
लखनऊ। भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुई आर्थिक साझेदारी और अमेरिकी टैरिफ में की गई बड़ी कटौती ने उत्तर प्रदेश की औद्योगिक और आर्थिक संभावनाओं को नई दिशा दी है। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों और आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर लागू टैरिफ को पहले के लगभग 50 प्रतिशत स्तर से घटाकर औसतन 18 प्रतिशत कर दिया है। इसे भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में एक निर्णायक मोड़ माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस फैसले को भारत की बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था की बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि यह समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृढ़ और निर्णायक नेतृत्व का परिणाम है, जहां भारत ने अपनी नीतियों पर अडिग रहते हुए वैश्विक शक्तियों से समानता के आधार पर संवाद किया।
फार्मा कॉन्क्लेव में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 2014 से पहले भारत को वैश्विक मंच पर गंभीरता से नहीं लिया जाता था, लेकिन आज भारत अपनी नीतियों पर मजबूती से खड़ा है। अब भारत अपनी शर्तों पर संवाद और सहयोग कर रहा है। अमेरिकी टैरिफ में की गई कटौती इसी बदले हुए वैश्विक दृष्टिकोण का प्रमाण है। विशेषज्ञों के अनुसार, अब भारतीय निर्यातकों पर लगने वाला अतिरिक्त ‘पेनल्टी टैरिफ’ समाप्त हो गया है और केवल रेसिप्रोकल टैक्स स्ट्रक्चर लागू है, जिससे भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में पहले से अधिक प्रतिस्पर्धी बन गए हैं।
टैरिफ में कटौती का सबसे सीधा और व्यापक लाभ उत्तर प्रदेश के एमएसएमई और ओडीओपी सेक्टर को मिलने जा रहा है। भदोही के हस्तनिर्मित कालीन, मुरादाबाद के पीतल और धातु उत्पाद, आगरा का चमड़ा उद्योग, वाराणसी की रेशमी साड़ियां और कन्नौज का पारंपरिक इत्र अब अमेरिकी बाजार में कम लागत और बेहतर मार्जिन के साथ पहुंच सकेंगे। अब तक ऊंचे आयात शुल्क के कारण ये उत्पाद चीन, वियतनाम और बांग्लादेश जैसे देशों से कीमत में पिछड़ जाते थे, लेकिन शुल्क में कमी के बाद यूपी के पारंपरिक उद्योग वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूती से खड़े हो सकेंगे।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि टैरिफ कटौती से निर्यात ऑर्डर बढ़ेंगे और डायरेक्ट एक्सपोर्ट को बढ़ावा मिलेगा। इससे बिचौलियों पर निर्भरता घटेगी और कारीगरों को उनकी मेहनत का सही मूल्य मिलेगा। उत्पादन बढ़ने से बुनकरों, शिल्पकारों, कारीगरों और छोटे उद्योगों में काम करने वाले लाखों लोगों को नियमित रोजगार मिलेगा। इसके साथ ही नई उत्पादन इकाइयों की स्थापना से स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी।
भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में आई मजबूती का असर रणनीतिक क्षेत्रों तक भी दिखने लगा है। विशेषज्ञों के अनुसार, व्यापार और निवेश में भरोसा बढ़ने से रक्षा और उन्नत तकनीक जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में सहयोग स्वाभाविक रूप से आगे बढ़ता है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश के डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर को भी बड़ा लाभ मिलने की संभावना है। झांसी, कानपुर, लखनऊ, अलीगढ़ और आगरा जैसे नोड्स अब केवल असेंबली यूनिट्स तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि यहां टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, संयुक्त उपक्रम और अनुसंधान आधारित उन्नत रक्षा उत्पादन की संभावनाएं बन रही हैं।
