अब पेट्रोल-डीजल के दाम घटेंगे? 7 साल बाद भारत पहुंचने वाला है ईरानी तेल

Published : Apr 01, 2026, 05:32 PM IST
Iranian Oil Tanker Heads to India After 7 Years Shipment May Reach Vadinar Port

सार

India Imports Iranian Oil: करीब 7 साल बाद ईरानी कच्चा तेल भारत की ओर बढ़ता दिख रहा है। ‘पिंग शुन’ नाम का टैंकर ईरान के खर्ग द्वीप से तेल लेकर गुजरात के वडीनार बंदरगाह की ओर बढ़ रहा है। अगर डिलीवरी होती है तो 2019 के बाद यह भारत की पहली ईरानी तेल खरीद हो सकती है।

करीब सात साल बाद भारत और ईरान के बीच कच्चे तेल को लेकर हलचल तेज होती दिखाई दे रही है। शिप ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक एक ईरानी तेल से भरा टैंकर भारत की ओर बढ़ रहा है और इस हफ्ते के अंत तक गुजरात के वडीनार बंदरगाह पहुंच सकता है। अगर यह डिलीवरी पूरी हो जाती है तो मई 2019 के बाद यह पहली बार होगा जब भारत ईरान से कच्चा तेल खरीदेगा। ऐसे समय में यह घटनाक्रम सामने आया है जब मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव और सप्लाई में रुकावट के कारण दुनिया भर में तेल की कीमतें दबाव में हैं।

प्रतिबंधित टैंकर ‘पिंग शुन’ भारत की ओर बढ़ा

शिप ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म के मुताबिक “पिंग शुन” नाम का टैंकर इस समय फारस की खाड़ी से भारत की ओर बढ़ रहा है। यह एक अफ्रामैक्स श्रेणी का जहाज है, जिसे साल 2002 में बनाया गया था। इस जहाज पर 2025 में अमेरिका ने प्रतिबंध लगाया था।

डेटा के अनुसार इस टैंकर ने मार्च की शुरुआत में ईरान के खर्ग द्वीप से कच्चा तेल लोड किया था और अब यह गुजरात के वडीनार बंदरगाह की तरफ बढ़ रहा है। हालांकि जहाज का अंतिम गंतव्य कभी भी बदला जा सकता है, इसलिए इसकी डिलीवरी को लेकर अभी भी पूरी तरह स्पष्टता नहीं है।

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2019 के बाद पहली संभावित खरीद

भारत ने मई 2019 में ईरान से कच्चे तेल का आयात बंद कर दिया था। उस समय अमेरिका ने ईरान के तेल निर्यात पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए थे, जिसके बाद कई देशों को मजबूरी में ईरानी तेल खरीदना रोकना पड़ा। अब अगर यह टैंकर भारत में सफलतापूर्वक तेल उतारता है, तो यह लगभग सात साल बाद भारत द्वारा ईरान से की गई पहली खरीद होगी।

मिडिल ईस्ट संकट से प्रभावित हो रही तेल सप्लाई

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने तेल सप्लाई पर असर डालना शुरू कर दिया है। ईरान को लेकर अमेरिका और इस्राइल के बीच बढ़ते टकराव की वजह से क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ गई है। इस तनाव का असर होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर भी पड़ा है। यह समुद्री रास्ता दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक माना जाता है और यहां से बड़ी मात्रा में तेल दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचता है।

पेमेंट और इंश्योरेंस बनी बड़ी चुनौती

हालांकि ईरानी तेल की संभावित डिलीवरी के बावजूद कई चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं। सबसे बड़ी समस्या पेमेंट और इंश्योरेंस से जुड़ी है। सूत्रों के मुताबिक एशिया में कई बैंक, जो अमेरिकी डॉलर में होने वाले भुगतान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाते हैं, उन्होंने ईरानी तेल से जुड़ी डील में मदद करने से इनकार कर दिया है। ऐसा इसलिए है क्योंकि इस तरह के लेन-देन में प्रतिबंधित ईरानी संस्थाओं के साथ ट्रांजेक्शन का खतरा बना रहता है।

पहले भी डिलीवरी में आई थी अड़चन

हाल ही में ईरानी एलपीजी से जुड़े एक मामले में भी ऐसी ही स्थिति देखने को मिली थी। “सी बर्ड” नाम का एक जहाज 30 मार्च को मैंगलोर बंदरगाह पहुंचा था, लेकिन अभी तक उसका माल उतारा नहीं जा सका है। पोर्ट एजेंट की रिपोर्ट के अनुसार, तेल लेने वाला पक्ष अभी डिलीवरी लेने के लिए तैयार नहीं है और भुगतान से जुड़े मुद्दों को सुलझाने की कोशिश की जा रही है।

भारतीय रिफाइनरियां फिलहाल खामोश

भारत की प्रमुख सरकारी रिफाइनरी कंपनियां इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन और नायरा एनर्जी आमतौर पर वडीनार बंदरगाह पर अपने तेल के कार्गो प्राप्त करती हैं। हालांकि इस संभावित डील को लेकर इन कंपनियों की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

जानकारी के मुताबिक नायरा एनर्जी इस महीने अपने प्लांट में रखरखाव का काम करने जा रही है, जिसके चलते उसे फिलहाल अतिरिक्त कच्चे तेल की जरूरत नहीं होगी। फिलहाल सभी की नजर इस टैंकर की यात्रा पर टिकी हुई है। अगर यह सफलतापूर्वक भारत पहुंचता है, तो यह न सिर्फ तेल बाजार बल्कि भारत और ईरान के ऊर्जा संबंधों के लिए भी एक बड़ा संकेत माना जाएगा।

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