हुगली की लहरों पर 500 नावें और रेड रोड: कोलकाता में योग दिवस पर PM मोदी रचने जा रहे ये बड़ा इतिहास!

Published : Jun 21, 2026, 06:51 AM IST
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सार

क्या कोलकाता के रेड रोड पर 35 हजार लोगों के साथ पीएम मोदी का योग सत्र नया रिकॉर्ड बनाएगा? हुगली नदी में 500 नावों पर एक साथ योग... आखिर इस अनोखे आयोजन की तैयारी कितनी विशाल है? 190+ देशों में योग का विस्तार, क्या योग अब दुनिया का सबसे बड़ा हेल्थ मूवमेंट बन चुका है? जानिए पूरी कहानी।

International Yoga Day 2026: इस बार 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर कुछ ऐसा होने जा रहा है जो इतिहास के पन्नों में दर्ज हो जाएगा। पश्चिम बंगाल की सांस्कृतिक राजधानी कोलकाता इस भव्य आयोजन के लिए पूरी तरह सज चुकी है। शहर के ऐतिहासिक 'रेड रोड' पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एक-दो नहीं, बल्कि पूरे 35 हजार लोग एक साथ योग की विभिन्न मुद्राओं में नजर आएंगे। लेकिन इस बार का सबसे बड़ा सस्पेंस और आकर्षण छिपा है हुगली नदी की लहरों पर। जब आसमान में सूरज की पहली किरण बिखरेगी, ठीक उसी समय हुगली नदी के पानी पर 500 से ज्यादा नावें एक कतार में तैरती दिखेंगी, जिन पर सवार होकर लोग योग करेंगे। नदी की शांत लहरों के बीच योग का यह नजारा दुनिया ने पहले कभी नहीं देखा है। सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी इस बार 2500 से अधिक जगहों पर योग के मेगा इवेंट्स आयोजित किए जा रहे हैं, जिसने दुनिया की धड़कनों को बढ़ा दिया है।

 

 

क्यों खास है इस बार का योग दिवस?

इस वर्ष योग दिवस की थीम "Yoga for Healthy Ageing" (स्वस्थ उम्र बढ़ने के लिए योग) रखी गई है। बढ़ती उम्र के साथ शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की चुनौतियों को देखते हुए यह संदेश दिया जा रहा है कि योग केवल फिटनेस का साधन नहीं, बल्कि जीवनभर स्वस्थ और सक्रिय रहने का मार्ग भी है। विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित योग न केवल शरीर की लचक और संतुलन बनाए रखता है, बल्कि तनाव, अनिद्रा और मानसिक दबाव जैसी समस्याओं से भी राहत देता है।

 

 

"Yoga for Healthy Ageing": इस साल की थीम के पीछे क्या छिपा है राज?

हर साल योग दिवस की एक खास थीम होती है, लेकिन इस बार की थीम-"Yoga for Healthy Ageing" (स्वस्थ उम्र बढ़ने के लिए योग)—सीधे हमारे भविष्य और जीवन की गुणवत्ता से जुड़ी है। आखिर इस थीम को चुनने के पीछे क्या सोची-समझी रणनीति है? अक्सर लोग योग को सिर्फ युवाओं की फिटनेस या वजन घटाने का जरिया मानते हैं, लेकिन इस बार का संदेश बेहद गहरा है। मेडिकल साइंस और योगिक परंपरा दोनों का मानना है कि उम्र बढ़ने के साथ शरीर और मस्तिष्क में आने वाले बदलावों को योग के जरिए न सिर्फ धीमा किया जा सकता है, बल्कि बुढ़ापे को भी ऊर्जावान बनाया जा सकता है। यह थीम दुनिया को यह बताने के लिए चुनी गई है कि योग केवल शारीरिक कसरत नहीं, बल्कि उम्र के हर पड़ाव पर मानसिक शांति और दीर्घायु पाने का एक अचूक विज्ञान है।

 

 

21 जून का रहस्य: भगवान शिव और ब्रह्मांड का वो सबसे लंबा दिन

आखिर योग दिवस के लिए 21 जून की तारीख ही क्यों चुनी गई? इसके पीछे एक गहरा खगोलीय और आध्यात्मिक रहस्य है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, 21 जून उत्तरी गोलार्ध में साल का सबसे लंबा दिन होता है, जिसे ग्रीष्म संक्रांति (Summer Solstice) कहा जाता है। इस दिन के बाद सूर्य दक्षिणायन होने लगता है। वहीं, अगर हम आध्यात्मिक इतिहास की परतों को खोलें, तो योगिक परंपरा के अनुसार, इसी खास दिन पर आदिगुरु यानी भगवान शिव ने अपनी समाधि तोड़ी थी और हिमालय की कंदराओं में सप्तऋषियों को योग का परम ज्ञान देना शुरू किया था। इसी वजह से 21 जून को योग के अवतरण और उसकी शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।

 

 

