60 करोड़ की प्रॉपर्टी का वारिस कौन? 4 साल पहले बेटे फिर पति की मौत, अंतिम दिनों में अकेली रह गई करोड़ों की मालकिन

Published : Feb 16, 2026, 09:47 PM IST
jabalpur doctor death property dispute

सार

जबलपुर के राइट टाउन में 60 करोड़ की प्रॉपर्टी को लेकर डॉ. हेमलता श्रीवास्तव की मौत के बाद विवाद गहराया। गिफ्ट डीड, IMA के आरोप, ट्रस्ट और परिवार के दावे तथा प्रशासन की जांच के बीच मामला अब SDM कोर्ट में पहुंच गया है।

जबलपुर। मध्य प्रदेश में जबलपुर के सबसे पॉश इलाके राइट टाउन में रविवार 15 फरवरी की शाम एक अजीब-सा सन्नाटा था। करोड़ों रुपये के बड़े बंगले के अंदर 81 साल की सीनियर नेत्र विशेषज्ञ डॉ. हेमलता श्रीवास्तव का पार्थिव शरीर रखा था। घर के बाहर पुलिस और बाउंसर तैनात थे। उनकी अंतिम यात्रा प्रशासन की निगरानी में राइट टाउन से रानीताल मुक्तिधाम तक निकली। लेकिन अंतिम संस्कार से पहले ही एक बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ कि उनकी 60 करोड़ रुपये की प्राइम प्रॉपर्टी का वारिस आखिर कौन होगा?

11,000 स्क्वेयर फीट जमीन और गिफ्ट डीड पर साइन का विवाद

12 जनवरी को डॉ. हेमलता ने अपना 81वां जन्मदिन मनाया था। एक वीडियो में वह डॉ. सुमित जैन और उनकी पत्नी प्राची जैन के साथ केक काटते नजर आईं। दो दिन बाद उनकी तबीयत बिगड़ने की खबर आई। 15 जनवरी तक उनकी हालत काफी खराब बताई गई। इसी दौरान 11,000 स्क्वेयर फीट जमीन, जिसकी कीमत करीब 60 करोड़ रुपये बताई जा रही है, उससे जुड़े कागजातों पर साइन होने की बात सामने आई। डॉ. सुमित जैन का दावा है कि डॉ. हेमलता ने अपनी मर्जी से जमीन दान की थी ताकि उनके दिवंगत ससुर और बेटे के नाम पर मेमोरियल हॉस्पिटल बनाया जा सके। उनका कहना है कि उस समय वह पूरी तरह होश में थीं और उन्हें परिवार जैसा मानती थीं।

IMA का आरोप: दबाव में कराई गई रजिस्ट्री?

लेकिन मामला यहीं नहीं रुका। इंडियान मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने आरोप लगाया कि डॉ. हेमलता पर उनकी कमजोर शारीरिक और मानसिक स्थिति में रजिस्ट्री और गिफ्ट डीड पर साइन करने का दबाव डाला गया। तनाव बढ़ने के बाद जिला प्रशासन ने हस्तक्षेप किया। कलेक्टर के आदेश पर उन्हें मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। बाद में कथित तौर पर डॉ. हेमलता ने कहा कि गिफ्ट डीड गलत जानकारी देकर रजिस्टर कराई गई थी।

गायत्री मंदिर ट्रस्ट और पारिवारिक दावे

इस बीच गायत्री मंदिर ट्रस्ट ने दावा किया कि डॉ. हेमलता अपनी पूरी संपत्ति ट्रस्ट को दान करना चाहती थीं। इस दावे में उनकी छोटी बहन कनक लता मिश्रा का नाम सामने आया। दूसरी ओर, छत्तीसगढ़ में रहने वाली उनकी बहन शांति मिश्रा भी कानूनी दावों में अहम भूमिका में हैं। अब इस संपत्ति पर कई दावेदार और अलग-अलग बयान सामने आ रहे हैं।

कलेक्टर का बयान: लीजहोल्ड प्रॉपर्टी दान नहीं हो सकती

जबलपुर के जिला कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने मीडिया से बातचीत में साफ किया कि राइट टाउन की यह प्रॉपर्टी नगर निगम की लीजहोल्ड कैटेगरी में आती है। कानूनी रूप से इसे दान नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी बताया कि बाद में दर्ज बयान में डॉ. हेमलता ने संपत्ति दान करने से इनकार किया था। पूरा मामला एसडीएम कोर्ट को भेज दिया गया है और सभी पक्षों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। आगे का फैसला कानून के अनुसार होगा।

अस्पताल, इलाज और सेहत बिगड़ने पर सवाल

खबरें यह भी हैं कि जब उनकी तबीयत बिगड़ी तो कथित तौर पर एक धार्मिक समूह से जुड़े लोग उन्हें कार में ले गए, जिस पर पड़ोसियों ने आपत्ति जताई। इसके बाद पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। उनके इलाज, किस अस्पताल में भर्ती कराया गया, कौन सी दवाएं दी गईं और उनकी सेहत इतनी तेजी से क्यों गिरी, इन सब सवालों पर अब भी चर्चा जारी है।

निजी जीवन की त्रासदी: अकेलापन और संपत्ति विवाद

डॉ. हेमलता का निजी जीवन भी दुखद घटनाओं से भरा रहा। उनके बेटे डॉ. रचित श्रीवास्तव की 2022 में हार्ट अटैक से मौत हो गई थी। दिसंबर 2025 में उनके पति का भी निधन हो गया। एक समय परिवार से घिरी रहने वाली डॉ. हेमलता आखिर में बिना सीधे वारिस के अकेली रह गईं। 9 नवंबर 2025 को वह पूरी तरह स्वस्थ होकर एक मेडिकल कॉन्फ्रेंस में शामिल हुई थीं। लेकिन जनवरी 2026 तक IMA अधिकारियों ने उनकी हालत को जिंदा लाश जैसी बताया। कुछ ही हफ्तों में उनका निधन हो गया। अब यह मामला एक निजी विवाद से आगे बढ़कर बड़ा कानूनी केस बन चुका है।

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