तेहरान में भड़का जनआक्रोश: अब तक 39 मौतें, 2260 हिरासत में और इंटरनेट बंद-बगावत की वजह क्या है?

Published : Jan 09, 2026, 09:46 AM IST

Teheran Protests 2026: तेहरान की सड़कों पर अचानक विरोध प्रदर्शन भड़के! क्या ईरानी जनता क्राउन प्रिंस रज़ा पहलवी के आह्वान पर सड़कों पर उतरी? इंटरनेट बंद और हिंसा के बीच क्या आगे नया मोड़ आएगा? पूरी कहानी यहां देखें।

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Tehran Protest News: ईरान की राजधानी तेहरान से शुरू हुआ विरोध अब पूरे देश में फैलता दिख रहा है। लोग घरों की छतों, सड़कों और गलियों से खुले तौर पर शासन के खिलाफ नारे लगा रहे हैं। सवाल यह है कि आखिर ईरान में अचानक इतना बड़ा जनआक्रोश क्यों फूट पड़ा? इंटरनेट क्यों बंद किया गया? और निर्वासित क्राउन प्रिंस रज़ा पहलवी की इस भूमिका को कैसे समझा जाए?

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आख़िर तेहरान में विरोध प्रदर्शन भड़कने की वजह क्या है?

ईरान में लंबे समय से महंगाई, बेरोज़गारी और गिरती अर्थव्यवस्था से लोग परेशान हैं। हालात ऐसे हैं कि आम आदमी की रोज़मर्रा की ज़िंदगी मुश्किल होती जा रही है। डॉलर के मुकाबले ईरानी रियाल की ऐतिहासिक गिरावट ने जनता के गुस्से को और भड़का दिया। इसी आर्थिक बदहाली के बीच लोगों ने सड़कों पर उतरकर शासन के खिलाफ आवाज़ उठानी शुरू कर दी।

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इंटरनेट और फोन सेवाएं क्यों बंद की गईं?

जैसे ही विरोध प्रदर्शन तेज़ हुए, ईरान में कई इलाकों में इंटरनेट और टेलीफोन सेवाएं बाधित कर दी गईं। आमतौर पर ऐसा कदम तब उठाया जाता है जब सरकार सोशल मीडिया और आपसी समन्वय को रोकना चाहती है। इंटरनेट बंद होना इस बात का संकेत है कि हालात सरकार के लिए गंभीर हैं और सूचना के प्रसार से वह असहज महसूस कर रही है।

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निर्वासित क्राउन प्रिंस रज़ा पहलवी का आह्वान कितना अहम है?

ईरान के आखिरी शाह के बेटे और निर्वासित क्राउन प्रिंस रज़ा पहलवी ने जनता से रात 8 बजे घरों और छतों से नारे लगाने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोग जहां हों, वहीं से अपनी आवाज़ बुलंद करें। इस आह्वान के बाद ही तेहरान और आसपास के इलाकों में “तानाशाह मुर्दाबाद” और “इस्लामिक रिपब्लिक मुर्दाबाद” जैसे नारे गूंजने लगे।

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क्या ये आंदोलन नेतृत्वहीन है या किसी बदलाव की शुरुआत?

हालांकि पहलवी ने आह्वान किया, लेकिन ज़मीनी स्तर पर ये विरोध अब भी बड़े पैमाने पर नेतृत्वहीन नजर आते हैं। लोग किसी एक नेता के लिए नहीं, बल्कि अपने गुस्से और असंतोष के कारण सड़कों पर हैं। कुछ जगहों पर शाह के समर्थन में नारे भी लगे, जो यह दिखाते हैं कि लोग मौजूदा व्यवस्था से कितने नाराज़ हैं। मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक, अब तक कम से कम 39 लोगों की मौत हो चुकी है और 2,260 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया है। ये आंकड़े दिखाते हैं कि विरोध शांत नहीं है और सरकार पर दबाव लगातार बढ़ रहा है।

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अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय दबाव का क्या असर पड़ेगा?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ईरान पर नजरें टिकी हैं। हालांकि ईरानी सरकार इसे विदेशी हस्तक्षेप बताकर खारिज कर रही है, लेकिन वैश्विक दबाव हालात को और संवेदनशील बना रहा है।

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ईरान अब किस दिशा में जाएगा?

क्या ये विरोध सिर्फ आर्थिक नाराज़गी तक सीमित रहेंगे, या किसी बड़े राजनीतिक बदलाव की नींव रखेंगे? क्या रज़ा पहलवी जनता को एकजुट कर पाएंगे, या आंदोलन बिखरा रहेगा? फिलहाल ईरान उबाल पर है और दुनिया की नजरें तेहरान पर टिकी हैं। ये विरोध प्रदर्शन सिर्फ सड़कों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये उस गहरे असंतोष का प्रतीक हैं जो सालों से दबा हुआ था। इंटरनेट बंदी, नारे, गिरफ्तारी और आर्थिक संकट-सब मिलकर एक बड़े तूफान की ओर इशारा कर रहे हैं। अब देखना यह है कि यह तूफान किस दिशा में जाता है।

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