
दोहा/तेहरान: मध्य पूर्व (Middle East) के बारूदी मुहाने पर खड़ी दुनिया इस वक्त एक बेहद खौफनाक मोड़ पर आ पहुंची है। ईरान ने वैश्विक महाशक्ति अमेरिका (US) को सीधे शब्दों में अल्टीमेटम देते हुए दोहा में चल रही बैक-चैनल वार्ताओं के बीच अपने कड़े तेवर दिखा दिए हैं। ईरान की संसद के स्पीकर और मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघेरी घालीबाफ ने दो टूक शब्दों में कह दिया है कि यदि वाशिंगटन ने चालाकी बंद नहीं की और उनकी पांच बुनियादी मांगें तुरंत नहीं मानीं, तो बातचीत का यह आखिरी धागा भी टूट जाएगा। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह शांति की मेज पर जरूर है, लेकिन उसकी सेनाएं युद्ध के मैदान में उतरने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
स्विट्जरलैंड में हाल ही में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघेरी घालीबाफ के बीच बंद कमरों में हुई आमने-सामने की हाई-लेवल मुलाकात के बाद, कूटनीति का अगला केंद्र कतर की राजधानी दोहा बन गया है। कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजेद अल-अंसारी ने पुष्टि की है कि अमेरिका के स्पेशल एनवॉय स्टीव विटकॉफ, जेरेड कुशनर और ईरान के डिप्टी विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी के प्रतिनिधिमंडल सीधे एक-दूसरे के सामने नहीं बैठे हैं। कतरी अधिकारी मध्यस्थ के रूप में दोनों पक्षों के बीच दस्तावेज तैयार करने के लिए पर्दे के पीछे से काम कर रहे हैं, ताकि भविष्य की उच्च-स्तरीय बैठकों का रास्ता साफ हो सके। लेकिन इसी बीच ईरान के एक बयान ने इस पूरी प्रक्रिया में बारूद का काम किया है।
ईरानी मुख्य वार्ताकार घालीबाफ ने सरकारी टेलीविजन पर लाइव आकर साफ कर दिया कि अमेरिका के साथ अंतिम समझौते पर तब तक कोई चर्चा नहीं होगी, जब तक पूर्व समझौता ज्ञापन (MoU) के 'आर्टिकल 13' के तहत तय दायित्वों को अमेरिका पूरी तरह लागू नहीं करता। ईरान ने कतर की मेज से जो पांच प्रमुख मांगें रखी हैं, वे बेहद सख्त हैं:
घालीबाफ ने साफ चेतावनी दी है कि जब ये सारे कदम धरातल पर शुरू होकर जारी रहेंगे, तभी ईरान अगले दौर की बातचीत के लिए आगे बढ़ेगा।
इस पूरे तनाव का सबसे विस्फोटक केंद्र 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) है, जहां से पूरी दुनिया के तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है। ईरान ने इस रणनीतिक जलमार्ग पर अपनी पूर्ण संप्रभुता का दावा ठोक दिया है। घालीबाफ ने प्रेस टीवी के माध्यम से कड़े शब्दों में कहा, "ये हमारे क्षेत्रीय जल क्षेत्र हैं।" उन्होंने चेतावनी दी है कि MoU के तहत दी गई टोल फीस की अस्थायी छूट केवल 60 दिनों के लिए ही वैध है, जिसके बाद ईरान यहां से गुजरने वाले विदेशी जहाजों पर टैक्स (टोल) वसूलना शुरू कर देगा। दूसरी तरफ, अमेरिका इस वैश्विक मार्ग को हर हाल में खुला रखने पर अड़ा है, जिससे दोनों सेनाओं के बीच जलमार्ग में सीधे सैन्य टकराव की आशंका काफी बढ़ गई है।
अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर भी दोहा में मौजूद हैं। हालांकि, कतर के अनुसार उनकी मुलाकात सीधे ईरानी अधिकारियों से नहीं हुई है। वे क्षेत्रीय मुद्दों और कूटनीतिक विकल्पों पर चर्चा कर रहे हैं। तकनीकी बातचीत में अमेरिका की ओर से विशेषज्ञ स्तर के अधिकारी और ईरान की ओर से उप विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी शामिल हैं।
दुनिया भर के रक्षा और कूटनीतिक विशेषज्ञ इस बात से चिंतित हैं कि अगर दोहा में चल रही यह तकनीकी बातचीत विफल रही, तो मध्य पूर्व में एक ऐसा क्षेत्रीय युद्ध छिड़ सकता है जो पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को तबाह कर देगा। घालीबाफ का आखिरी बयान इसी भयावह संकट की ओर इशारा करता है। उन्होंने लाइव इंटरव्यू में बेहद ठंडे और कड़े लहजे में कहा: "हम इस वक्त बातचीत जरूर कर रहे हैं, लेकिन वाशिंगटन यह अच्छी तरह जान ले... अगर इन वार्ताओं पर जमीन पर अमल नहीं हुआ, तो हम युद्ध के लिए भी पूरी तरह तैयार हैं और उसी के अनुसार जवाब देंगे।"
फिलहाल अमेरिका और ईरान दोनों ही बातचीत का रास्ता खुला रखना चाहते हैं, लेकिन दोनों की प्राथमिकताएं अलग हैं। अमेरिका जहां क्षेत्रीय सुरक्षा और अपने हितों को लेकर चिंतित है, वहीं ईरान प्रतिबंधों से राहत और आर्थिक दबाव कम करने की मांग कर रहा है। दोहा की तकनीकी बातचीत आने वाले दिनों में यह तय कर सकती है कि दोनों देश समझौते की ओर बढ़ेंगे या फिर तनाव एक बार फिर टकराव में बदल जाएगा। फिलहाल ईरान का संदेश साफ है-पहले वादे पूरे करो, तभी आगे बातचीत होगी। अब पूरी दुनिया की निगाहें व्हाइट हाउस पर टिकी हैं कि क्या अमेरिका ईरान की इन शर्तों को मानकर पीछे हटता है या फिर यह कूटनीतिक गतिरोध दुनिया को एक नए और विनाशकारी महायुद्ध की ओर धकेल देगा।
Asianet News Hindi पर पढ़ें देशभर की सबसे ताज़ा National News in Hindi, जो हम खास तौर पर आपके लिए चुनकर लाते हैं। दुनिया की हलचल, अंतरराष्ट्रीय घटनाएं और बड़े अपडेट — सब कुछ साफ, संक्षिप्त और भरोसेमंद रूप में पाएं हमारी World News in Hindi कवरेज में। अपने राज्य से जुड़ी खबरें, प्रशासनिक फैसले और स्थानीय बदलाव जानने के लिए देखें State News in Hindi, बिल्कुल आपके आसपास की भाषा में। उत्तर प्रदेश से राजनीति से लेकर जिलों के जमीनी मुद्दों तक — हर ज़रूरी जानकारी मिलती है यहां, हमारे UP News सेक्शन में। और Bihar News में पाएं बिहार की असली आवाज — गांव-कस्बों से लेकर पटना तक की ताज़ा रिपोर्ट, कहानी और अपडेट के साथ, सिर्फ Asianet News Hindi पर।