50 इजरायली फाइटर जेट्स ने मोसाद की मदद से तेहरान में मचाई तबाही, Watch Video

Published : Mar 06, 2026, 10:24 PM IST
israel attack on tehran bunkers

सार

ईरान-इजराइल युद्ध के बीच इज़राइल ने तेहरान में बड़ा हवाई हमला कर सुप्रीम लीडर के लीडरशिप कंपाउंड के नीचे बने अंडरग्राउंड बंकर को निशाना बनाया। 50 फाइटर जेट्स शामिल रहे। खामेनेई की मौत के बाद क्षेत्र में हमलों और जवाबी कार्रवाई की नई लहर शुरू हो गई है।

Iran-Israel War Day 7: ईरान-इजराइल के बीच जारी युद्ध के दौरान शुक्रवार सुबह तेहरान के बीचोंबीच इज़राइल ने बड़ा हवाई हमला किया। इस हमले में इज़राइली फाइटर जेट्स ने ईरान के सुप्रीम लीडर के लीडरशिप कंपाउंड के नीचे बने एक अंडरग्राउंड बंकर को निशाना बनाया। इजराइली एयरफोर्स के अनुसार इस ऑपरेशन में करीब 50 फाइटर जेट्स शामिल थे। इन जेट्स को इजराइल की मिलिट्री इंटेलिजेंस से मिली सटीक जानकारी के आधार पर गाइड किया गया था और ऑपरेशन को मोसाद के साथ मिलकर अंजाम दिया गया। हमले का मुख्य लक्ष्य वह अंडरग्राउंड बंकर था, जिसे अयातुल्ला अली खामेनेई के लिए बनाया गया था।

खामेनेई के लिए बनाया गया था सुरक्षित अंडरग्राउंड बंकर

इज़राइली सेना के मुताबिक यह बंकर ईरान के सुप्रीम लीडर के लिए युद्ध के दौरान संचालन और रणनीति संभालने के लिए बनाया गया एक सुरक्षित इमरजेंसी ठिकाना था। हालांकि, खामेनेई ने इसका इस्तेमाल नहीं किया, क्योंकि 'ऑपरेशन रोरिंग लायन' के दौरान हुए पहले हमलों में ही उनकी मौत हो चुकी थी। खामेनेई की मौत के बाद भी ईरानी सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी इस कंपाउंड का इस्तेमाल करते रहे।

ईरानी नेतृत्व का अहम कमांड सेंटर था यह कंपाउंड

इज़राइली एयरफ़ोर्स ने कहा कि ईरान ने इस अंडरग्राउंड साइट को विकसित करने में कई साल लगाए थे। इसका उद्देश्य इज़राइल और पश्चिमी देशों के खिलाफ सैन्य योजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए एक सुरक्षित बेस बनाना था। सेना के बयान के मुताबिक यह बंकर तेहरान के बीचों-बीच कई सड़कों के नीचे फैला हुआ था और इसमें कई एंट्री पॉइंट और कमरे बनाए गए थे, जहां ईरानी शासन के सीनियर लीडर्स इकट्ठा होते थे। इजराइल का कहना है कि इस बंकर के नष्ट होने से ईरानी शासन की कमांड और कंट्रोल क्षमता को बड़ा झटका लगा है।

जॉइंट हमले में मारे गए अयातुल्ला अली खामेनेई

तीन दशक से ज्यादा समय तक ईरान के सुप्रीम लीडर रहे अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत यूनाइटेड स्टेट्स और इज़राइल के संयुक्त हमलों में हुई। वह 86 साल के थे। एक बड़े हमले के बाद रविवार सुबह ईरान के सरकारी मीडिया ने उनकी मौत की पुष्टि की। इससे कुछ घंटे पहले ही अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कहा था कि खामेनेई संयुक्त सैन्य अभियान में मारे गए।

1979 की क्रांति के बाद सत्ता में आया था मौलवियों का शासन

1989 में अयातुल्ला रूहोल्लाह खोमैनी की मौत के बाद खामेनेई ने इस्लामिक रिपब्लिक की कमान संभाली थी। खोमैनी वही नेता थे जिन्होंने 1979 की क्रांति का नेतृत्व करते हुए ईरान के शाह को सत्ता से हटाया और शिया मौलवियों का शासन स्थापित किया। खोमैनी को करिश्माई नेता माना जाता था, जबकि खामेनेई अपेक्षाकृत शांत स्वभाव के थे और उनकी धार्मिक प्रतिष्ठा भी उतनी मजबूत नहीं मानी जाती थी।

रिवोल्यूशनरी गार्ड को बनाया देश की सबसे ताकतवर संस्था

अपने शासनकाल के दौरान खामेनेई ने ईरान के राजनीतिक और धार्मिक ढांचे को मजबूत किया। उन्होंने शिया मौलवियों के नेटवर्क को बढ़ाया और रिवोल्यूशनरी गार्ड को बेहद शक्तिशाली बना दिया। यह गार्ड एक एलीट सैन्य बल की तरह काम करता है, जो बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम को नियंत्रित करता है

ईरान-इजराइल युद्ध में हमलों की नई लहर

शुक्रवार सुबह इजराइली सेना ने हमलों की एक नई लहर शुरू करने की घोषणा की। प्रत्यक्षदर्शियों ने तेहरान और केरमानशाह के पास मिसाइल बेस के आसपास तेज धमाकों की सूचना दी। इज़राइल ने दावा किया कि उसने ईरान के अधिकतर एयर-डिफेंस सिस्टम और मिसाइल लॉन्चर नष्ट कर दिए हैं।

अरब देशों पर मिसाइल और ड्रोन से जवाबी हमला

इज़राइल के हमलों के जवाब में ईरान ने कुवैत, कतर, सऊदी अरब और बहरीन पर मिसाइल और ड्रोन दागे। ये सभी देश अमेरिका की सेना की मेजबानी करते हैं। हालांकि इन हमलों में तुरंत किसी के हताहत होने की सूचना नहीं मिली। ईरान के जवाबी हमलों का असर पूरे क्षेत्र पर पड़ा है। इससे तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है।

इजराइल-अमेरिकी हमलों में सबसे ज्यादा मौतें ईरान में

अधिकारियों के अनुसार अब तक ईरान में कम से कम 1,230 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, लेबनान में 120 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। इसके अलावा 6 अमेरिकी सैनिक भी मारे गए हैं।

 

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