Iran Oil Crisis: अमेरिका ने कसा शिकंजा, भविष्य का खतरा देख औकात में आ गया ईरान!

Published : Apr 27, 2026, 05:55 PM IST
Iran Oil Crisis: अमेरिका ने कसा शिकंजा, भविष्य का खतरा देख औकात में आ गया ईरान!

सार

अमेरिकी प्रतिबंधों से ईरान का तेल निर्यात ठप है। स्टोरेज भरने पर वह पुराने टैंकरों में तेल जमा कर रहा है। कुओं को बंद करने से स्थायी नुकसान का खतरा है, जिससे ईरान की अर्थव्यवस्था गंभीर संकट में है।

तेहरान: पश्चिमी एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान का तेल उद्योग एक बड़े संकट से जूझ रहा है। अमेरिका के कड़े प्रतिबंधों की वजह से ईरान का कच्चा तेल एक्सपोर्ट लगभग ठप हो गया है। लेकिन ईरान के सामने एक और बड़ी मुश्किल है - वो तेल के कुओं को बंद भी नहीं कर सकता, क्योंकि इससे उन्हें हमेशा के लिए नुकसान पहुंचने का खतरा है।

ईरान के कुल तेल उत्पादन का 90% से ज़्यादा खार्ग द्वीप (Kharg Island) से हैंडल होता है। यहां बने स्टोरेज टैंक लगभग पूरी तरह भर चुके हैं। ऐसे में ईरान ने कच्चा तेल जमा करने के लिए एक नया और अनोखा तरीका निकाला है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान अब अपने पुराने और बेकार पड़े तेल टैंकरों को स्टोरेज के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है।

इसी कड़ी में ईरान ने 30 साल पुराने 'नाशा' (Nasha) नाम के एक तेल टैंकर को फिर से काम पर लगाया है। सालों से बेकार खड़ा यह जहाज अब समुद्र में तैरता हुआ एक स्टोरेज टैंक बन गया है। यह कदम दिखाता है कि अमेरिकी प्रतिबंधों ने ईरान की अर्थव्यवस्था को किस कदर मुश्किल में डाल दिया है।

इस टैंकर में 1।3 करोड़ (13 मिलियन) बैरल तेल जमा किया जा सकता है। वहीं, ईरान हर दिन करीब 10 लाख (1 मिलियन) बैरल तेल का उत्पादन करता है। गल्फ न्यूज़ ने समुद्री व्यापार विश्लेषकों के हवाले से बताया है कि इस हिसाब से 'नाशा' टैंकर सिर्फ 13 दिनों में पूरी तरह भर जाएगा। एक्सपर्ट्स का कहना है कि 16 अप्रैल से ही सैटेलाइट तस्वीरों में ईरान को जहाजों में तेल भरते हुए देखा गया है। अगर स्टोरेज की यह क्षमता भी खत्म हो गई तो ईरान की अर्थव्यवस्था का दम घुट सकता है।

ईरान के लिए तेल के कुओं को अचानक बंद करना भी आसान नहीं है। ऐसा करने से ज़मीन के नीचे का दबाव बिगड़ सकता है और कुओं का कामकाज प्रभावित हो सकता है। उत्पादन रोकने पर कुओं में पानी भरने का खतरा होता है, जिससे तेल की मात्रा कम हो सकती है। इससे कुओं को स्थायी नुकसान पहुंच सकता है। यही वजह है कि एक्सपोर्ट रुकने के बावजूद ईरान तेल निकालता जा रहा है।

मौजूदा आंकड़ों के मुताबिक, ईरान के पास अब सिर्फ 12-13 दिनों की स्टोरेज क्षमता बची है। अगर जल्द ही एक्सपोर्ट दोबारा शुरू नहीं हुआ, तो ईरान के सामने दो ही रास्ते होंगे - या तो कुओं को बंद करके लंबे समय के लिए उत्पादन का नुकसान झेले, या फिर एक बड़े आर्थिक संकट का सामना करे। एक्सपर्ट्स का मानना है कि पुराने जहाजों में तेल जमा करना सिर्फ एक अस्थायी समाधान है।

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