Iran Protests: इंटरनेट बंद, 648 मौतें,10,000 गिरफ्तार-ईरान में क्यों छुपाई जा रही सच्चाई?

Published : Jan 13, 2026, 07:02 AM IST

Iran Protests News: ईरान में विरोध प्रदर्शनों के दौरान 648 मौतों का दावा सामने आया है, क्या यही पूरी सच्चाई है? इंटरनेट बंद, हजारों गिरफ्तार, मुर्दाघरों के बाहर शव… क्या सरकार हिंसा का असली आंकड़ा दुनिया से छिपा रही है?

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Iran Protests 2026: ईरान इस समय अपने इतिहास के सबसे गंभीर संकटों में से एक से गुजर रहा है। ईरान में विरोध प्रदर्शन अब केवल महंगाई या आर्थिक परेशानियों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि वे सीधे सरकार और व्यवस्था के खिलाफ आक्रोश में बदल चुके हैं। मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक, सरकारी कार्रवाई के दौरान अब तक कम से कम 648 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें नौ नाबालिग भी शामिल हैं। यह आंकड़ा दुनिया को झकझोर देने वाला है।

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क्या इंटरनेट बंद करके सच्चाई छिपाई जा रही है?

मानवाधिकार समूहों ने सबसे गंभीर सवाल ईरान इंटरनेट शटडाउन को लेकर उठाया है। इंटरनेट मॉनिटर करने वाली संस्था नेटब्लॉक्स के अनुसार, ईरान में साढ़े तीन दिन से ज्यादा समय से इंटरनेट लगभग पूरी तरह बंद है। क्या इंटरनेट बंद करने का मकसद हिंसा की असली तस्वीर दुनिया से छिपाना है? नॉर्वे स्थित NGO ईरान ह्यूमन राइट्स (IHR) का कहना है कि इंटरनेट बंदी की वजह से मौतों और गिरफ्तारियों की स्वतंत्र पुष्टि करना लगभग नामुमकिन हो गया है।

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648 मौतें या 6,000 से ज्यादा? असली आंकड़ा क्या है?

IHR ने आधिकारिक तौर पर 648 मौतों की पुष्टि की है, लेकिन उसने यह भी चेतावनी दी है कि वास्तविक संख्या इससे कहीं ज्यादा हो सकती है। कुछ अनुमानों के अनुसार, मरने वालों की संख्या 6,000 से ज्यादा भी हो सकती है। इसके अलावा, करीब 10,000 लोगों की गिरफ्तारी की बात भी सामने आई है। यह आंकड़े बताते हैं कि ईरान में हालात कितने भयावह हो चुके हैं।

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मुर्दाघर के बाहर शवों की कतारें क्या बताती हैं?

इंटरनेट बंदी के बावजूद कुछ वीडियो सामने आए हैं। AFP द्वारा जियोलोकेट किए गए एक वीडियो में तेहरान के दक्षिण में एक मुर्दाघर के बाहर दर्जनों शव दिखाई दिए। वीडियो में शोकाकुल परिवार अपने अपनों को पहचानने की कोशिश करते नजर आए। यह दृश्य इस बात का संकेत है कि ईरान में जमीनी हालात सरकार के दावों से बिल्कुल अलग हैं।

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क्या ये प्रदर्शन इस्लामी शासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती हैं?

ये विरोध प्रदर्शन दो हफ्तों से ज्यादा समय से जारी हैं। शुरुआत में ये आर्थिक समस्याओं को लेकर थे, लेकिन अब ये सीधे 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद बनी व्यवस्था को चुनौती दे रहे हैं। सरकार ने जवाब में देशभर में समर्थन रैलियों का आयोजन किया और विरोध को “दंगे” करार दिया।

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“चार मोर्चों पर युद्ध” का मतलब क्या है?

ईरानी संसद स्पीकर मोहम्मद बाकर ग़ालिबफ़ ने कहा कि ईरान चार मोर्चों पर युद्ध लड़ रहा है-आर्थिक युद्ध, मनोवैज्ञानिक युद्ध, अमेरिका और इज़राइल से सैन्य टकराव और “आतंकवादियों” के खिलाफ युद्ध (यानी प्रदर्शनकारी)। यह बयान साफ दिखाता है कि सरकार विरोध को राष्ट्रीय सुरक्षा का खतरा मान रही है।

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दुनिया की प्रतिक्रिया क्या कहती है?

यूरोपीय संघ ने प्रदर्शनकारियों के समर्थन में बयान दिया है और ईरान पर नए प्रतिबंधों पर विचार किया जा रहा है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने खुलकर राज्य हिंसा की निंदा की। वहीं, रूस ने इसे विदेशी हस्तक्षेप बताकर ईरान का बचाव किया है।

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क्या ईरान किसी बड़े टकराव की ओर बढ़ रहा है?

अमेरिका, यूरोप, रूस और मध्य-पूर्व की सक्रियता यह संकेत देती है कि ईरान का आंतरिक संकट अब अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बन चुका है। इंटरनेट बंदी, बढ़ती मौतें और वैश्विक दबाव-ये सभी सवाल खड़े करते हैं कि आने वाले दिन ईरान और दुनिया के लिए कितने खतरनाक हो सकते हैं।

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Human Rights Report Iran: चाैतरफरा हो रही निंदा

नॉर्वे स्थित ईरान ह्यूमन राइट्स (IHR) का दावा है कि वास्तविक मौतें हजारों में हो सकती हैं, जबकि लगभग 10,000 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। यूरोपीय संघ प्रतिबंधों पर विचार कर रहा है, फ्रांस ने हिंसा की निंदा की है, जबकि रूस ने विदेशी हस्तक्षेप के आरोप लगाए हैं।

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