
Iran Hormuz Plan: मिडिल ईस्ट में सुलग रही आग के बीच कूटनीति का बाजार गर्म है। एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच उच्च स्तरीय चर्चा चल रही है, तो दूसरी तरफ ईरान ने अमेरिका के सामने एक नया दांव चल दिया है। तेहरान ने वाशिंगटन को साफ संदेश देते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए सात दिन का एक ठोस रोडमैप थमाया है। इस हलचल से साफ है कि तेल की बाधित आपूर्ति और बढ़ते क्षेत्रीय तनाव के बीच अब दुनिया की महाशक्तियां दबाव में आने लगी हैं।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने दो टूक कहा है कि कतर के जरिए अमेरिका को यह सात-दिन का प्लान भेज दिया गया है। यदि अमेरिका ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी हटाने, फ्रीज किए गए फंड को जारी करने और तेल प्रतिबंधों से राहत देने जैसी शर्तें मान लेता है, तो सातवें दिन इस अहम समुद्री मार्ग को दोबारा खोल दिया जाएगा। हालांकि, अमेरिका इस पर फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है, क्योंकि ईरान ने यह भी साफ कर दिया है कि वह अपने परमाणु कार्यक्रम या यूरेनियम संवर्धन के अधिकारों पर कोई समझौता नहीं करेगा।
🚨 Iran offers 7-day Hormuz reopening plan to US — Araghchi
Iranian Foreign Minister Abbas Araghchi said Tehran has sent Washington, through Qatar, a concrete seven-day plan to reopen the Strait of Hormuz and restart negotiations if the US fulfills agreed conditions.
💬 “If the… pic.twitter.com/c8dgyGYBAg— Sputnik (@SputnikInt) September 25, 2026
वाशिंगटन में चल रही ट्रंप और शी जिनपिंग की बैठक के दौरान मिडिल ईस्ट का मुद्दा केंद्र में रहा। चीनी राष्ट्रपति शी ने अमेरिका और ईरान से पुराने जून फ्रेमवर्क समझौते पर लौटने की अपील की है। वहीं, अमेरिकी राजदूत डेविड परड्यू ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने शी जिनपिंग को चेतावनी दी है कि तेहरान को किसी भी प्रकार का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष समर्थन देना पूरी तरह अस्वीकार्य है। हालांकि, बीजिंग ने भरोसा दिलाया है कि वह ऐसी कोई मदद नहीं कर रहा है, लेकिन ज़मीनी हालात और विद्रोही समूहों की गतिविधियों से तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है।
ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि समझौता होने की स्थिति में भी तेहरान अपने परमाणु कार्यक्रम के अधिकारों से पीछे नहीं हटेगा। इसमें यूरेनियम संवर्धन भी शामिल है। अधिकारी के मुताबिक, ईरान अपने अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम को देश से बाहर भेजने पर भी सहमत नहीं है।
मिडिल ईस्ट संघर्ष का असर होर्मुज से आगे भी दिखाई दे रहा है। ईरान और उसके सहयोगी समूहों से जुड़े हमलों के कारण खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ा है। लेबनान में हिज़्बुल्लाह और इजरायली सेना के बीच भी संघर्ष जारी है। ऐसे माहौल में होर्मुज को फिर से खोलने का ईरानी प्रस्ताव कूटनीतिक कोशिशों का नया केंद्र बन गया है। हालांकि, परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंध और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच मतभेद अभी बने हुए हैं।
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