित और व्यावहारिक नीति के साथ आगे बढ़ रहा है। करीब 4,25,000 लोगों को सुरक्षित निकालना भी इसी रणनीति का हिस्सा बताया गया।
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