Iran Protest: 2,403 मौतों के बीच क्राउन प्रिंस का सेना को चौंकाने वाला संदेश-देखें वीडियो!

Published : Jan 14, 2026, 08:14 AM IST

Iran Protest Explainer: ईरान में जारी हिंसक विरोध प्रदर्शनों में 2,403 मौतों के बाद देश निकाले गए क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी ने सेना से आंदोलन में शामिल होने की अपील की। ट्रंप की चेतावनी, IRGC बेस के दावे और वैश्विक दबाव ने संकट को और गहरा कर दिया।

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Iran Protest Update: ईरान इस समय अपने सबसे बड़े संकटों में से एक से गुजर रहा है। देश भर में चल रहे विरोध प्रदर्शनों में अब तक कम से कम 2,403 लोगों की मौत हो चुकी है। शुरुआत भले ही खराब अर्थव्यवस्था, महंगाई और बेरोज़गारी से हुई हो, लेकिन अब यह आंदोलन सीधे सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई और मौलवी शासन के खिलाफ खुली चुनौती बन चुका है। हालात इतने गंभीर हो गए कि सरकार को कई इलाकों में कम्युनिकेशन बंद करना पड़ा।

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विरोध प्रदर्शनों की असली वजह क्या है?

ईरान की जनता लंबे समय से आर्थिक संकट से जूझ रही है। अंतरराष्ट्रीय पाबंदियों ने देश की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है। नौकरियां कम हैं, महंगाई ज्यादा है और भविष्य को लेकर लोगों में गुस्सा और डर दोनों हैं। यही गुस्सा अब सड़कों पर दिख रहा है, जो धीरे-धीरे सरकार विरोधी आंदोलन में बदल गया।

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2,403 मौतों का आंकड़ा कैसे सामने आया?

सरकार की सख्त कार्रवाई और इंटरनेट बंदी के कारण सही जानकारी सामने नहीं आ पा रही थी। लेकिन जब कई दिनों बाद ईरानियों ने विदेश में फोन कॉल कर पाए, तब हालात की गंभीरता दुनिया के सामने आई। ईरान के सरकारी टीवी ने भी पहली बार इशारों-इशारों में माना कि देश ने “बहुत सारे शहीद” खोए हैं।

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देश निकाले गए क्राउन प्रिंस ने सेना से क्या अपील की?

ईरान के आखिरी शाह के बेटे और देश निकाले गए क्राउन प्रिंस रेज़ा पहलवी ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने ईरानी सेना से अपील की कि वह जनता के खिलाफ खड़ी न हो और विरोध प्रदर्शनों में लोगों का साथ दे। पहलवी ने कहा कि इन हत्याओं ने जनता और मौजूदा शासन के बीच ऐसी खाई बना दी है जिसे भरा नहीं जा सकता।

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क्या ईरान की सेना अब तक सरकार के साथ क्यों है?

इतने बड़े विरोध के बावजूद ईरान की सुरक्षा एजेंसियों और सेना में कोई खुली टूट नहीं दिखी है। विशेषज्ञों के मुताबिक, सरकार के पास अब भी मजबूत संस्थाएं, वफादार समर्थक और एक बड़ा प्रशासनिक ढांचा है। जब तक सड़क पर अशांति और अंतरराष्ट्रीय दबाव चरम पर नहीं पहुंचते, तब तक सत्ता बनी रह सकती है।

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ट्रंप की चेतावनी से क्यों बढ़ी अंतरराष्ट्रीय हलचल?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान ने प्रदर्शनकारियों को फांसी दी, तो अमेरिका “बहुत कड़ी कार्रवाई” करेगा। उन्होंने ईरानियों से आंदोलन जारी रखने की अपील भी की है। इससे तेहरान और वॉशिंगटन के बीच तनाव और बढ़ गया है।

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क्या अमेरिका पर्दे के पीछे विपक्ष से बात कर रहा है?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप के दूत स्टीव विटकॉफ ने चुपचाप रेज़ा पहलवी से मुलाकात की है। इसे ईरान संकट के बाद अमेरिका और ईरानी विपक्ष के बीच पहला बड़ा संपर्क माना जा रहा है। इससे अटकलें तेज हो गई हैं कि अमेरिका आगे कोई बड़ा फैसला ले सकता है।

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IRGC बेस पर कब्ज़े का दावा कितना गंभीर है?

एक कुर्दिश मिलिटेंट ग्रुप ने दावा किया है कि उसने पश्चिमी ईरान में IRGC के एक बेस पर कब्ज़ा कर लिया है। अगर यह सच है, तो यह संकेत हो सकता है कि हालात और बिगड़ सकते हैं।

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आगे क्या होगा?

ईरान फिलहाल एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। जनता सड़कों पर है, अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ रहा है और देश के अंदर गुस्सा चरम पर है। सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या यह आंदोलन सत्ता को हिला पाएगा, या मौलवी शासन एक बार फिर बच निकलेगा?

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