
Iran vs Israel-US War Day 3: ईरान और इजराइल के साथ-साथ अमेरिका के बीच चल रही जंग का सोमवार को तीसरा दिन है। ईरानी सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के बाद हालात और गंभीर हो गए हैं। ईरान अब सिर्फ इजराइल ही नहीं, बल्कि यूएई, सऊदी अरब, इराक, जॉर्डन और बहरीन जैसे कई खाड़ी देशों पर भी लगातार हमले कर रहा है। हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं और युद्ध अब विकराल रूप लेता जा रहा है। ऐसे में सवाल है — दुनिया के कौन से देश किसके समर्थन और किसके विरोध में हैं?
स्पेन ने ईरान के खिलाफ अमेरिका को अपने सैन्य अड्डों का इस्तेमाल करने से इनकार कर दिया है। स्पेन के विदेश मंत्री जोसे मैनुअल अल्बारेस ने कहा, स्पेनिश बेस इस ऑपरेशन के लिए उपयोग में नहीं लाए जा रहे हैं और न ही किसी ऐसी कार्रवाई के लिए इस्तेमाल किए जाएंगे। इस फैसले के बाद स्पेन के रोटा और मोरॉन एयरबेस से 15 अमेरिकी विमान रवाना हो गए।
ब्रिटिश पीएम कीर स्टार्मर ने अमेरिका को हिंद महासागर में मौजूद अपना मिलिट्री बेस डिएगो गॉर्सिया देने में देर की। अमेरिका जंग के पहले दिन ही इस बेस से ईरान पर हमला करना चाहता था। लेकिन ब्रिटेन ने 48 घंटे बाद इसकी इजाजत दी और कहा कि अमेरिका को यहां से सिर्फ ईरान के मिसाइल ठिकानों को निशाना बनाने की परमिशन होगी। इसे लेकर ट्रम्प ने कहा है कि वे ब्रिटिश पीएम से बेहद निराश है।
यूरोप की दो बड़ी ताकतों फ्रांस-जर्मनी ने एक संयुक्त बयान में एक कहा, अपने हितों और सहयोगियों की रक्षा के लिए डिफेंसिव एक्शन लेंगे। हम ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमता को खत्म कर देंगे। मतलब, यानी फ्रांस भी सीधे-सीधे अमेरिका-इजराइल के साथ है।
रूस ने ईरान पर हुए हमलों की कड़ी आलोचना करते हुए इसे खतरनाक एडवेंचर बताया। साथ ही कहा कि इससे पूरे मिडिल-ईस्ट में मानवीय, आर्थिक और रेडियोलॉजिकल तबाही मच सकती है। अमेरिका का इरादा संवैधानिक व्यवस्था को खत्म करना और एक ऐसे देश की सरकार को उखाड़ फेंकना है, जिसे वे गलत मानते हैं।
चीन ने अब तक ईरान की कोई सीधी मदद नहीं की है, हालांकि कूटनीतिक समर्थन जरूर किया है। चीन ने ईरान पर हुए हमलों की निंदा करते हुए तत्काल युद्धविराम की मांग की और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में चर्चा शुरू करवाने की बात कही।
पाकिस्तान ने अमेरिकी हमले के बाद ईरान के 'आत्मरक्षा के अधिकार' का समर्थन किया है। हालांकि, पाकिस्तान डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ जाने का दुस्साहस नहीं कर सकते हैं। लेकिन अब, पाकिस्तान को कहीं न कहीं ये डर सता रहा है कि ट्रंप कहीं उसे ईरान के खिलाफ लड़ने के लिए न कह दें।
भारत की दोस्ती ईरान और इजराइल दोनों से ही अच्छी है। ऐसे में वो युद्ध को लेकर फिलहाल किसी देश के समर्थन या विरोध में नहीं है। भारत सिर्फ शांति और कूटनीति के जरिये इस लड़ाई को खत्म कराना चाहता है। हालांकि, पीएम मोदी ने यूएई पर किए गए ईरान के हमलों की निंदा की है।
एक्सपर्ट्स 2 संभावनाएं बता रहे हैं।
अगर खाड़ी देशों या यूरोप पर बड़ा हमला हुआ, तो सामूहिक सैन्य प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है।
तेल आपूर्ति, व्यापार मार्ग और अंतरराष्ट्रीय राजनीति सब पर असर संभव है। कच्चा तेल महंगा होने से पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने की संभावना।
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