
F-15E Pilot Rescue: 3 अप्रैल को ईरान के आसमान में मिशन से लौट रहा अमेरिकी F-15E स्ट्राइक ईगल एक मिसाइल की चपेट में आया और कोहगिलुयेह और बोयर-अहमद प्रांत में गिर गया। विमान के दोनों एयरमैन ने इजेक्ट तो कर लिया, लेकिन ‘अल्फा’ और ‘ब्रावो’ अलग-अलग दिशाओं में जा गिरे। ‘अल्फा’ को लगभग छह घंटे में अमेरिकी कमांडो निकाल लाए, जबकि ‘ब्रावो’ करीब 50 घंटे तक ईरानी टुकड़ियों से बचते रहे। अब ‘ब्रावो’ ने CBS News के कार्यक्रम 60 Minutes पर बताया कि वे कैसे जिंदा लौटे।
ब्रावो के अनुसार हमले के वक्त उनका पैराशूट क्षतिग्रस्त था और वे 112 से 160 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से नीचे गिर रहे थे। उतरते ही पीठ, बांह और कंधे में चोट, टखना मुड़ना और सिर-चेहरे पर जख्मों ने हालात मुश्किल कर दिए, लेकिन गिरफ्तारी से बचने के लिए उन्होंने तुरंत क्रैश साइट से दूरी बना ली।
ब्रावो ने बताया कि F-15E को कंधे से दागी जाने वाली मिसाइल ने मारा और “ऐसा लगा जैसे मालगाड़ी से टकरा गया जेट।” उन्होंने साथी ‘अल्फा’ संग इजेक्ट किया, पर असली संकट तब शुरू हुआ जब ऊपर देखने पर पैराशूट दिखा ही नहीं। डर के बावजूद उनका पूरा ध्यान किसी तरह पैराशूट खोलकर उसकी खराबी दूर करने पर था।
जमीन पर पहुंचने के बाद ब्रावो 7,000 फीट ऊंचे जाग्रोस की एक चट्टानी दरार में छिपे। उनके पास सिर्फ एक पिस्तौल, एक कम्युनिकेशन सिस्टम और एक ट्रैकिंग बीकन था। उन्हें तलाशने वाले पर 60 लाख का इनाम होने की खबर भी सामने आई। उन्होंने खुद को समझाया, “ईरानी टीवी पर आने की नौबत मत आने देना।”
Wonderful to hear Bravo the F15 copilot credit God with his survival.
"I believe it was God's provision in my life to bring me through that moment in a way that didn't prevent injuries but prevented catastrophic injuries."
The fall broke his back, shoulder and arm but he was… pic.twitter.com/T03uvpt1v5— Jim Hanson (@JimHansonDC) September 14, 2026
दोनों एयरमैन लगभग 12 किमी की दूरी पर गिरे थे। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के मुताबिक ‘अल्फा’ को निकालने का अभियान भीषण गोलीबारी में चला। इसके बाद अमेरिका ने मिशन रोका नहीं, बल्कि सैकड़ों सैन्य और खुफिया कर्मियों, डेल्टा फोर्स, नेवी SEAL टीम, कई विमान, ड्रोन और CIA के एक भ्रम पैदा करने वाले अभियान को झोंक दिया। एक समय ईरान के अंदर 90 से ज्यादा अमेरिकी सैन्यकर्मी मौजूद थे। एडमिरल ब्रैड कूपर के अनुसार, 46 साल में पहली बार—यानी 1979 के बाद—अमेरिकी सेना ने सीधे ईरानी जमीन पर ऑपरेट किया।
बचाव के दौरान कुछ विमान रेगिस्तान में फंस गए या क्षतिग्रस्त हुए। तकनीक हाथ लगने के खतरे से बचने के लिए दो MC-130J विशेष परिवहन विमानों को नष्ट करना पड़ा और कुछ ‘लिटिल बर्ड’ हेलीकॉप्टर भी इसी वजह से तबाह किए गए। अंततः विमानों और ड्रोन की मदद से ब्रावो की लोकेशन मिली। करीब 50 घंटे बाद अमेरिकी पैरारेस्क्यू टीम उस दरार तक पहुंची और उन्हें निकाल लाई। घर पहुंचकर ब्रावो ने पत्नी को फोन कर बस इतना कहा कि वे सुरक्षित हैं।
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