शून्य से शिखर तक: 12 साल पहले UN में रखी गई उस ऐतिहासिक नींव की कहानी

आज दुनिया के कोने-कोने में गूंजता 'योग' कभी केवल भारत की धरोहर था। इसे वैश्विक मंच पर स्थापित करने की कहानी किसी रोमांचक सफर से कम नहीं है। ठीक 12 साल पहले, 27 सितंबर 2014 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में अपने पहले ही भाषण में दुनिया के सामने अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने का प्रस्ताव रखा था। इसके बाद जो हुआ, उसने संयुक्त राष्ट्र के इतिहास के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। महज कुछ ही महीनों के भीतर, 11 दिसंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र ने रिकॉर्ड 177 देशों के भारी समर्थन के साथ इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। यह UN के इतिहास में किसी भी प्रस्ताव को मिला अब तक का सबसे बड़ा और सबसे तेज समर्थन था, जिसने भारत की सॉफ्ट पावर का लोहा पूरी दुनिया में मनवा दिया।

 

 

राजपथ से लेकर न्यूयॉर्क और श्रीनगर तक: 11 सालों के अनोखे वर्ल्ड रिकॉर्ड्स

पिछले 11 सालों में योग दिवस का सफर बेहद उतार-चढ़ाव भरा और रिकॉर्ड तोड़ने वाला रहा है। 21 जून 2015 को दिल्ली के राजपथ पर जब पहला योग दिवस मनाया गया, तो 35,985 लोगों और 84 देशों के प्रतिनिधियों ने एक साथ योग कर दो गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बना डाले थे।

इसके बाद यह कारवां आगे बढ़ता रहा:

  • 2017 (लखनऊ): भारी बारिश के बीच पीएम मोदी और 55 हजार लोगों ने भीगते हुए योग किया।
  • 2020-2021 (कोविड काल): जब पूरी दुनिया घरों में कैद थी, तब योग दिवस 'डिजिटल और वर्चुअल' मोड में बदला और करोड़ों लोगों को घरों में एक साथ लाया।
  • 2023 (न्यूयॉर्क): पहली बार भारत से बाहर, संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के लॉन में पीएम मोदी की अगुवाई में 135 देशों के लोगों ने एक साथ योग कर नया इतिहास रचा।
  • 2024 (श्रीनगर): डल झील के किनारे खराब मौसम के बावजूद शेर-ए-कश्मीर कन्वेंशन सेंटर के अंदर कश्मीरी वादियों में योग की गूंज सुनाई दी।
  • 2025 (विशाखापत्तनम): आंध्र प्रदेश के 28 किलोमीटर लंबे समुद्र तट पर 3.02 लाख लोगों ने एक साथ योग कर दुनिया को हैरान कर दिया।
  • और अब, 2026 में कोलकाता का यह 'नावों वाला योग' और रेड रोड का महा-समागम इस सफर में एक नया स्वर्णिम अध्याय जोड़ने के लिए पूरी तरह तैयार है।

 

 

दुनिया के 190 से ज्यादा देशों में योग का जादू

आज योग केवल भारत तक सीमित नहीं है। अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस, जापान, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका सहित 190 से अधिक देशों में योग दिवस मनाया जा रहा है। दुनियाभर में लगभग 2500 स्थानों पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। भारतीय दूतावासों, संयुक्त राष्ट्र कार्यालयों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों की भागीदारी ने इसे विश्व के सबसे बड़े स्वास्थ्य अभियानों में शामिल कर दिया है।

 

 

योग के ये 6 आसान आसन बदल सकते हैं आपकी दिनचर्या

योग विशेषज्ञों के अनुसार रोजाना कुछ मिनटों का अभ्यास भी बड़ा बदलाव ला सकता है।

  1. सूर्य नमस्कार-पूरे शरीर को सक्रिय बनाता है।
  2. ताड़ासन-शरीर का संतुलन और पोश्चर सुधारता है।
  3. वृक्षासन-एकाग्रता बढ़ाता है।
  4. भुजंगासन-रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाता है।
  5. प्राणायाम-तनाव कम कर फेफड़ों की क्षमता बढ़ाता है।
  6. ध्यान-मानसिक शांति और फोकस प्रदान करता है।

 

 

योग का असली संदेश: केवल व्यायाम नहीं, जीवन जीने की कला

कोलकाता के रेड रोड से लेकर न्यूयॉर्क, टोक्यो और लंदन तक आज एक ही संदेश गूंजेगा-योग शरीर को मजबूत बनाने का साधन भर नहीं, बल्कि मन, मस्तिष्क और आत्मा को संतुलित करने की जीवनशैली है। जब हजारों लोग एक साथ योगासन करेंगे और हुगली नदी की लहरों पर नावों में बैठे लोग ध्यान मुद्रा में दिखाई देंगे, तब यह दृश्य केवल एक आयोजन नहीं बल्कि भारत की उस सांस्कृतिक शक्ति का प्रदर्शन होगा जिसने सीमाओं और भाषाओं से ऊपर उठकर पूरी दुनिया को जोड़ दिया है। आज का योग दिवस इसी वैश्विक संदेश के साथ मनाया जा रहा है-स्वस्थ शरीर, शांत मन और संतुलित जीवन की ओर एक सामूहिक कदम।

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