
Indonesia Hindu Culture: सोमवार, 6 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीसरी बार इंडोनेशिया पहुंचे। पीएम मोदी का विमान वहां की सीमा में पहुंचते ही, इंडोनेशिया के लड़ाकू विमानों (Fighter Jets) ने उन्हें हवा में ही चारों तरफ से घेरकर शानदार और शाही स्वागत किया। एयरपोर्ट पर खुद राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो रिसीव करने पहुंचे। इस दौरे पर सबसे ज्यादा चर्चा करीब 2,500 करोड़ रुपए की ब्रह्मोस मिसाइल डील की उम्मीदों पर है, लेकिन इससे भी दिलचस्प बात 1200 साल पुराना भगवान शिव, विष्णु और ब्रह्मा का प्रम्बानन मंदिर है, जहां पीएम मोदी जाने वाले हैं। दुनिया के सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाले इस देश की संस्कृति, परंपराओं और इतिहास में भारतीय सभ्यता की झलक आज भी दिखाई देती है। मुस्लिम आबादी बहुमत में होने के बावजूद यहां रामायण, महाभारत, संस्कृत और हिंदू-बौद्ध परंपराओं का असर नजर आता है। आइए जानते हैं ऐसे 5 रोचक फैक्ट्स, जो इस देश को बाकी देशों से अलग बनाते हैं...
इंडोनेशिया के 20 हजार रुपिया के नोट पर एक वक्त भगवान गणेश जी की तस्वीर छपती थी। वहां गणेश जी को पढ़ाई-लिखाई और बुद्धि का देवता माना जाता है, इसलिए उन्हें नोट पर जगह दी गई। 85% से ज्यादा आबादी मुस्लिम होने के बावजूद, वहां भगवान गणेश की नोट पर तस्वीर काफी दिलचस्प है।
राजधानी जकार्ता के सबसे मशहूर इलाकों में से एक जगह महाभारत के अर्जुन और श्रीकृष्ण के रथ की 85 फीट ऊंची एक मूर्ति लगी है। ये मूर्ति यहां किसी टूरिस्ट अट्रैक्शन के लिए नहीं, बल्कि इंडोनेशिया की अपनी पहचान की निशानी के तौर पर लगाई गई है।
बाली और जावा जैसे इलाकों में आज भी रामायण और महाभारत पर आधारित नाच-गाने वाले कार्यक्रम होते हैं। इन्हें देखने हर साल हजारों देसी-विदेशी पर्यटक पहुंचते हैं। यानी जो कहानियां भारत में घर-घर सुनाई जाती हैं, वही कहानियां वहां स्टेज पर जिंदा हैं।
इंडोनेशिया की सरकारी एयरलाइन का नाम 'गरुड़ इंडोनेशिया' है। गरुड़ को हिंदू धर्म में भगवान विष्णु का वाहन माना जाता है। एक इस्लामिक देश की राष्ट्रीय एयरलाइन का नाम हिंदू पौराणिक कथा से लिया जाना, अपने आप में बड़ी बात है।
इंडोनेशिया की नौसेना का आधिकारिक आदर्श वाक्य 'जलेष्वेव जयामहे' भी संस्कृत भाषा में है। इतना ही नहीं, देश का राष्ट्रीय नारा भी एक पुरानी जावानी किताब से लिया गया है, जिसमें संस्कृत के कई शब्द शामिल हैं। यानी रोजमर्रा की जिंदगी से लेकर सरकारी दस्तावेजों तक, भारतीय भाषा की छाप हर जगह मौजूद है।
भारत के अंडमान-निकोबार द्वीप समूह और इंडोनेशिया के बीच समुद्री दूरी सिर्फ करीब 160 किलोमीटर है। यानी दोनों देश जितने सांस्कृतिक रूप से करीब हैं, उतने ही भौगोलिक रूप से भी करीब हैं। करीब 2000 साल पहले भारतीय व्यापारी समुद्र के रास्ते मसालों का कारोबार करने इंडोनेशिया पहुंचे थे। उनके साथ-साथ हिंदू और बौद्ध धर्म भी वहां पहुंच गया। खास बात ये है कि भारत ने कभी इंडोनेशिया पर राज नहीं किया, फिर भी वहां के राजाओं ने खुद अपनी मर्जी से हिंदू-बौद्ध परंपराएं अपना लीं। बाद में सदियों बीतने के साथ यहां इस्लाम धर्म आया और आज बहुसंख्यक आबादी मुस्लिम है, लेकिन पुरानी संस्कृति और परंपराएं कभी पीछे नहीं छूटीं। यही वजह है कि आज भी 1950 में भारत के पहले गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि इंडोनेशिया के तत्कालीन राष्ट्रपति सुकर्णो थे, और आज पीएम मोदी उसी देश के सबसे बड़े हिंदू मंदिर में जाकर इस पुरानी दोस्ती को फिर से मजबूत कर रहे हैं।
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