
Supreme Court Judge: जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस की ओर से की गई सख्ती पर सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस उज्ज्वल भुइयां ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि अधिकारियों से जिस निष्पक्षता और संतुलन की उम्मीद की जाती है, वह धीरे-धीरे खत्म होती दिख रही है। उन्होंने साफ कहा कि युवा आईपीएस अधिकारियों को प्रदर्शनकारियों पर खुद हमले करते देखना बेहद निराशाजनक और चिंताजनक है।
जस्टिस भुइयां ने कहा कि पुलिस अधिकारियों को प्रदर्शनकारियों पर व्यक्तिगत रूप से हमला करते देखना बेहद परेशान करने वाला है। उनका कहना था कि पुलिस से अपेक्षित निष्पक्षता और दूरी बनाए रखने की भावना कमजोर पड़ती दिख रही है और यह गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने यह भी कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस को जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग करने या लोगों के मानवाधिकारों का उल्लंघन करने की जरूरत नहीं है। प्रभावी पुलिसिंग इन दोनों के बिना भी की जा सकती है।
रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी यशोवर्धन आज़ाद की किताब 'पुलिसिंग द रिपब्लिक' के विमोचन के मौके पर बोलते हुए जस्टिस भुइयां ने कहा कि बिना मानवाधिकारों का हनन किए भी सख्त और असरदार पुलिसिंग संभव है। एक आम नागरिक के लिए सड़क पर खड़ा पुलिसकर्मी ही सरकार के अधिकार का प्रतीक होता है। लोग मुसीबत में मदद के लिए पुलिस के पास जाते हैं, ऐसे में अगर बल प्रयोग में हदें पार होंगी तो पुलिस से जनता का भरोसा ही उठ जाएगा।
VIDEO | New Delhi: "Police personnel assaulting protesters is distressing; it is a matter of grave concern," says Justice Ujjal Bhuyan on police action at Jantar Mantar, at the release of retired IPS officer Yashovardhan Azad's book 'Policing the Republic'. pic.twitter.com/BSF0qdY3Nn
— Press Trust of India (@PTI_News) September 4, 2026
जंतर-मंतर और संसद मार्च के दौरान छात्र प्रदर्शनकारियों पर पुलिस और पैरामिलिट्री द्वारा आंसू गैस, लाठीचार्ज और इलेक्ट्रॉनिक बैटन के इस्तेमाल के आरोपों की जांच अब सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में हो रही है। शीर्ष अदालत ने 20 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता में एक हाई-लेवल कमेटी का गठन किया था। यह कमेटी महिला प्रदर्शनकारियों से बदसलूकी, लाठीचार्ज के वीडियो फुटेज और पूरे मामले की बारीकी से जांच कर रही है।
हिरासत में मौतों और फर्जी एनकाउंटरों पर बात करते हुए जस्टिस भुइयां ने कहा कि किसी सभ्य समाज में कस्टडी में टॉर्चर से बुरा कोई अपराध नहीं हो सकता। जब कानून के रखवाले ही कानून तोड़ने लगते हैं, तो देश में अराजकता की स्थिति पैदा हो जाती है। फर्जी एनकाउंटर को लेकर 2011 के ऐतिहासिक फैसले का जिक्र करते हुए उन्होंने दो टूक कहा- "एनकाउंटर की सोच एक आपराधिक सोच है, यह किसी भी हाल में पुलिसिंग का हिस्सा नहीं हो सकती।"
जस्टिस भुइयां ने मणिपुर की स्थिति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राज्य प्रतिभा और संस्कृति के लिहाज से बेहद समृद्ध है, लेकिन वहां जारी हिंसा चिंता का विषय बनी हुई है। उन्होंने कहा कि मणिपुर में राज्य पुलिस, मणिपुर राइफल्स, असम राइफल्स, पैरामिलिट्री और सेना समेत बड़ी संख्या में सुरक्षा बल मौजूद हैं। इसके बावजूद वहां स्थायी शांति स्थापित नहीं हो पाई है।
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