
Iran Hormuz Attack: मध्य पूर्व (Middle East) से इस वक्त की सबसे बड़ी और दिल दहला देने वाली खबर सामने आ रही है। तेहरान और वाशिंगटन के बीच जारी खूनी संघर्ष के बीच, ईरान ने दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री रास्ते-होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz)-में एक कमर्शियल कंटेनर जहाज पर भीषण हमला कर दिया है। इस हमले ने भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के भी होश उड़ा दिए हैं, क्योंकि इस बदनसीब जहाज पर 11 भारतीय क्रू सदस्य सवार थे। विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा जारी शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक, 10 भारतीयों को बेहद नाटकीय ढंग से सुरक्षित बचा लिया गया है, लेकिन एक भारतीय नागरिक अब भी इस खौफनाक समुद्री क्षेत्र में लापता है। भारत सरकार ने इस पूरी स्थिति को 'बेहतरीन चिंताजनक' और वैश्विक शांति के लिए बड़ा खतरा बताया है।
यह रूह कंपा देने वाली घटना रविवार तड़के की है। साइप्रस के झंडे वाला यह विशालकाय मालवाहक जहाज अपनी तय दूरी पर आगे बढ़ रहा था। इसी दौरान ईरानी नौसेना और उनके कोस्ट गार्ड्स ने जहाज को घेर लिया। ईरान का दावा है कि यह जहाज उनके द्वारा तय किए गए समुद्री रास्ते (Sanctioned Route) का उल्लंघन कर रहा था। ईरान के रक्षा सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने पहले जहाज को रोकने के लिए हवा में चेतावनी के तौर पर गोलियां चलाईं, लेकिन जब जहाज ने अपनी दिशा नहीं बदली, तो इसे एक 'उकसावा' मानकर सीधा हमला कर दिया गया। हमले के बाद जहाज पर भीषण आग लग गई और चारों तरफ चीख-पुकार मच गई।
ईरान का दावा है कि साइप्रस के झंडे वाला कंटेनर जहाज़ उसके तय किए गए समुद्री मार्ग का पालन नहीं कर रहा था। पहले जहाज़ को चेतावनी देने के लिए गोलियां चलाई गईं, लेकिन जहाज़ ने रास्ता नहीं बदला। इसके बाद ईरानी बलों ने कार्रवाई करते हुए जहाज़ को निशाना बनाया। यह घटना ऐसे समय हुई है जब अमेरिका पहले ही तेहरान के खिलाफ लगातार सैन्य कार्रवाई कर रहा है और दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुंच चुका है।
🚨 JUST IN: U.S. LAUNCHES THIRD ROUND OF STRIKES ON IRAN THIS WEEK
At 7:15 p.m. ET, U.S. Central Command forces began a new wave of strikes after the IRGC attacked the Cyprus-flagged container ship M/V GFS Galaxy in the Strait of Hormuz.
The attack reportedly sparked an onboard… https://t.co/hKzMy0xfkN pic.twitter.com/D2AMX0qBWE— NGO-SUGAR (@ngosugartp) July 12, 2026
इस दुस्साहसिक हमले के कुछ ही घंटों के भीतर, अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी जवाबी कार्रवाई का बिगुल फूंक दिया। रविवार की सुबह होते-होते अमेरिका ने ईरान के भीतर तीसरे और सबसे घातक दौर के हवाई हमलों की शुरुआत कर दी। अमेरिकी लड़ाकू विमानों और क्रूज मिसाइलों ने ईरान के अंदर मौजूद लगभग 140 सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को पूरी तरह नेस्तनाबूद कर दिया। दरअसल, यह युद्ध 28 फरवरी को शुरू हुआ था और तब से दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर है। इस बीच, ईरान ने भी पलटवार करते हुए जॉर्डन, कतर और बहरीन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को अपनी मिसाइलों का निशाना बनाया है।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य में छिड़ी यह जंग सिर्फ दो देशों की नहीं है, बल्कि इसने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को दांव पर लगा दिया है। इस युद्ध के छिड़ने से पहले, दुनिया भर में व्यापार होने वाले कुल तेल और प्राकृतिक गैस (LNG) का लगभग पांचवां हिस्सा (20%) इसी तंग जलमार्ग से होकर गुजरता था। इस रणनीतिक रास्ते पर ईरान के कब्जे और हमलों ने एक बार फिर वैश्विक ऊर्जा संकट का भूत खड़ा कर दिया है। हालांकि, युद्ध की शुरुआत में कच्चे तेल की कीमतें $120 प्रति बैरल के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंचने के बाद थोड़ी कम हुई थीं, लेकिन रविवार के इस ताजा हमले ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में फिर से आग लगा दी है।
इस खूनी ड्रामे के बीच अमेरिका के खुफिया अधिकारियों ने एक बेहद चौंकाने वाला दावा किया है। नाम न छापने की शर्त पर अमेरिकी अधिकारियों ने सवाल उठाया है कि आखिर "ईरान की कमान इस वक्त किसके हाथ में है?" अमेरिका का मानना है कि नए सर्वोच्च नेता के आने के बाद ईरान के भीतर कट्टरपंथियों का एक मनमाना और बागी गुट (Rogue Faction) सक्रिय हो गया है, जो किसी भी कीमत पर संभावित युद्धविराम (Ceasefire) की बातचीत को नाकाम करना चाहता है। दूसरी तरफ, ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता हुसैन केरमानपुर ने पुष्टि की है कि पिछले एक हफ्ते में हुए हमलों में कम से कम 17 लोगों की जान जा चुकी है और 115 से अधिक लोग घायल हैं। इस पूरे चक्रव्यूह के बीच, भारत की नजरें अपने लापता नागरिक को ढूंढने और खाड़ी देश में फंसे अन्य प्रवासियों की सुरक्षा पर टिकी हैं।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। वैश्विक स्तर पर कारोबार होने वाले कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का लगभग पांचवां हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का सैन्य टकराव सिर्फ क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित कर सकता है। युद्ध के दौरान इस मार्ग पर तनाव बढ़ने से तेल की कीमतें पहले 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच चुकी थीं। हालांकि बाद में इनमें गिरावट आई, लेकिन मौजूदा हालात ने फिर ऊर्जा बाजार की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
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