
वॉशिंगटन: अमेरिका और इज़राइल की तुलना में ईरान के हथियार बहुत ज़्यादा मॉडर्न या असरदार नहीं हैं। लेकिन फिर भी, उनके हमलों से होने वाले नुकसान को रोक पाना मुश्किल हो रहा है। अगर 90% हमलों को नाकाम कर भी दिया जाए, तब भी यह ऑपरेशन अमेरिका के लिए बहुत महंगा साबित हो रहा है।
ईरान मिडिल ईस्ट में मौजूद अमेरिकी ठिकानों, तेल रिफाइनरियों और दूतावासों पर हमला करने के लिए अपनी शाहेद-136 मिसाइलों का इस्तेमाल कर रहा है। एक शाहेद मिसाइल की कीमत करीब 2 लाख रुपये है, जबकि इसे रोकने के लिए अमेरिका जो पैक-3 इंटरसेप्टर इस्तेमाल करता है, उसकी कीमत 36 करोड़ रुपये है। थाड (THAAD) डिफेंस सिस्टम भी बहुत महंगा है। ऐसे में, ईरान की मिसाइलों के झुंड को रोकना अमेरिका के लिए न सिर्फ मुश्किल है, बल्कि बहुत खर्चीला भी है। साथ ही, एक के बाद एक आने वाली सभी मिसाइलों को पहचानकर मार गिराना किसी भी डिफेंस सिस्टम के लिए मुमकिन नहीं है। इसलिए, कुछ मिसाइलों के अपने टारगेट को तबाह करने की आशंका हमेशा बनी रहती है।
पिछले 4 सालों से चल रहे रूस-यूक्रेन युद्ध में भी रूस ने ईरान की इन्हीं शाहेद मिसाइलों का इस्तेमाल किया था। वहीं, अमेरिकी डिफेंस सिस्टम के भरोसे बैठे यूक्रेन को भारी नुकसान उठाना पड़ा था।
तेहरान: खमेनेई की हत्या को लेकर अमेरिका-इज़राइल से बदले की आग में जल रहे ईरान ने अपने दुश्मनों को चेतावनी देने के लिए एक अंडरग्राउंड ड्रोन बेस का वीडियो जारी किया है। ईरान की सरकारी न्यूज़ एजेंसी 'फार्स न्यूज़' ने हाल ही में एक प्रोपेगेंडा वीडियो रिलीज़ किया। इस वीडियो में अजीब से बैकग्राउंड म्यूज़िक के साथ गहरी सुरंगें, लाइनों में रखे गए ड्रोन, दर्जनों रॉकेट लॉन्चर और सुरंग की दीवारों पर ईरान के झंडे और खमेनेई की बड़ी-बड़ी तस्वीरें दिखाई दे रही हैं।
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