जानकारों का कहना है कि अमेरिकी रक्षा कंपनियों के सहयोग से ड्रोन सिस्टम, रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स, रडार और संचार उपकरणों का निर्माण प्रदेश में ही संभव हो सकता है। इससे आयात पर निर्भरता घटेगी और यूपी की भूमिका राष्ट्रीय रक्षा उत्पादन में और मजबूत होगी। इसका सबसे बड़ा लाभ प्रदेश के युवाओं को मिलेगा। इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स और एयरोस्पेस जैसे क्षेत्रों में उच्च कौशल आधारित रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। साथ ही एमएसएमई सेक्टर को भी रक्षा आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ने का मौका मिलेगा।
टैरिफ कटौती का असर केवल पारंपरिक उद्योगों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका विस्तार आईटी और डिजिटल अर्थव्यवस्था तक हो रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, व्यापार बाधाएं कम होने और नीतिगत स्थिरता मिलने से वैश्विक टेक कंपनियों के लिए निवेश करना आसान हो गया है। इससे उत्तर प्रदेश की जीसीसी नीति-2024 को नई मजबूती मिल रही है। नोएडा और लखनऊ में विकसित हो रहा आईटी, एआई और डेटा सेंटर इकोसिस्टम अब अमेरिकी और वैश्विक कंपनियों के लिए अधिक आकर्षक बन रहा है।
टैरिफ कटौती से आईटी हार्डवेयर, सर्वर और नेटवर्किंग उपकरणों की लागत में संभावित कमी आएगी, जिससे डेटा सेंटर परियोजनाएं अधिक व्यवहारिक होंगी। जानकारों का मानना है कि नोएडा, ग्रेटर नोएडा और लखनऊ आने वाले वर्षों में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCC) के प्रमुख हब बन सकते हैं। यहां क्लाउड कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्योरिटी, फिनटेक और एनालिटिक्स जैसे क्षेत्रों में उच्चस्तरीय कार्य होंगे, जिससे युवाओं को वैश्विक स्तर के रोजगार मिलेंगे।
टैरिफ में कटौती का सबसे संरचनात्मक लाभ फार्मा और मेडिकल डिवाइस सेक्टर को मिलने की संभावना है। अमेरिकी बाजार में आयात शुल्क कम होने से भारतीय दवाएं और मेडिकल उपकरण अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे। ललितपुर में प्रस्तावित बल्क ड्रग पार्क अब वैश्विक सप्लाई चेन के लिहाज से और आकर्षक बन गया है। इससे एपीआई और इंटरमीडिएट्स का उत्पादन यूपी में बढ़ेगा और आयात पर निर्भरता घटेगी।
ग्रीन एनर्जी सेक्टर, खासकर बुंदेलखंड के सोलर पार्क और ग्रीन हाइड्रोजन परियोजनाओं के लिए भी टैरिफ में राहत सकारात्मक संकेत है। सोलर पैनल, इलेक्ट्रोलाइजर और स्वच्छ ऊर्जा उपकरणों से जुड़े व्यापार में बाधाएं कम होने से तकनीक हस्तांतरण और विदेशी निवेश को गति मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी कंपनियों की भागीदारी से उत्तर प्रदेश स्वच्छ ऊर्जा और ऊर्जा आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बन सकता है।
Asianet News Hindi पर पढ़ें देशभर की सबसे ताज़ा National News in Hindi, जो हम खास तौर पर आपके लिए चुनकर लाते हैं। दुनिया की हलचल, अंतरराष्ट्रीय घटनाएं और बड़े अपडेट — सब कुछ साफ, संक्षिप्त और भरोसेमंद रूप में पाएं हमारी World News in Hindi कवरेज में। अपने राज्य से जुड़ी खबरें, प्रशासनिक फैसले और स्थानीय बदलाव जानने के लिए देखें State News in Hindi, बिल्कुल आपके आसपास की भाषा में। उत्तर प्रदेश से राजनीति से लेकर जिलों के जमीनी मुद्दों तक — हर ज़रूरी जानकारी मिलती है यहां, हमारे UP News सेक्शन में। और Bihar News में पाएं बिहार की असली आवाज — गांव-कस्बों से लेकर पटना तक की ताज़ा रिपोर्ट, कहानी और अपडेट के साथ, सिर्फ Asianet News Hindi पर।