
Why UAE Not Retaliating IRAN: ईरान पर इजरायल-अमेरिका के हमलों के बाद खाड़ी क्षेत्र में तनाव तेजी से बढ़ गया है। इस संघर्ष में सबसे ज्यादा नुकसान कहीं न कहीं संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को हुआ है। यहां तक कि ईरान ने यूएई पर कई बार ड्रोन और मिसाइलें भी दागीं, जिससे उसके इन्फ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान पहुंचा, बावजूद इसके आखिर ऐसी क्या मजबूरी है कि यूएई ने अब तक ईरान के हमलों पर पलटवार नहीं किया है।
ईरानी ड्रोन और मिसाइलों से जहां यूएई की बड़ी इमारतों को नुकसान पहुंचा है, वहीं यूएई को उन्हें रोकने के लिए महंगे मिसाइल इंटरसेप्टर सिस्टम का इस्तेमाल करना पड़ा। इन एक-एक इंटरसेप्टर की कीमत लाखों डॉलर में है। हालांकि, इसके बाद भी यूएई ने ईरान के खिलाफ कोई सीधा जवाबी हमला नहीं किया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, 28 फरवरी से शुरू हुई जंग के बाद से ईरान ने यूएई के सैन्य और नागरिक ठिकानों को निशाना बनाते हुए बड़ी संख्या में हमले किए हैं। इनमें 1600 से अधिक ड्रोन हमले, 300 से ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइलें और 15 क्रूज मिसाइल हमले बताए जा रहे हैं। इन हमलों को रोकने के लिए यूएई को सैकड़ों इंटरसेप्टर मिसाइलों का इस्तेमाल करना पड़ा, जिससे उसे अरबों डॉलर का नुकसान उठाना पड़ा है। इसके बावजूद कुछ ईरानी ड्रोन और मिसाइलें अपने टारगेट पर गिरीं, जिससे काफी नुकसान पहुंचा है।
ईरान के हमलों का असर सिर्फ सुरक्षा पर ही नहीं बल्कि यूएई की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा है। दुनिया के सबसे व्यस्त हवाई अड्डों में शामिल दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर कुछ समय के लिए उड़ानों को रोकना पड़ा। इससे यूएई की प्रमुख एयरलाइन एमिरेट्स एयरलाइंस को हर दिन लगभग 100 मिलियन डॉलर (920 करोड़ रुपए) तक का नुकसान हुआ। इसके अलावा जेबेल अली बंदरगाह पर शिपिंग गतिविधियां धीमी पड़ने से हर दिन करीब 500 मिलियन डॉलर का आर्थिक नुकसान हो रहा है। इन हमलों में अब तक छह लोगों की मौत भी हो चुकी है, जिनमें नेपाली और बांग्लादेशी नागरिक शामिल बताए जा रहे हैं।
यूएई को लगता है कि अगर वह सीधे युद्ध में उतरता है, तो यह संघर्ष और लंबा खिंच सकता है, जिससे सबसे ज्यादा नुकसान उसे ही होगा। ऐसे में यूएई अपनी अर्थव्यवस्था को ज्यादा जोखिम में डालने से भी बचना चाहता है। बता दें कि यूएई की इकोनॉमी टूरिज्म और ट्रेड (निर्यात) पर निर्भर है। अगर यूएई ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करता है और इसके चलते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज लंबे समय तक बंद रहता है, तो इसका सीधा असर उसके व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ेगा। यही वजह है कि यूएई फिलहाल अपनी अर्थव्यवस्था और नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए ईरान के साथ सीधे युद्ध से बच रहा है।
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