कैमरे के सामने ईरान का वॉकआउट, बेबस देखते रह गए JD वेंस और पाकिस्तान हैरान-परेशान!

Published : Jun 22, 2026, 08:47 AM IST
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सार

ईरान-अमेरिका वार्ता के बीच स्विट्ज़रलैंड में अचानक हुए वॉकआउट ने कई सवाल खड़े कर दिए। कैमरों के सामने फोटो-ऑप ठुकराने, JD वेंस की मौजूदगी और ट्रंप की धमकियों के बाद ईरानी प्रतिनिधिमंडल के बाहर निकलने से कूटनीतिक तनाव चरम पर पहुंच गया। क्या यह शांति वार्ता टूटने का संकेत है या किसी बड़े समझौते से पहले की रणनीतिक चाल? 

बर्गनस्टॉक रिज़ॉर्ट (स्विट्ज़रलैंड): स्विट्ज़रलैंड के आलीशान बर्गनस्टॉक रिज़ॉर्ट में रविवार को एक ऐसा राजनीतिक ड्रामा देखने को मिला, जिसने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति की बुनियाद हिला दी। कैमरों की फ्लैशलाइट ऑन थी, दुनिया भर के मीडिया की नजरें टिकी थीं और मंच सज चुका था। लेकिन ठीक उसी वक्त कुछ ऐसा हुआ जिसकी कल्पना वहां मौजूद आयोजकों ने भी नहीं की थी। इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग (MoU) के तहत शुरू हुई इस हाई-प्रोफाइल शांति वार्ता के पहले ही दौर में ईरान के प्रतिनिधिमंडल ने अमेरिका को तगड़ा झटका देते हुए न सिर्फ फोटो-ऑप का बहिष्कार किया, बल्कि बैठक से वॉकआउट कर गए।

 

 

कैमरों के सामने महातनाव: 'मीडिया शो' ठुकराकर निकले ईरानी सिपहसालार

ईरान की 'तस्नीम न्यूज़ एजेंसी' के अनुसार, अमेरिकी और ईरानी प्रतिनिधिमंडलों के बीच बातचीत शुरू होने से ठीक पहले हाथ मिलाने और एक साझा 'फोटो-ऑप' (तस्वीरें खिंचवाने) का कार्यक्रम पहले से तय था। इस ऐतिहासिक पल को कैद करने के लिए आयोजक पूरी तरह तैयार थे। लेकिन जैसे ही घड़ी की सुई नियत समय पर पहुंची, ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाक़र ग़ालिबाफ़ और विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने इसमें शामिल होने से साफ इनकार कर दिया। ईरानी अधिकारियों ने इसे अमेरिका का महज एक "मीडिया शो" करार दिया। उस वक्त कमरे में मौजूद अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) और कुछ ही मीटर की दूरी पर खड़े पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ बस देखते रह गए। माहौल में ऐसा सन्नाटा पसरा कि वहां मौजूद पाकिस्तानी और कतरी मध्यस्थ हैरान रह गए।

 

 

एक ही कमरा, दो धुर विरोधी और वेंस की वो ठंडी नजरें!

इस भयंकर तनाव के बावजूद कुछ पलों के लिए दोनों धुर विरोधी नेता एक ही छत के नीचे मौजूद थे। बैठक स्थल से सामने आए फुटेज में दिख रहा है कि जब ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कमरे में प्रवेश किया, तो वहां जेडी वेंस के साथ जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ़ पहले से मौजूद थे। अरागची ने अमेरिकी खेमे को पूरी तरह नजरअंदाज करते हुए सीधे पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ की तरफ कदम बढ़ाए, उनसे हाथ मिलाया और गले लगकर अभिवादन किया। इस दौरान अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने एक पल के लिए अरागची की तरफ देखा और फिर तुरंत अपनी नजरें हटा लीं। दोनों देशों के बीच सालों बाद हुई इस सबसे उच्च-स्तरीय सीधी मुलाकात का अंत बेहद कड़वा रहा और अरागची कुछ ही देर में वहां से बाहर निकल गए।

 

 

ट्रुथ सोशल पर ट्रंप का वो पोस्ट…और भड़क उठी जंग की चिंगारी

इस वॉकआउट के पीछे की असली वजह वाशिंगटन से आई राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की वो खौफनाक धमकी थी, जिसने शांति की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर ईरान को सीधे सैन्य मलबे में तब्दील करने की चेतावनी देते हुए लिखा था: "ईरान को लेबनान में अपने भारी-भरकम पैसे पाने वाले प्रॉक्सी (हिज़्बुल्लाह) को गड़बड़ी फैलाने से तुरंत रोकना चाहिए। अगर वे ऐसा नहीं करते हैं, तो हम ईरान पर फिर से बहुत ज़ोरदार हमला करेंगे, ठीक वैसे ही जैसे हमने पिछले हफ़्ते किया था, बल्कि उससे भी ज़्यादा ज़ोरदार!" इस धमकी के भड़कते ही ईरानी वार्ताकारों ने अमेरिकी पक्ष के सामने औपचारिक रूप से कड़ी आपत्ति दर्ज कराई और ट्रंप की ज़ुबानी धमकियों का उचित जवाब देने के लिए हालात का आकलन करते हुए सीधे बैठक का बहिष्कार कर दिया।

 

 

80 मिनट का चक्रव्यूह: क्या अब भी बची है समझौते की कोई उम्मीद?

इस हाई-वोल्टेज ड्रामे से पहले, बातचीत का पहला दौर लगभग 80 मिनट तक चला था। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने स्पष्ट किया कि तेहरान का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वाशिंगटन, इस्लामाबाद MoU के तहत प्रतिबंधों में राहत देने और ईरान के फ्रीज किए गए फंड (रोकी गई धनराशि) को जारी करने के वादों को पूरा करे। हालांकि, इस तनाव के बीच परदे के पीछे से कुछ राहत भरी खबरें भी आईं। ईरानी वार्ता टीम के एक सदस्य ने पुष्टि की है कि कतर की मध्यस्थता के चलते ईरान के फ्रीज फंड को जारी करने की कार्यकारी प्रक्रियाएं शुरू हो गई हैं। साथ ही, ईरानी तेल प्रतिबंधों में छूट से संबंधित एक ड्राफ़्ट को भी अंतिम रूप दे दिया गया है, जिसे जल्द ही जारी किया जा सकता है। अब देखना यह है कि ट्रंप की धमकियों के साए में यह कूटनीतिक युद्ध क्या मोड़ लेता है।

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